Hindi News »Rajasthan News »Udaipur News» Third Gender Struggle To Be Police

पुलिस की भर्ती का था मेडिकल चेकअप, हुआ कुछ ऐसा कि टेस्ट लेने वाले चौंक गए

Bhaskar News | Last Modified - Nov 14, 2017, 11:26 PM IST

तीन साल की लड़ाई के बाद किन्नर को मिला पुलिस कांस्टेबल बनने का हक
  • पुलिस की भर्ती का था मेडिकल चेकअप, हुआ कुछ ऐसा कि टेस्ट लेने वाले चौंक गए
    +2और स्लाइड देखें
    गंगा कुमारी अपने आपको बचपन से ही लड़की मानती थीं।
    जालोर. जालोर की गंगा कुमारी ने 2013 में कॉन्स्टेबल के लिए निकली भर्ती में अप्लाई किया था। उसी साल रिटन एग्जाम हुआ और उसमें पास होने पर उसका फिजिकल टेस्ट हुआ। यह टेस्ट पास करने के बाद उसे मेडिकल के लिए बुलाया गया। मेडिकल से पहले उसने ट्रांसजेंडर का सर्टिफिकेट पेश किया तो टेस्ट लेने वाले चौंक गए। अपने आपको बचपन से ही लड़की मानती थी...
    - रानीवाड़ा इलाके में जाखड़ी गांव की रहने वाली एक ट्रांसजेंडर अपने आपको बचपन से ही लड़की मानती थी, उसी लिहाज से उसकी परवरिश और पढ़ाई-लिखाई भी हुई। उसका सपना था कि वह पुलिस कॉन्स्टेबल बने और लोगों की सेवा करे।
    - सपना साकार करना मौका भी आया, उसने कड़ी मेहनत से लिखित परीक्षा, फिजिकल और मेडिकल टेस्ट पास किए, उसका सिलेक्शन भी हो गया, लेकिन जब बात पोस्टिंग की बारी आई तो उसे टालमटोल वाला जवाब दिया जाता रहा।
    - 2 साल तक सरकार और विभाग से पाॅजीटिव जवाब नहीं मिलने पर उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने उसे अप्वाइंटमेंट के लायक मानते हुए सरकार को 6 हफ्ते में पोस्टिंग दनेे के आदेश दिए हैं। साथ ही 2015 से अप्वाइंटमेंट के सभी बेनिफिट्स नोशनल तौर पर देनेे के निर्देश दिए हैं। यह प्रदेश में पहला मामला है, जिसमें कोर्ट के आदेश से ट्रांसजेंडर को अप्वाइंटमेंट मिलेगी।
    चार साल पहले दी थी परीक्षा, ”बीसी कैटेगरी में हुआ चयन
    - वह मेडिकल टेस्ट में भी फिट निकली और विभाग की जारी अंतिम सची में Ÿ”बीसी कैटेगरी में उसका 148वें स्थान पर चयन हुआ। जब अप्वाइंटमेंट के लिए लिस्ट जारी हुई तो सभी के कॉलम के आगे मेल व फीमेल अंकित था, लेकिन उसके कॉलम के आगे कुछ नहीं लिखा था।
    जब तमिलनाडु में प्रतीका को एसआई की नौकरी मिली, तो मुझे क्यों नहीं
    गंगा कुमारी ने बताया, कि दो साल तक नियुक्ति नहीं मिलने से वह मायूस हो गई। फिर मन में ठान लिया, कि जब तमिलनाडु में ट्रांसजेंडर प्रतीका को सब इंस्पेक्टर की नौकरी मिल सकती है तो मुझे क्यों नहीं? उसे पूरा विश्वास था, उसे भी नौकरी मिलेगी, इसलिए कोर्ट पहुंची। गंगा के छह बहन और एक भाई है। सभी भाई-बहनों में वही सरकारी नौकरी के लिए पात्र हुई है।
    क्या करती, तीसरा कॉलम था ही नहीं
    गंगा कुमारी बताती है, कि वह बचपन से ही खुद को लड़की मानती और उसने फॉर्म इसी कैटेगरी में भरा, क्योंकि कोई तीसरा कॉलम था ही नहीं। सारे चरण में उत्तीर्ण होने के बाद भी नियुक्ति नहीं मिलने पर वह जालोर एसपी से मिली। उन्होंने बताया, कि इस संबंध में मार्गदर्शन के लिए फॉर्म जयपुर भेजा गया है। वह इस संबंध में गृह विभाग के सचिव व मुख्य सचिव से भी मिली, लेकिन केवल सांत्वना ही मिली। इसके बाद वह थक-हारकर कोर्ट पहुंची।
    सुप्रीम कोर्ट से ट्रांसजेंडर के हक में गाइडलाइन जारी
    गंगा कुमारी की ओर से अधिवक्ता रितुराज सिंह राठौड़ ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया, कि सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2015 में नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी बनाम सरकार के मामले में ट्रांसजेंडर के हक के संबंध में संपूर्ण गाइडलाइन जारी की है।
    इसमें यह व्याख्या की गई है, कि अनुच्छेद 14, 16 व 21 जेंडर के मामले में न्यूट्रल हैं, कही भी यह नहीं लिखा गया है कि यह अनुच्छेद महिला या पुरुष पर लागू होगा।
    यह लिखा गया है कि यह भारत के नागरिक पर लागू होगा, इसलिए ट्रांसजेंडर इसकी परिभाषा में आएंगे और उनसे भेदभाव नहीं किया जा सकता। राठौड़ ने यह भी तर्क दिया, कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति का यह हक है कि वह आवेदन करते समय अपना लिंग पुरुष, महिला या ट्रांसजेंडर चुनना चाहता है तो वह इन तीनों में से अपनी इच्छा अनुसार लिंग चुन सकता है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति को Ÿ”बीसी आरक्षण का लाभ उच्चतम न्यायालय द्वारा दिया गया है।
    सरकार की सफाई
    विधानसभा में बिल लंबित रहने के कारण नियुक्ति संभव नहीं सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि ट्रांसजेंडर के संबंध में विधानसभा में एक बिल लंबित है। इसलिए जब तक बिल लंबित रहता है, तब तक याचिकाकर्ता को नियुक्ति नहीं दी जा सकती। दोनों पक्ष सुनने के बाद न्यायाधीश दिनेश मेहता ने याचिका को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता को अगले छह सप्ताह में नियुक्ति देने के आदेश दिए। साथ ही वर्ष 2015 से नियुक्ति के सभी बेनिफिट्स नोशनल रूप से देने के निर्देश दिए हैं।
    आगे की स्लाइड्स में देखें इस खबर से जुड़ीं फोटोज..
  • पुलिस की भर्ती का था मेडिकल चेकअप, हुआ कुछ ऐसा कि टेस्ट लेने वाले चौंक गए
    +2और स्लाइड देखें
    गंगा कुमारी का पुलिस कॉन्स्टेबल बनने का सपना हुआ पूरा।
  • पुलिस की भर्ती का था मेडिकल चेकअप, हुआ कुछ ऐसा कि टेस्ट लेने वाले चौंक गए
    +2और स्लाइड देखें
    2 साल की कानूनी लड़ाई के बाद गंगा कुमारी को मिला उनका हक।
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Udaipur News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: Third Gender Struggle To Be Police
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

Stories You May be Interested in

      रिजल्ट शेयर करें:

      More From Udaipur

        Trending

        Live Hindi News

        0
        ×