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जलवा पूजन से बढ़ रहा बेटा-बेटी में भेदभाव : भदेल

आरसीए के नूतन सभागार में गुरुवार को 32वें भारतीय गृह विज्ञान संघ के तीन दिन के द्विवार्षिक सम्मेलन का शुभारंभ करने...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 07:45 AM IST
जलवा पूजन से बढ़ रहा बेटा-बेटी में भेदभाव : भदेल
आरसीए के नूतन सभागार में गुरुवार को 32वें भारतीय गृह विज्ञान संघ के तीन दिन के द्विवार्षिक सम्मेलन का शुभारंभ करने के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री अनीता भदेल ने कहा कि बेटा-बेटी में भेदभाव माताएं खुद बढ़ा रही हैं। मां बेटा होने पर जलवा पूजन करती हैं और बेटी होने पर नहीं। ऐसी परंपराओं से अन्य माताओं में बेटियों के प्रति हीन भावना बढ़ जाती है जो सामाजिक परिवर्तन भी नहीं होने देती है। उन्होंने कहा कि गृह विज्ञान के दायरे में महिलाओं के साथ पुरुषों को भी लाना चाहिए ताकि कई पुरुषों की गंदी आदतों को दूर किया जा सके। गृह विज्ञान सामाजिक परिवर्तन ला सकता है। सम्मेलन में देशभर के 460 से अधिक गृह विज्ञान वैज्ञानिक और छात्राएं भाग ले रही हैं।

सामाजिक विकास के लिए व्यक्तिवादी नहीं, परिवारवादी बनना होगा : मंत्री किरण माहेश्वरी

उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने कहा कि लोग व्यक्तिवादी बन गए हैं। सामाजिक विकास के लिए व्यक्तिवादी नहीं, परिवारवादी बनना होगा। माहेश्वरी ने गृहविज्ञान का एक उदाहरण देते हुए कहा कि वे अपनी सहेली की बेटी के घर गुडगांव गईं। वहां किचन में न तो दूध था और न ही कॉफी। खाना तो दूर की बात है। जब इसकी वजह जानी तो वह बेटी बोली- सुबह का नाश्ता और दोपहर का भोजन ऑफिस में कर लेते हैं। रात के लिए कुछ पैक करा लाते हैं। किचन में कुछ रखने की जरूरत ही नहीं है। क्या बच्चों को हम यह गृहविज्ञान सिखा रहे हैंω

होमसाइंस विषय में लड़कों की भागीदारी बढ़े ताकि वे घर का विज्ञान समझ सकें : परिवार एवं समुदाय विज्ञान विषयक सम्मेलन में एमपीयूएटी के कुलपति प्रो. उमाशंकर शर्मा ने कहा कि यहां होमसाइंस में 25 प्रतिशत सीटें बॉयज के लिए आरक्षित कर रखी हैं ताकि पुरुष भी घर का विज्ञान समझ सकें। मुख्यवक्ता केन्द्रीय कृषक महिला संस्थान भुवनेश्वर की निवर्तमान निदेशक प्रो. जतिन्दर किश्तवाड़िया ने विकास में सामुदायिक विज्ञान की भूमिका विषय पर व्याख्यान दिया। गृह विज्ञान एसोसिएशन अध्यक्ष प्रो. अंजली कारोलिया, गृह विज्ञान महाविद्यालय अधिष्ठाता डाॅ. शशि जैन, एमपीयूएटी के छात्र कल्याण अधिकारी डाॅ. सुमन सिंह आदि ने भी विचार व्यक्त किए। सम्मेलन के दूसरे दिन शुक्रवार को गृह विज्ञान के पांचों क्षेत्रों में यथा मानव विकास एवं पारिवारिक अध्ययन, आहार एवं पोषण, वस्त्र एवं परिधान अभिकल्पना, परिवार संसाधन प्रबंधन, गृह विज्ञान प्रसार एवं संचार प्रबंधन पर पांच समानान्तर सत्र गृह विज्ञान महाविद्यालय में होंगे।

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