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जन्म से 100 % ब्लाइंड है ये लड़की, जीत चुकीं है 100 से ज्यादा गोल्ड मेडल

निखिल शर्मा | Last Modified - Nov 06, 2017, 08:08 AM IST

उदयपुर में 17वीं नेशनल पैरास्विमिंग में 18 राज्यों से अाए 334 तैराकों में से तीन की कहानियां।
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    कंचन माला पांडे।
    उदयपुर.उदयपुर में रविवार को 17वीं नेशनल पैरास्विमिंग प्रतियोगिता शुरू हुई। यह तीन दिनों तक चलेगी। इसमें 18 राज्यों से 334 तैराक आए हैं। इनमें 81 महिलाएं हैं। इनमें से कोई पूरी तरह दृष्टिहीन है तो किसी के पैर नहीं हैं। सामान्य प्रतियोगियों की तरह ही ये स्विमिंग करते हैं। इनमें से कई तैराक कई गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। इन्हीं में से तीन प्रतियोगियों की कहानियां। इनमें से दो ने रविवार को भी गोल्ड जीता। जन्म से 100 % ब्लाइंड, 100 से ज्यादा गोल्ड जीत चुकीं..
    मुंबई की कंचन माला पांडे जन्म से देख नहीं सकतीं। लेकिन स्विमिंग पूल की लेन में जब तैरती हैं, तो एक इंच भी अपनी जगह नहीं बदलतीं। 27 साल की कंचन में प्रतिद्वंद्वी तैराक की मौजूदगी भांपने की जबर्दस्त क्षमता है। अगले माह मैक्सिको में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी भाग लेंगी।
    उपलब्धि: नेशनल-इंटरनेशनल में 5 गोल्ड समेत 100 से ज्यादा गोल्ड।
    फोटोज: अमित राव।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, बचपन में स्कूल में टीचर्स ने अलग बैठा दिया तो जिगर ने सीखी तैराकी...
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    जिगर ठक्कर।
    बचपन में स्कूल के साथी चिढ़ाते थे, शिक्षक ने अलग बैठा दिया तो तैराकी सीखी
    गुजरात के 19 साल के जिगर ठक्कर सेरेब्रल पाॅल्सी से पीड़ित हैं। शरीर के 80% हिस्से में मांसपेशी नहीं है। बचपन में साथी उनकी कमजोरी पर चिढ़ाते थे। शिक्षक भी अलग बैठा देते। जिगर ने एक दिन शिक्षक को चुनौती दी। तैराकी सीखनी शुरू की। सीखने के दो माह बाद ही स्कूल की तैराकी स्पर्धा में विजेता बने।
    उपलब्धि:नेशनल में 11 गोल्ड जीत चुके हैं। रविवार को भी गोल्ड जीता।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, हादसे ने छीने पांव, दूसरी नेशनल में भी गोपीचंद ने जीता गोल्ड...
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    गोपीचंद।
    हादसे ने छीने पांव, दूसरी नेशनल में भी जीता गोल्ड
    कर्नाटक के भल्लारी का गोपीचंद यल 11 साल का है। टूर्नामेंट का सबसे छोटा तैराक। तीन साल पहले बस हादसे के कारण उसके दोनों पांव काटने पड़े। पिता ने उसे हिम्मत दी। गोपीचंद ने मात्र दो माह तैयारी की और पहली ही बार में नेशनल में टीम के लिए गोल्ड जीता। अभी वह चौथी का छात्र है।
    उपलब्धि: नेशनल में दो गोल्ड, रविवार को भी गोल्ड पर कब्जा।
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    2014 में यूके में हुई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाले जुनैदी।
    खांसने तक पर टूट जाती हैं हडि्डयां, 300 फ्रैक्चर,नेशनल तैराकी में 20 मैडल जीते
    - सवा फुट का 19 साल का तैराक मोइन जुनैदी तेजी से चल नहीं सकता। खांसने पर भी शरीर में फ्रैक्चर्स हो जाते हैं। अब तक बॉडी में 300 से ज्यादा फ्रैक्चर हो चुके हैं। हैरानी की बात ये है कि तैराकी में अच्छे से अच्छे धुरंधरों को वह मात देता है।
    - यह दिव्यांग तैराक 20 से ज्यादा नेशनल और 50 से अधिक स्टेट लेवल मेडल अपने नाम कर चुका है।
    - 2014 में यूके में हुई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले कर्नाटक के बेलगाम निवासी जुनैदी पर 5 नवंबर से उदयपुर में शुरू होने वाली 17वीं नेशनल पैरालंपिक टूर्नामेंट में सबकी निगाहें टिकीं हैं।
  • जन्म से 100 % ब्लाइंड है ये लड़की, जीत चुकीं है 100 से ज्यादा गोल्ड मेडल
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    खेलगांव में 17वीं नेशनल पैरा स्वीमिंग कॉम्पीटिशन में पहुंचे 18 राज्यों से 334 तैराक।
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Web Title: National Pera Swimming Competition Contestant Story
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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