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झीलों की नगरी में बढ़ रहे आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर निगम उदयपुर सोमवार को अनूठा टेंडर जारी करेगा। एक...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 06:55 AM IST
झीलों की नगरी में बढ़ रहे आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर निगम उदयपुर सोमवार को अनूठा टेंडर जारी करेगा। एक कुत्ते को पकड़कर नसबंदी और टीकाकरण करवाने पर ठेकेदार को नगर निगम 1200 रुपए प्रति कुत्ते के हिसाब से देगा। इसके लिए तकनीकी निविदा खुल चुकी है। वित्तीय निविदा सोमवार को खुलेगी। टेंडर का नाम एबीसी टेंडर रखा गया है। यह दो साल के लिए मान्य रहेगा। एक मोटे अनुमान के अनुसार इस समय शहर में 50 हजार से ज्यादा कुत्ते हो चुके हैं और सुबह से लेकर देर रात तक ये भेड़-बकरियों के रेवड़ की तरह से शहर में घूमते हैं। नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी नरेंद्र श्रीमाली ने बताया कि कुत्तों को लेकर शहर में शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने यह टेंडर किया है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कुत्ता पकड़ो अभियान का फैसला लोगों के दबाव के बाद लिया गया है, क्योंकि शहर में कुत्तों की भरमार हो गई है। निगम के टेंडर के अनुसार जिस ठेकेदार को कुत्ते पकड़ने का टेंडर दिया जाएगा, उसे महीनेभर में कम से कम 200 कुत्ते पकड़ने होंगे। ठेकेदार को कॉन्ट्रेक्ट मिलने के बाद निगम का एक कर्मचारी सुपरवाइजर के रूप में ठेकेदार से जुड़ा रहेगा। हर दिन पकड़े जाने वाले कुत्तों की एंट्री होगी। उसी अनुसार ठेकेदार को पैसे दिए जाएंगे।

उदयपुर में बढ़ते आवारा कुत्तों को लेकर निगम का अनोखा ‘कुत्ता पकड़ो’ अभियान

कुत्ते के कान पर वी मार्क का निशान लगाना होगा ताकि उसकी पहचान हो सके

निगम के अधिकारियों का कहना है कि कुत्ते पकड़ने के टेंडर के लिए निगम ने कई शर्तें रखीं हैं और नियम तय किए हैं। जिस कुत्ते की नसबंदी हो जाएगी, उसके दाएं कान पर वी मार्क का निशान लगाना होगा, ताकि स्टरलाइज्ड कुत्तों की पहचान की जा सके। इसके साथ ही नसबंदी के दौरान ठेकेदार यूटरस, ओवेरी, फैलपॉइन, ट्यूब्स, टेस्टिकल्स जैसे निकाले गए अंगों को ठेकेदार को वापस निगम को सौंपना होगा। नसबंदी करने के बाद निगम के सुपरवाइजर से अप्रूवल मिलने के बाद ही कुत्तों को वापस शहर में छोड़ा जा सकेगा।

कुत्ता पकड़ने वाले वाहनों पर जीपीएस सिस्टम भी होगा

ठेकेदार को कुत्तों को पकड़ने के लिए जीपीएस से मॉनिटरिंग भी करनी होगी। ठेकेदार को कुत्ता पकड़ने वाले वाहनों पर जीपीएस सिस्टम लगाना होगा। निगम भी इसकी मॉनिटरिंग करेगा। टेंडर के नियमों के अनुसार नसबंदी रजिस्टर्ड वेटरनरी डॉक्टर ही करेगा।