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‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी’ कविता अब स्कूलों के पाठ्यक्रम में नहीं / ‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी’ कविता अब स्कूलों के पाठ्यक्रम में नहीं

Udaipur News - राज्यसरकार का शिक्षा विभाग स्कूली पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय गौरव वाली चीजों को जिस समय जोड़ने का दावा कर रहा है, तब...

Bhaskar News Network

Oct 07, 2017, 09:25 AM IST
‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी’ कविता अब स्कूलों के पाठ्यक्रम में नहीं

राज्यसरकार का शिक्षा विभाग स्कूली पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय गौरव वाली चीजों को जिस समय जोड़ने का दावा कर रहा है, तब आजादी से जुड़ी सुभद्राकुमारी चौहान की कविता खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी को सिलेबस से बाहर कर दिया गया है। दैनिक भास्कर को जब यह जानकारी मिली तो पहली से 12वीं कक्षा की सभी हिन्दी पाठ्य पुस्तकों को चेक किया गया इस पर हैरानीजनक जानकारी मिली कि इस विश्व प्रसिद्ध कविता को हटा दिया गया है और इसकी जगह सुभद्रा कुमारी चौहान की कुछ ऐसी सामान्य रचनाओं को शामिल किया गया है, जाे इस रचना के बराबर कहीं नहीं ठहरतीं हैं।



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राज्य सरकार ने पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय गौरव को जोड़ने के दावे बार-बार किए हैं, लेकिन सुभद्राकुमारी चौहान की यह कविता हटाना कई प्रश्न खड़े करती है। सरकार का दावा है कि उसने रानी पद्मिनी, पन्नाधाय, भगतसिंह, वीर सावरकर, ठक्कर बापा, महाराणा प्रताप, सुभाषचंद्र बोस जैसे कितने ही लोगों से जुड़ी रचनाओं को जोड़कर राजस्थान के पाठ्यक्रम को राष्ट्रवादी स्वरूप दिया है, लेकिन अंग्रेजी सरकार के खिलाफ एक सीधी ललकार साबित होने वाली कविता को हटाना किसी भी तरह से उचित नहीं है। यह एक महिला की बहादुरी की कविता भी है और स्त्री की गरिमा, गैरत और मर्यादा में भी बढ़ोतरी करती है। यह कविता कम और लोकगीत अधिक है। इसलिए यह बच्चों को गायन और स्मरण में भी एक अलग तरह का स्वाद प्रदान करती है। यह कविता बच्चों को सहज ही इतिहास का बोध भी करवा देती है।

बोर्ड में लगाई है सृजन और नया बचपन

{माध्यमिकशिक्षा बोर्ड अजमेर ने कक्षा 12 की सृजन में सुभद्राकुमारी की कविता बचपन और सृजन शामिल की हैं। कक्षा नौ की हिन्दी प्रबोधिनी में पाठ दस है, जिसका शीर्षक है मेरा जीवन। कक्षा 11 की आलोक में रानी लक्ष्मी बाई पाठ जोड़ा है।

सिलेबस तैयार करने वाले शिक्षकों का कहना है कि दिक्कत एक पंक्ति को लेकर है। ये है : विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी। मुख्यमंत्री सिंधिया घराने से हैं और सिलेबस तैयार करने वालों को लगता है कि इन पंक्तियों को शामिल करने से सरकार नाराज हो जाएगी। हालांकि इस तरह के आधार से शिक्षा मंत्री साफ इनकार करते हैं और वे कहते हैं कि हमने चौहान की कई और रचनाएं पाठ्यक्रम में शामिल की हैं।

साहित्यकार असद जैदी कहते हैं, सुभद्राकुमारी चौहान की कविता खूब लड़ी मर्दानी, 1857 के विद्रोहियों को नायकत्व प्रदान करने वाली संभवत: पहली साहित्यिक रचना है। इससे पहले का भद्र साहित्य या तो 1857 के विद्रोहियोंे की या तो निंदा करता है या फिर इस पर मौन है। सुभद्राकुमारी कविता में रानी लक्ष्मी बाई को केंद्र में रखकर स्त्री की गरिमा, गाैरव और स्त्री जाति के आत्मसम्मान को केंद्र में लाती हैं। अंग्रेजों के खिलाफ सीधी ललकार वाली यह कविता 1857 को राष्ट्रीय आंदोलन में स्वीकृति दिलाती है।

आजादीके बाद से ही पढ़ाई जाती रही है कविता - पुरानेशिक्षक बताते हैं कि यह कविता आजादी के बाद से ही स्कूली छात्रों को राजस्थान में पढ़ाई जाती रही है। लेकिन इसे कभी हटाया नहीं गया। भाजपा शासन में ही इस कविता को हटाने की कोशिश की गई है।

एकबार पहले भी हट चुकी है कविता - सिलेबसतैयार करने वाले शिक्षकों का कहना है कि यह कविता एक बार पहले भी हट चुकी है। लेकिन शिक्षाविदों के विरोध के बाद इसे फिर से सिलेबस में लगा लिया गया था। अब इसे फिर हटा दिया गया है और यह गलत है।

एसआईईआरटीने परवाह की, बोर्ड ने - इसकविता को लेकर तो एसआईईआरटी ने परवाह की और ही राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर के शिक्षाविदों ने। इस कविता के हटने से राष्ट्रवादी शिक्षक भी भारी रिक्तता महसूस कर रहे हैं।

सिंधिया घराने को अंग्रेजों का मित्र बताने पर है विवाद

1857 के विद्रोहियों को नायकत्व प्रदान करने वाली पहली कविता
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