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मुंबई ब्लास्ट 25 साल बाद

Udaipur News - तत्कालीन असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर सुरेश वालीशेट्‌टी बम धमाकों के जांच अधिकारी बनाए गए थे। उन्होंने बताया- 30...

Dainik Bhaskar

Mar 12, 2018, 07:35 AM IST
मुंबई ब्लास्ट 25 साल बाद
तत्कालीन असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर सुरेश वालीशेट्‌टी बम धमाकों के जांच अधिकारी बनाए गए थे। उन्होंने बताया- 30 अलग-अलग एंगल से मामले की जांच की गई थी। घटना के जो आरोपी भारत में रह रहे हैं, उनके खिलाफ आज 25 साल बाद भी आरोप साबित करना चुनौती है। ठोस सबूत ना होने से इकबाल कासकर को पहले ही बरी करना पड़ा है। आज वो दाऊद की सभी संपत्ति का मालिक बना है। अब मुझे नहीं लगता कि दाऊद इब्राहिम किसी भी कीमत पर अपनी मर्जी से भारत लौटेगा। वैसे भी दाऊद अगर जांच एजेंसी के हाथ लगता है, तो पाकिस्तान को अपनी साजिश दुनिया के सामने आने का डर होगा। बम विस्फोट करने वालों और दाऊद के बीच का जरिया टाइगर ही था। इसलिए दाऊद से पहले टाइगर मेमन को पकड़ना होगा।

12 मार्च 1993 को 12 विस्फोटों में 253 लोगों की जान गई थी

मुंबई से अंडरवर्ल्ड और माफियाराज का अंत, मुंबईकर के आगे हार गया आतंक

पहली बार देश में आरडीएक्स से किया गया था विस्फोट

भास्कर न्यूज नेटवर्क | मुंबई

आज 12 मार्च है। ठीक 25 साल पहले मुंबई सीरियल ब्लास्ट से दहल उठी थी। 2 घंटे 10 मिनट के भीतर एक के बाद एक 12 धमाके हुए। 257 लोग मारे गए। 1300 से ज्यादा लोग जख्मी हुए। यह उस वक्त दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला था। देश में पहली बार िवस्फोटकों में आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था। यह हमला अंडरवर्ल्ड ने कराया था। अभी भी धमाकों से जुड़े लोगों के खिलाफ धरपकड़ जारी है। चार दिन पहले ही इस केस में आरोपी फारुख टकला को दुबई से मुंबई लाया गया है। टकला अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का गुर्गा है। हालांकि इस हमले ने हमें कुछ सबक भी सिखाए। इसके बाद हमारे देश में गैंगस्टर, स्मगलर के खिलाफ अभियान तेज हुआ। देश की इंटलीजेंस एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ा। खुफिया नेटवर्क पूरी तरह बदल गया। सरहदी इलाकों पर निगरानी तेज हुई। इस तरह से कई बदलाव आए।

दो घंटे 10 मिनट के अंदर 12 जगहों पर हुए थे सीरियल ब्लास्ट



दाऊद इब्राहिम से पहले टाइगर मेमन को पकड़ना जरूरी: एसीपी सुरेश वालीशेट्‌टी

14 हजार पेज के सबूत पेश हुए, 15 हजार पेज का जजमेंट ऑर्डर।

ब्लैक फ्राइडे: मुंबई हमले पर बनी फिल्म और लिखी किताब हिट रही

मुंबई हमले पर 2004 में फिल्म ब्लैक फ्राइडे बनी। फिल्म बनने के 2 साल बाद रिलीज हुई थी। ये फिल्म हुसैन जैदी की 2002 में धमाकों पर ही लिखी किताब ‘ब्लैक फ्राइडे’ पर आधारित थी।

तस्वीर वोर्ली स्थित सेंचुरी बाजार की है। इन धमाकों में सबसे अधिक नुकसान यहीं पहुंचा था।



सीबीआई ने पाक पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की धारा हटाई: वकील निकम

वकील उज्जवल निकम ने धमाके दोषियों को सजा दिलाई थी। उज्जवल निकम बताते हैं- मुंबई बम विस्फोट की साजिश दुबई में रची गई थी। धमाका करने के लिए जिन लोगों को चुना गया, उन्हें पाकिस्तान में प्रशिक्षण दिया गया। आरोपियों के खिलाफ हत्या, साजिश रचने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसी धाराएं लगाई गईं। आरोपियों से जब्त किए गए पासपोर्ट से साजिश के बारे में ठोस सबूत मिले। उनके पासपोर्ट पर मुंबई और दुबई से उड़ान करने की बात पता चलती है। फारुख टकला ने भी इस्लामाबाद एयरपोर्ट पर कोई जांच न होने की बात को कोर्ट में कबूल किया था। लेकिन पाक के खिलाफ ठोस सबूत ना होने की वजह से सीबीआई ने भारत के खिलाफ युद्ध की धाराएं हटा दीं। लेकिन मैं 26/11 में पाकिस्तान के शामिल होने की बात कोर्ट के सामने ले ही आया।

