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353 करोड़ में बनी देवास-2 टनल की चट्टान धंसी, अफसरों की सांस फूली

जब अचानक धंस गई टनल तो अफसरों की सांस फूली,

BHASKAR NEWS | Last Modified - Nov 11, 2017, 05:01 AM IST

353 करोड़  में बनी देवास-2 टनल की चट्टान धंसी, अफसरों की सांस फूली
उदयपुर.353 करोड़ के देवास प्रोजेक्ट-2 (मोहनलाल सुखाड़िया जल अपवर्तन परियोजना) के तहत बनी 11 किलोमीटर लंबी टनल (सुरंग) के ऊपर की करीब 1500 वर्ग फीट क्षेत्र की चट्टान शुक्रवार सुबह अचानक धंस गई और वहां बड़ा गड्‌ढ़ा बन गया।
आकोदड़ा बांध के इनलेट से 1.9 किलोमीटर दूर उदयपुर-कलेश्वर रोड पर करनाली गांव में यह घटना हुई है। जमीन से 60 मीटर नीचे से गुजर रही इस टनल को नुकसान होने को लेकर प्रारंभिक तौर पर स्थिति साफ नहीं हो सकी है, मगर अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। इसी टनल से देवास का पानी उदयपुर की झीलों तक आता है। जलसंसाधन विभाग के एडिशनल चीफ इंजीनियर राजेश टेपण, एसई अशोक सर्राफ, एक्सईएन हेमंत पनड़िया, जेईएन दिलीप सिंह देवड़ा और नीतेश नायक के साथ मौके पर पहुंचे।
चट्टानें कमजोर हाेने से संभावित खतरे को देखते हुए टीम नजदीक से मुआयना नहीं कर पाई। स्थिति स्पष्ट करने को लेकर विशेषज्ञों की टीम शनिवार को भी मौके पर पहुंचेगी। मौका स्थिति देखने के बाद अधिकारियों ने ऑफिस में आकर टनल का अलाइनमेंट देखकर यह पता लगाया कि जिस जगह चट्टान धंसी है, वह टनल के ऊपर का ही हिस्सा है। चट्टान धंसने से मलबा टनल के अंदर तो नहीं पहुंचा, इसका पता लगाने के लिए शाम चार बजे आकोदड़ा बांध का गेट चार इंच खोला गया। एक्सईएन हेमंत पनडिया ने बताया कि टनल से शाम करीब सात बजे पानी कोडियात स्थित आउट लेट पर पहुंचा। इससे टनल को नुकसान होने जैसी कोई बात नजर नहीं आ रही। यदि पानी मटमैला आता तो टनल के नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती। तहसीलदार गिर्वा बृजेश गुप्ता, नायब तहसीलदार युवराज कौशिक, गिरदावर दिनेश कोठारी और क्षेत्रीय पटवारी नरेश कुदाल भी मौके पर पहुंचे।
सुबह पांच बजे चट्‌टान धंसनी शुरू हुई
ग्रामीणों ने बताया कि सुबह पांच बजे चट्टान धंसी। कुछ गिरने की आवाज आने पर लोग मौके पर पहुंचे। धीरे धीरे इसका फैलाव बढ़ गया। खतरे की स्थिति देखते जिला मुख्यालय पर सूचना दी गई। जहां चट्टान धंसी वहां गुरुवार को खुमाण सिंह की 2 भैसें आैर गायें बंधी थी। संयोग यह रहा कि रात को ही पशु वहां से हटा लिए।
रिकाॅल : टनल में 13 जनवरी 2011 को हुई थी पहली बड़ी घटना : 7 दिन फंसा रहा नारायण
13 जनवरी 2011 को निर्माणाधीन टनल के अंदर मलबा गिरने से हिमाचल प्रदेश क्षेत्र का श्रमिक नारायण तोमर 350 फीट नीचे फंस गया। इससे ठेकेदार कंपनी, अधिकारियों के होश उड़ गए थे। बाहर से एक्सपर्ट बुलाए गए और पाइप के जरिए उस तक खाने, पीने की सामग्री और ऑक्सीजन पहुंचाने का रास्ता बनाया गया। सात दिन की मशक्कत के बाद नारायण को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। टनल बनने के वक्त कार्यरत करनाली निवासी खुमाण सिंह ने बताया कि तब भी चट्टानें कमजाेर होने से केविटी रोकने को इंजीनियरों को मशक्कत करनी पड़ी थी।
2006 में शिलान्यास 2015 में लोकार्पण
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने पहले कार्यकाल में 15 फरवरी 2006 को शिलान्यास किया था। योजना पर 379.19 करोड़ खर्च होने का अनुमान था, जबकि 353 करोड़ में काम पूरा हो गया। उदयपुर की झीलों को हमेशा लबालब रखने इस याेजना के तहत 85.44 एमसीएफटी भराव क्षमता का मादड़ी बांध आैर 302 एमसीएफटी भराव क्षमता का आकोदड़ा बांध,11.05 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंग (मेन टनल) और 1.21 किमी लंबी लिंक टनल बनाई गई है। शिलान्यास के 8 साल 10 माह बाद 13 दिसंबर 2015 को जयपुर में मुख्यमंत्री ने इसका लोकार्पण किया था।
टीम आज टनल में जांच करेगी
प्रथम दृष्टया लग रहा है कि टनल को नुकसान नहीं हुआ है। फिर भी शनिवार को एक्सपर्ट और हमारी टीम वस्तुस्थिति देखने टनल के अंदर जाएगी। पहली बार ऐसा सामने आया है इसलिए भू वैज्ञानिक से भी राय लेंगे कि भविष्य में ऐसी आशंका तो नहीं है।
-राजेश टेपण, एडिशनल चीफ इंजीनियर, जलसंसाधन विभाग
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