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...और लड़कों जैसी होकर अकेली ही रह गई मीता

उदयपुर | भारतीय लोक कला मंडल और राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जोधपुर के साझे में नाटक ‘‘मीता की कहानी’’ का मंचन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 12, 2018, 07:30 AM IST

...और लड़कों जैसी होकर अकेली ही रह गई मीता
उदयपुर | भारतीय लोक कला मंडल और राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जोधपुर के साझे में नाटक ‘‘मीता की कहानी’’ का मंचन रविवार शाम को हुआ। मासिक नाट्य संध्या के तहत दी परफॉर्मर्स की ओर से प्रसिद्ध लेखक विजय तेंदुलकर के लिखे और युवा नाट्य निदेशक कविराज लईक का निर्देशित नाटक मीता की कहानी के मंचन को देखने कई लोेग पहुंचे। नाटक में मीता उर्फ सुमित्रा की मनोवैज्ञानिक क्षमता और कमजोरी को दर्शाता है। बचपन से ही मीता अपनी हम उम्र के लड़कों के साथ खेलती रही है जिस कारण उसका व्यवहार और जीने का तरीका लड़कों जैसा हो गया, जिस कारण वह लड़कियों से आकर्षित होती है। माता-पिता और संबंधी भी उसे बार-बार लड़कों से दूर रहने के लिए कहते हैं। नतीजा यह कि वह आम लड़कों की तरह लड़कियों को पसंद करने लगती है। उसकी इस प्रवृत्ति के चलते सगे-संबंधी, दोस्त-साथी एवं समाज उससे दूर हो जाते हैं। इसी तरह कहानी का अंत होता है। इस दौरान संस्था के मानद सचिव रियाज तहसीन, निदेशक लईक हुसैन, अंतरराष्ट्रीय कलाकार पद्मश्री निरंजन गोस्वामी, लेखक सुशील कुमार सिंह मौजूद थे।

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Web Title: ...और लड़कों जैसी होकर अकेली ही रह गई मीता
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