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अलविदा 2017: वे घटनाएं जिन्होंने चौंकाया, डराया और मान बढ़ाया

इस मुददे ने पूरे साल चित्तौड़गढ़ को देश व दुनिया की सुर्खियों में ला दिया।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 31, 2017, 06:14 AM IST

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    भंसाली की पद‌्मावती फिल्म ने पूरे साल देश में चर्चित रखा चित्तौड़ को

    चित्तौड़गढ़. साल 2017 आज अलविदा हो रहा है। बीते साल में जिले में कई ऐसी घटनाएं हुई, जो बड़ा असर छोड़ गई। फोरलेन जैसे नेशनल हाईवे मार्गो पर भी बड़े हादसों ने झकझोर दिया तो साल के आखिरी दौर में कई जगह सत्तासीन दल में उठापटक और मुखर असंतोष ने राजनीति में भी हलचल मचा दी। मीरा महोत्सव और सामूहिक वंदेमातरम जैसे आयोजनों ने छाप छोड़ी तो फिल्म पद्मावती के विवाद और कपासन की बेटी अनामिका की दीक्षा ने चित्तौड़गढ़ को देश-दुनिया की सुर्खियों में भी ला दिया। सांपद्रायिक तनाव और अवैध हथियारों, तस्करी जैसी घटनाओं से जिले का दूसरा बड़ा शहर निम्बाहेड़ा भी खूब सुर्खियों में रहा।

    सबसे बड़ा विवाद : 15 और 17 नवंबर

    - फिल्म पद्मावती का विवाद भले ही फिल्मकार संजयलीला भंसाली से लेकर पुलिस-प्रशासन, सरकार और जनप्रतिनिधियों के लिए मुसीबत बना रहा, पर इस मुददे ने पूरे साल चित्तौड़गढ़ को देश व दुनिया की सुर्खियों में ला दिया।

    - फिल्म के विरोध में पाडनपोल पर आंदोलन व पहली बार किलाबंदी जैसी घटना देशभर के मीडिया को यहां खींच ले आई। जयपुर में भंसाली से मारपीट के साथ साल की शुरुआत से लेकर साल के आखिरी दिन तक यह विवाद मीडिया की सुर्खियों में हैं।

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    वैराग्य ने रच दिया इतिहास: बेटी और करोड़ों की संपदा छोड़ 24 सितंबर को साधु बने दंपती

    कपासन की बेटी अनामिका चंडलिया व उनके पति नीमच निवासी सुमित राठौर की जैन भागवती दीक्षा का घटनाचक्र भी देश-दुनिया की मीडिया में छाया रहा। कारण, इस दंपती ने अपनी ढाई साल की बेटी और करोड़ों की संपति, बिजनेस व परिवार को तिलांजलि देकर दीक्षा ले ली।

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    इनसे बढ़ा गौरव : 5 अक्टूबर, मीरा महोत्सव और वंदेमारतम गान ने देश में दिलाया मान

    इस साल मीरा महोत्सव के दौरान दुर्ग की प्राचीर पर दूधिया रोशनी और दीपोत्सव पर शहर में हुई साज सजावट ने लोगों के दिल बाग-बाग कर दिए। इसी तरह 13 नवंबर को इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित सामूहिक वंदेमातरम कार्यक्रम भी मिसाल बना। जबकि एक साथ करीब 40 हजार लोगों ने वंदेमातरम गान गाया। देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियों ने समा बांधा।

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    }पहली बार ऐसा : 3 दिसंबर, 5 दिन तक बंद रहा निंबाहेड़ा, जिले में 48 घंटे बंद करनी पड़ी नेट सेवाएं

    दो दिसंबर को धार्मिक जुलूस के दौरान हुई घटना के बाद तोड़फोड़ व पथराव ने निम्बाहेड़ा शहर को पहली बार ऐसे सांप्रदायिक माहौल में ला खड़ा किया कि पूरे पांच दिन तक बाजार बंद रहे। प्रशासन को पहली बार जिले में इंटरनेट सेवाएं बंद करवानी पड़ी।

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    }चिंताजनक : 16 सितंबर व 23 दिसंबर, अवैध हथियारों और तस्करी का केंद्र बन रहा निंबाहेड़ा, एमपी से आती हैं पिस्टल

    निम्बाहेड़ा में इस साल सांपद्रायिक तनाव के साथ अवैध हथियारों की तस्करी व फायरिंग जैसी वारदातों ने भी पुलिस प्रशासन और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। एक बार एटीएस ने आकर जम्मू कश्मीर के फर्जी लाइसेंसी हथियार पकड़े तो दूसरी बार एसओजी ने 20 हथियारों का जखीरा पकड़ा। पुलिस ने भी अवैध हथियार जब्त किए। फायरिंग में हत्या व हमले के मामले भी हुए।

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    बाल विवाह; दो बहनों की बारात को लौटाया

    कलेक्ट्रेट से महज 8 किमी दूर एक गांव में तीन नाबलिग बहनों की बारातें आ गई। मीडिया व बाल कल्याण समिति की जागरुकता से एनवक्त पर प्रशासन ने ये बाल विवाह रुकवा दिए, पर सालभर चोरी छुपे बाल विवाह हुए बिना नहीं रहे।

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    फोरलेन पर बड़े हादसों ने खोली सिस्टम की पोल

    यूं तो कई हादसे दर्दनाक रहे, पर इस साल खासकर अगस्त में नेशनल हाइवे फोरलेन मार्गों पर एक के बाद एक चार हादसों में 22 लोगों की मौत ने सिस्टम की भी पोल खोल दी। मरने वालों में अधिकांश धार्मिक श्रद्वालु थे। लगभग हर हादसा जिम्मेदार सरकारी विभागों व एजेंसियों की लापरवाही व अनदेखी का नतीजा भी था।

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