दैिनक भास्कर, उदयपुर, सोमवार 12 मार्च, 2018

यहां हुए थे धमाके

(1) मुंबई स्टॉक एक्सचेंज

(2) नरसी नाथ स्ट्रीट

(3) शिव सेना भवन

(4) एयर इंडिया बिल्डिंग

(5) सेंचुरी बाजार

(6) माहिम

(7) झवेरी बाजार

(8) सी रॉक होटल

(9) प्लाजा सिनेमा

(10) जुहू सेंटूर होटल

(11) सहार हवाई अड्डा

(12) एयरपोर्ट सेंटूर होटल

पुलिस ने 48 घंटे में सुलझाया था केस, स्कूटर बना था अहम सुराग

पुलिस ने 48 घंटे में केस सुलझा दिया था। डीसीपी राकेश मारिया के नेतृत्व में 150 लोगों की टीम बनी थी। अहम सुराग बना था माहिम में खड़ा एक स्कूटर, जिसमें बम तो था पर विस्फोट नहीं हुआ।

पांच सबसे बड़े बदलाव

अंडरवर्ल्ड का खात्मा: मुंबई हमले में अंडरवर्ल्ड का हाथ था। अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग बॉलीवुड, बिल्डरों से वसूली करते थे। खात्मे के लिए मकोका कानून बना। एनकाउंटर शुरू हुए। इस दौरान एनकाउंटर स्पेशलिस्ट दया नायक, विजय सालस्कर, प्रदीप शर्मा और सचिन वाजे जैसे अफसर उभरे। पुलिस के प्रति लोगों में विश्वास बढ़ा।

पुलिसिया खुफिया तंत्र मजबूत हुआ: पुलिस ने खुफिया सिस्टम में बदलाव करते हुए कम्यूनिकेशन सिस्टम को मजबूत किया। कुछ ही पल में विदेश में बैठे माफियाओं की योजना का पता चलने लगा। अंडरवर्ल्ड को मदद करने वाले लोग नजर में आने लगे। उगाही पर रोक लगी।

मुंबई स्पिरिट दिखी : मुंबई ब्लास्ट विवादित बाबरी ढांचे विध्वंस का बदला लेने के लिए किए गए थे। पर इस हमले ने लोगों में एकता की भावना दी। हमले के तुरंत बाद लोग घायलों की मदद में आए। अगले दिन बिना किसी निर्देश के जर्जर बिल्डिंगों में काम पर लौटे। तब से सांप्रदायिक हिंसा में भी कमी आई। इसे मुंबई स्पिरिट कहा जाता है।

हमले के 48 घंटे के भीतर साजिश करने वालों की पहचान कर ली गई थी...



700 से 750 धाराएं लगाई गईं, 500 पेज में ऑपरेटिव ऑर्डर तैयार हुआ: जज कोड़े

बम विस्फोट में जज प्रमोद कोड़े ने फैसला सुनाया था। प्रमोद कोड़े बताते हैं- 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। 257 लोग मारे गए थे। न्याय की आखिरी जिम्मेदारी देश की न्यायपालिका पर ही थी। मेरे लिए बतौर जज मामले की सुनवाई का हर दिन एक नया चैलेंज था। शुरुआत में जांच एजेंसी ने 180 लोगों को पकड़ा था। जांच हुई, पूछताछ हुई। ठोस सबूत नहीं होने की वजह से करीब 30-40 आरोपियों को छोड़ दिया गया। आखिर में 129 लोग आरोपी बनाए गए। अलग-अलग मामलों में कुल 700 से 750 धाराएं लगाई गईं। 38 हजार से ज्यादा सवाल पूछे गए। 14 हजार पेज के लिखित सबूत जुटाए गए। इस मामले में ऑपरेटिव ऑर्डर 500 पेज में था। और आखिर में 15 हजार पन्नों में जजमेंट ऑर्डर तैयार किया गया।

180 लोग पकड़े गए थे। 129 आरोपी बने। 100 दोषी करार।

25 साल बाद भी आरोपी पकड़े जा रहे, मुख्य आरोपी अब भी फरार

1 अप्रेल 1994 टाडा कोर्ट में सुनवाई शुरू। 12 साल 12 दोषियों को फांसी, 20 को आजीवन कारावास। चार दिन पहले भी एक आरोपी फारुख टकला पकड़ा गया। दाऊद अब भी फरार है।

जांच एजेंसियों में तालमेल बेहतर हुआ, संगठित अपराध कम हुए

मुंबई हमले से पहले जांच एजेंसियों में कोई तालमेल नहीं था। लेकिन हमले के बाद महाराष्ट्र पुलिस, मुंबई पुलिस ने अंडरवर्ल्ड की पूरी कमर तोड़ दी है। इसी तरह केंद्रीय जांच एजेंसियों आईबी, रॉ, सीबीआई का लोकल पुलिस के साथ तालमेल बढ़ा। यही वजह है िक 1993 के बाद अंडरवर्ल्ड कोई बड़े हमले को अंजाम नहीं दे सका।

सरहदी इलाकों में सुरक्षा बढ़ी, जाली पासपोर्ट पर सख्ती

मुंबई हमले के बाद आरोपी जाली पासपोर्ट और गैरकानूनी तरीके से नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान की सीमा से भाग निकले थे। लिहाजा सीमाई इलाकों पर चौकसी बढ़ाई गई। पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया कठिन की गई। जाली पासपोर्ट पर सख्ती की गई।

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