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पेरिस के बच्चे गांव की गलियों में घूमे, खेत में कुदाली चलाई

भारत की संस्कृति को करीब से देखने व जानने आए फ्रांस के बच्चे धनेतकलां गांव में ग्रामीण परिवेश से रूबरू हुए।

Danik Bhaskar | Jul 19, 2018, 01:06 PM IST

चित्तौड़गढ़. भारत की संस्कृति को करीब से देखने व जानने आए फ्रांस के बच्चे धनेतकलां गांव में ग्रामीण परिवेश से रूबरू हुए। वे गलियों में घूमते हुए खेत खलिहान व घरों में पहुंचे। खेती से लेकर मेवाड़ी जायके तक का आनंद लिया। फ्रांस की राजधानी पेरिस के 82 बच्चों का दल चित्तौड़ दुर्ग भ्रमण के बाद फ्रेंच गाइड दुर्गेश जोशी के गांव धनेत में पहुंचा। गांव में दाखिल होते ही जो भी दिखा, उनको राम-राम सा कहते हुए अभिवादन किया तो गांव के लोग भी हर्षित हो उठे।

- एक घर में खाना बना रही महिलाओं से मेवाड़ी भोजन की जानकारी ली। फिर एक खेत में पहुंचे। जहां कुदाली से खुदाई चल रही थी। भारत में मौसम आधारित रबी व खरीफ फसलों के साथ खेत जोतने की विधि समझते हुए बच्चे खुद भी कुदाली लेकर खुदाई करने लगे। दुर्गाप्रसाद जोशी के घर पर बुजुर्ग महिला सुशीला देवी से उनकी जीवनशैली पूछी। उनके हाथ के बने मेवाड़ी जायके का आनंद भी लिया। इसके लिए वे हाथ में प्लेटें लेकर फर्श पर ही बैठ गए।

कुतुबमीनार से ज्यादा आकर्षक है विजयस्तंभ

- पेरिस में कक्षा नौ से 11 तक के ये बच्चे चित्तौड़ दुर्ग से काफी अभिभूत हुए। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा दुर्ग पहली बार देखा। हमने दिल्ली में कुतुब मीनार भी देखी , लेकिन यहां का विजयस्तंभ और ज्यादा आकर्षक है। महाराणा कुंभा, सांगा और प्रताप का शौर्य भरा इतिहास रोमांचित करता है। उन्होंने बताया कि चित्तौड़ का दुर्ग बेजोड़ है।

गांव के बच्चों को क्रिकेट खेलते देखा तो उनके साथ ही रम गए खेल में

- गांव की गलियों में घूमते हुए पेरिस के विद्यार्थियों की नजर एक मैदान में क्रिकेट खेल रहे बच्चों पर पड़ी तो वे उनके पास पहुंच गए। उनके साथ कुछ देर क्रिकेट खेलने में मशगूल हो गए। गांव के एक मंदिर में जाकर दर्शन भी किए। जाते समय कहने लगे कि भारत में अतिथि देवो संस्कृति के बारे में जैसा सुना, वैसा ही यहां मिला।