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दोपहर में उदयसागर के पास आग, देर रात सज्जनगढ़ अभयारण्य की पहाड़ी भभकी

उदयपुर| सज्जनगढ़ अभयारण्य के अंदर गोरेला चौकी के पास पहाड़ी पर रविवार देर रात आग लग गई। कुछ ही देर में आग करीब सात...

Danik Bhaskar | Mar 12, 2018, 07:35 AM IST
उदयपुर| सज्जनगढ़ अभयारण्य के अंदर गोरेला चौकी के पास पहाड़ी पर रविवार देर रात आग लग गई। कुछ ही देर में आग करीब सात हेक्टेयर पर फैलते हुए ऊपरी हिस्से में बढ़ गई। इससे पहले दोपहर में उदयसागर झील के पास पनवाड़ी वनखंड में जिंक पंप हाउस से सटी पहाड़ी पर आग से कई देसी और प्रवासी पक्षियों, जंतुओं और विभिन्न प्रजाति के सांपों के जीवन पर संकट आ गया। डीएफओ हरिणी वी. ने बताया कि अभयारण्य में फायर लाइन बनाई गई है। संदेह है कि किसी बाहरी व्यक्ति ने आग लगाई है। अभयारण्य में वनकर्मी मौके पर मौजूद हैं, जो आग बुझाने का प्रयास और बचाव कार्य कर रहे हैं। पहाड़ियों के निचले हिस्से में लगी आग पर तो वनकर्मियों ने काबू पाया है। एकदम काला अंधेरा और कई जीव-जंतु होने से ऊपरी हिस्से पर लगी आग को बुझाने के लिए वहां तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है, फिर भी वनकर्मी वहां जाने का प्रयास कर रहे हैं। उधर, पनवाड़ी वनखंड में जिंक पंप हाउस से सटी पहाड़ी पर घास और झाड़ियां घनी होने से आग कुछ ही देर में बड़े हिस्से में फैल गई। सूचना पर वनकर्मियों ने बचाव कार्य शुरू ताे किया है, लेकिन इस आग से यहां रहने वाले कई देशी और प्रवासी पक्षियों, जंतुओं और विभिन्न प्रजाति के सांपों के जीवन पर संकट आ गया है। आग की सूचना पर घायल जीवों को बचाने के उद्देश्य से पक्षी-पर्यावरण प्रेमी देवेन्द्र मिस्त्री, सुनील दुबे अौर कनिष्क कोठारी मौके पर गए। डीएफओ ओपी शर्मा ने बताया कि घटना पहाड़ी की राजस्व जमीन पर हुई है। सूचना मिलने पर वनकर्मियों को अाग बुझाने आैर बचाव कार्य के लिए भेजा है। पर्यावरण प्रेमी सुनील दुबे ने कहा कि उदयपुर की पहाड़ियों की जैव विविधता को बचाना है तो सरकार को आग पर नियंत्रण के तरीकों के लिए भी बजट तय कर प्रयास करने होंगे।

पहाड़ी पर लगी आग

पहाड़ी पर लगी आग

पक्षियों और जीव-जंतुओं का है बड़ा आवास

पक्षी विशेषज्ञ देवेन्द्र मिस्त्री ने बताया कि उदयसागर से लगा होने के कारण पहाड़ी बड़े ईगल, घुग्घू, इंडियन आउल, ब्राउन फिशर आउल, तीतर, स्टॉर्क, आईबीज, बगुले और स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का आवास है। बड़ी संख्या में बिज्जू, सेही, खरगोश, झाऊ चूहा, जरख, तेंदुआ, गोह जीव भी हैं।

आशंका : पहाड़ी और जंगल खत्म करने की साजिश: पर्यावरण प्रेमियों ने बताया कि इस पहाड़ी पर पिछले कुछ सालों से हर वर्ष आग लग रही है। इस क्षेत्र में भू-माफिया और होटल उद्यमियों की नजर है। संदेह है कि इस पहाड़ी और क्षेत्र को कन्वर्ट कराने के लिए भू-माफियाओं इस पर आग लगवाते हों। ताकि पांच-सात वर्षों में यहां पर जंगल और वन्यजीव बिलकुल खत्म हो जाएं ।