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कथक से कृष्ण की रास कथा कही, सितार से बरसाए सुर

Udaipur News - उदयपुर | शिल्पग्राम के मुक्ताकाशी रंगमंच पर रविवार की शाम शास्त्रीय नृत्य और संगीत प्रेमियों के लिए यादगार बन गई।...

Dainik Bhaskar

Mar 12, 2018, 07:30 AM IST
कथक से कृष्ण की रास कथा कही, सितार से बरसाए सुर
उदयपुर | शिल्पग्राम के मुक्ताकाशी रंगमंच पर रविवार की शाम शास्त्रीय नृत्य और संगीत प्रेमियों के लिए यादगार बन गई। जयपुर घराना शैली के प्रतिष्ठित कथक कलाकार हरीश गंगानी दल ने कथक से शिव स्तुति और भगवान कृष्ण के रास को कथा रूप में दर्शाया, जबकि अनुपमा भागवत ने सितार से सुर बरसाए।

शास्त्रीय संगीत और नृत्य समारोह ‘ऋतु वसंत’ की आखिरी शाम हरीश और दल की पहली पेशकश शिव स्तुति थी। राग भटियार में निबद्ध इस रचना में भाव प्रवणता और लास्य का उत्कृष्ट तारतम्य रहा। हरीश गंगानी ने कथक के शुद्ध पक्ष से अवगत कराते हुए थाट, आमद और परनें पेश की। नर्तन में अनुभवी ठहराव और लयकारी के साथ पद संचालन व दैहिक भंगिमाओं का मिश्रण दिखा। तबला वादक योगेश गंगानी के साथ हरीश का सामंजस्य देखते ही बन पड़ा। दल ने ‘कृष्ण रास’ को एक नए अंदाज में प्रस्तुत किया। इसमें बनारस घराने के पं. छन्नूलाल मिश्रा की ठुमरी ‘रंग डारूंगी, डारूंगी रंग...’ को अभिनय, नृत्य और भाग-भंगिमाओं से दर्शाया। प्रस्तुति में संजीत गंगानी, पारूल दत्ता, नंदिनी खंडेलवाल, आरती त्रिपाठी, अक्षिता दाधीच ने भी रंग दिखाया। सितार पर हरिहर शरण भट्ट और सारंगी पर महेन्द्र सोनगरा ने संगत की। इससे पहले बैंगलुरू की संगीतज्ञ और मशहूर सितार वादक अनुपमा ने वादन की शुरुआत राग विहाग से की। तारों पर दौड़ती अंगुलियों ने ख्याल के बाद विलंबित और द्रुत लय से सुर-ताल का जादू फैला दिया। उन्होंने राग दीपचंदी में निबद्ध रचना को ऐसे अंदाज में पेश किया कि श्रोता स्वर लहरियों में खो से गए। उनके साथ तबला नवाज ओजस अढ़िया ने संगत की। आरंभ में पश्चिम केन्द्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक फुरकान खान ने कलाकारों का स्वागत किया।

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