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उदयपुर संभाग के लिए ये फायदे

राष्ट्रीय बांस योजना का लाभ संभाग के उदयपुर, प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा जिले को हो सकता है। राजस्थान में सबसे ज्यादा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 07:50 AM IST

राष्ट्रीय बांस योजना का लाभ संभाग के उदयपुर, प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा जिले को हो सकता है। राजस्थान में सबसे ज्यादा बांस उदयपुर में होता है। यहां डेंड्रो कैलेमस स्ट्रिक्टस नामक बांस होता है जो बहुत मजबूत माना जाता है। उदयपुर जिले के 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अच्छी गुणवत्ता और करीब इतने की क्षेत्र में कम गुणवत्ता वाला बांस पैदा होता है। प्रति वर्ष छह हजार हेक्टेयर में बांस की कटाई होती है और इससे करीब 3 करोड़ रुपए की आय होती है। पेसा एक्ट के तहत यह आय जिला परिषद के जरिए ग्राम पंचायत को जाती है। बता दें कि केंद्रीय बजट में राष्ट्रीय बांस योजना शुरू करने की घोषणा हुई है जिसके तहत 1290 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

राष्ट्रीय बांस योजना

राष्ट्रीय बांस योजना

प्रदेश में सबसे ज्यादा बांस उदयपुर में, किसानों को होगा फायदा

एकलव्य स्कूल

संभाग के कई क्षेत्रों में इसकी जरूरत

संभाग के कई क्षेत्रों में इसकी जरूरत

अनुसूचित जाति-जनजाति की 50 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या वाले और कम से कम 20 हजार आदिवासी व्यक्तियों वाले प्रत्येक ब्लॉक में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय बनेगा। उदयपुर के खेरवाड़ा, ऋषभदेव, सराड़ा, सलूंबर, लसाड़िया, झाड़ोल और कोटड़ा का संपूर्ण क्षेत्र और गिर्वा व गोगुंदा का आंशिक क्षेत्र जनजाति उपयोजना क्षेत्र में शामिल हैं। इनमें खेरवाड़ा, कोटड़ा और सलूंबर में पहले से ही एकलव्य स्कूल हैं। बजट के अनुसार बचे हुए ब्लॉकों में ये स्कूल स्थापित होंगे।

अनुसूचित जाति-जनजाति की 50 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या वाले और कम से कम 20 हजार आदिवासी व्यक्तियों वाले प्रत्येक ब्लॉक में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय बनेगा। उदयपुर के खेरवाड़ा, ऋषभदेव, सराड़ा, सलूंबर, लसाड़िया, झाड़ोल और कोटड़ा का संपूर्ण क्षेत्र और गिर्वा व गोगुंदा का आंशिक क्षेत्र जनजाति उपयोजना क्षेत्र में शामिल हैं। इनमें खेरवाड़ा, कोटड़ा और सलूंबर में पहले से ही एकलव्य स्कूल हैं। बजट के अनुसार बचे हुए ब्लॉकों में ये स्कूल स्थापित होंगे।

टीएसपी योजना

संभाग के जनजातियों विशेष क्षेत्रों को होगा फायदा

संभाग के जनजातियों विशेष क्षेत्रों को होगा फायदा

अनुसूचित जाति-जनजातियों के लिए चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों के लिए अलग से बजट रखा गया है। इसका फायदा भी मेवाड़ के टीएसपी जिलों को मिल सकता है। केन्द्र सरकार ने अनुसूचित जनजातियों के लिए चल रहे 305 कार्यक्रमों के लिए 39135 करोड़ रुपए का बजट रखा है।

अनुसूचित जाति-जनजातियों के लिए चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों के लिए अलग से बजट रखा गया है। इसका फायदा भी मेवाड़ के टीएसपी जिलों को मिल सकता है। केन्द्र सरकार ने अनुसूचित जनजातियों के लिए चल रहे 305 कार्यक्रमों के लिए 39135 करोड़ रुपए का बजट रखा है।

पर्यटन

100 स्मारक आदर्श बनेंगे, मेवाड़ से शामिल हो सकते हैं ऐसे मंदिर-स्मारक

100 स्मारक आदर्श बनेंगे, मेवाड़ से शामिल हो सकते हैं ऐसे मंदिर-स्मारक

देश के दस प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को आधारभूत सुविधाओं, कौशल विकास वाला व्यावहारिक दृष्टिकोण, प्रौद्योगिकी का विकास, निजी निवेश आकर्षित करके, ब्रांडिंग व विपणन का अनुसरण करते हुए आदर्श पर्यटन गंतव्यों में विकसित करने की घोषणा बजट में हुई है। इसके अलावा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के 100 आदर्श स्मारकों में पर्यटक सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। मेवाड़ में इस विभाग के अधीन ऐसे कई मंदिर स्मारक हैं, जिन्हें इस घोषणा के तहत बजट मिलने की उम्मीद है। ऐसे में यहां धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।

देश के दस प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को आधारभूत सुविधाओं, कौशल विकास वाला व्यावहारिक दृष्टिकोण, प्रौद्योगिकी का विकास, निजी निवेश आकर्षित करके, ब्रांडिंग व विपणन का अनुसरण करते हुए आदर्श पर्यटन गंतव्यों में विकसित करने की घोषणा बजट में हुई है। इसके अलावा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के 100 आदर्श स्मारकों में पर्यटक सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। मेवाड़ में इस विभाग के अधीन ऐसे कई मंदिर स्मारक हैं, जिन्हें इस घोषणा के तहत बजट मिलने की उम्मीद है। ऐसे में यहां धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।

एक्सपोर्ट

एक्सपोर्ट इंसेंटिव पर पैसा आने से पहले ठेकेदार को देना होगा टैक्स

बजट में कई ऐसी छुपी हुई चीजें भी हैं जिनके बारे में शायद लोगों को पता नहीं होगा। उदयपुर के सीए निर्मल सिंघवी ने बताया कि बजट में ठेकेदारों को एक्सपोर्ट इंसेटिव पर पैसा आने से पहले ही टैक्स देना होगा। अबतक जितना पैसा आजा था उतनी इनकम बतानी होती थी, अब जो पैसा आया नहीं उसे आने से पहले ही बताना होगा। इसी तरह टैक्स में ये 143- 3ए धारा भी लेकर आए हैं जिसके तहत अब ई-असेसमेंट होगा और पहले जहां कर की जांच एक अधिकारी करता था अब अधिकारियों की पूरी टीम करेगी। हालांकि निर्मल ने बताया कि ई-असेसमेंट से फायदा भी होगा, क्योंकि असेसी को बार-बार अधिकारी के सामने प्रस्तुत नहीं होना पड़ेगा और ऑनलाइन ही सारा काम हो जाएगा।

बिजनेस

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