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ये है इस इंटरनेशनल पैरा स्विमर की लव स्टोरी, देखते ही पति को हो गया था प्यार

ये कहानी है कंचन माला पांडे की, जिनके पति विनोद ने परिवार के विरोध के बाद भी ब्लाइंड से शादी की।

निखिल शर्मा | Last Modified - Nov 07, 2017, 03:51 AM IST

उदयपुर.महाराणा प्रताप खेलगांव में चल रही पैरा स्विमिंग प्रतियोगिता में खिलाड़ी नहीं, बल्कि हौसले तैर रहे हैं। इस कामयाबी के पीछे इनकी मेहनत और हिम्मत तो है ही मगर परदे के पीछे ऐसे लोग हैं, जिन्होंने इन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। ऐसी ही कहानी है इस कॉम्पिटीशन में हिस्सा लेने पहुंची कंचन माला पांडे की, जिनके पति विनोद ने परिवार के विरोध के बाद भी ब्लाइंड कंचन से शादी की और अाज उनकी ताकत हैं। एक प्रोग्राम में मिले विनोद को दृष्टिहीन कंचन से प्यार हुआ...
- 2011 में कंचन से एक प्रोग्राम में मिले विनोद को दृष्टिहीन कंचन से प्यार हुआ। परिवार ने विरोध किया फिर भी कंचन से शादी की। कंचन के सपनों के लिए लड़ते हैं। हर रोज सुबह-शाम कम से कम 4 घंटे कंचन को प्रैक्टिस करवाते हैं और जिस भी टूर्नामेंट में कंचन जाती है उसके साथ होते हैं।
- अगले महीने कंचन वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लिए मैक्सिको जा रही हैं, विनोद भी साथ होंगे। विनोद कंचन की कामयाबी की रीढ़ हैं।
5 गोल्ड समेत 100 से ज्यादा गोल्ड जीत चुकी हैं कंचन
- मुंबई की कंचन माला जन्म से देख नहीं सकतीं, लेकिन स्विमिंग पूल की लेन में जब तैरती हैं, तो एक इंच भी अपनी जगह नहीं बदलतीं। 27 साल की कंचन में कॉम्पीटीटर की मौजूदगी भांपने की जबर्दस्त काबलियत है।
- नेशनल और इंटरनेशनल इंवेट्स में वे 5 गोल्ड समेत 100 से ज्यादा गोल्ड जीत चुकी हैं।
- कंचनमाला मुंबई के संक रॉक से अरब सागर में 5 किमी तक स्वीमिंग करने वाली देश की एकमात्र पैैरा तैराक हैं । यह दूरी एक घंटे 14 मिनट में तय की। इसलिए उनका नाम “लिम्का बुक ऑफ इंडियन रिकॉर्ड्स’ में दर्ज हो चुका है।
- उन्हें एकलव्य अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। अब वे अपने जैसे दिव्यांग लोगों को अपने संघर्ष की कहानी सुनाकर इंस्पायर कर रहीं हैं।
कोच ने स्वीमिंग सिखाने से कर दिया था मना
- कंचनमाला के पिता ज्ञानेश्वर पांडे हॉकी के राष्ट्रीय खिलाड़ी थे। पिता की तरह वह भी खिलाड़ी बनना चाहती थी।
- जब वह 10 साल की हुई, तो उसने पिता से तैराकी सीखने की इच्छा जाहिर की। पिता उसे स्वीमिंग पूल ले गए।
- कोच ने उसके ब्लाइंड होने के कारण स्वीमिंग सिखाने से मना कर दिया। कंचनमाला निराश नहीं हुई। उसने आठ दिन में अपने दम पर ही स्वीमिंग सीख ली। वह रोज 3-4 घंटे प्रैक्टिस करती। इससे वह परफेक्ट होने लगी।
लिखकर दिया- अपनी मौत की खुद जिम्मेदार होगी
- 2001 में विदर्भ स्वीमिंग चैंपियनशिप में उसने अपने वर्ग में सामान्य तैराकों को हराकर गोल्ड जीत लिया।
- इस चैंपियनशिप में भाग लेने पहुंची तो सामान्य लोगों के बीच एक ब्लाइंड लड़की को तैरने की अनुमति नहीं दी गई।
- काफी मशक्कत के बाद जब अनुमति नहीं मिली तो उसने लिखकर दिया कि वह इस प्रतियोगिता में यदि मर भी जाती है तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार हाेगी।
- इसके बाद किसी तरह आयोजकों ने मन रखने के लिए उसमें हिस्सा लेने की अनुमति दी। कुछ मिनिटों के बाद उसने सभी सामान्य स्विमिंग प्रतियोगियों को हराकर चैंपियनशिप जीत ली। लोग हैरान थे।
आगे की स्लाइड़्स में देखें इस खबर से जुड़ीं फोटोज...
फोटो: अमित राव और फेसबुक।
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