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आईआईएम के पांच अंक अतिरिक्त देने के बावजूद दो साल में 7 फीसदी घटी छात्राएं

छात्राओं के दो वर्ष का आंकड़ा देखें तो 7 फीसदी की गिरावट देखी गई है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 05, 2018, 04:54 PM IST

आईआईएम के पांच अंक अतिरिक्त देने के बावजूद दो साल में 7 फीसदी घटी छात्राएं

उदयपुर. आईआईएम उदयपुर के कैम्पस में डायवर्सिटी बढ़ाने को लेकर फिमेल और नॉन-इंजीनियरिंग छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए पीजीपी में 5 अंक अतिरिक्त देने की व्यवस्था के बावजूद इस वर्ष दोनों की संख्या में कमी आई है। पिछले वर्ष के मुकाबले छात्राओं की संख्या में एक प्रतिशत की गिरावट हुई, जबकि नॉन इंजीनियरिंग छात्र भी पिछले वर्ष के मुकाबले 5 प्रतिशत कम हुए हैं। छात्राओं के दो वर्ष का आंकड़ा देखें तो 7 फीसदी की गिरावट देखी गई है।

- आईआईएम ने तीन साल पहले सत्र 2016-18 में प्रवेश के दौरान अपनी पॉलिसी में बदलाव कर कैम्पस में छात्राओं और नॉन-इंजीनियरिंग छात्र बढ़ाने के लिए 5 अंक अतिरिक्त देने का प्रावधान किया था। इसके चलते पहले वर्ष छात्राओं की संख्या में 18 और नॉन-इंजीनियरिंग छात्रों की संख्या में 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ था।

इस बार 262 सीटों पर हुआ प्रवेश, इनमें से 199 छात्र

आईआईएम ने इस वर्ष पीजीपी के सत्र 2018-20 के लिए 20 सीटें बढ़ाकर 240 से 260 की थी। ऐसे में 262 सीटों पर इस वर्ष प्रवेश हुआ, जिनमें से 199 सीटों पर छात्रों को प्रवेश मिला है। वहीं 5 अंक अतिरिक्त देने के बावजूद सिर्फ 63 छात्राएं ही एडमिट हुईं। वहीं 262 में से प्रवेश लेने वाले इंजीनियरिंग छात्रों की संख्या 181 रही, जबकि सिर्फ 81 नॉन-इंजीनियरिंग छात्र ही प्रवेश ले पाए। पिछले सत्र में 240 सीटें होने के बावजूद भी 84 नॉन-इंजीनयिरिंग छात्र भर्ती हुए थे।

पीजीपी में प्रवेश के लिए औसत आयु भी बढ़ी, साइंस-मैनेजमेंट के छात्र बढ़े

आईआईएम के इस वर्ष पीजीपी में प्रवेश के लिए छात्रों की औसत आयु भी बढ़ी है। गत वर्ष 23.48 वर्ष औसत आयु से बढ़कर इस वर्ष छात्रों की औसत आयु 23.82 हो गई है। तीन साल पहले यह 25.88 थी। मगर सत्र 2016-2018 में यह घटकर 23.6 रह गई थी। इस बार यह 23.82 हो गई है। इसी तरह इस वर्ष प्रवेश लेने वाले छात्रों में मैनेजमेंट और साइंस के छात्रों की संख्या में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है।

इस साल प्रवेश में एससी-एसटी छात्रों का अनुपात गिरा, ओबीसी छात्र बढ़े


इस वर्ष आईआईएम में एससी-एसटी छात्रों के प्रतिशत में भी गिरावट आई है। दोनों ही वर्ग में छात्रों का प्रतिशत कम हुआ है। गत वर्ष 15 प्रतिशत के मुकाबले एससी छात्र 13 प्रतिशत हो गए। वहीं एसटी छात्र भी पिछले साल के 4 प्रतिशत से के मुकाबले दो फीसदी ही रह गए। ओबीसी छात्रों की संख्या में अच्छी बढ़ोतरी हुई, जो 28 से 33 प्रतिशत पहुंच गए हैं। सामान्य वर्ग के छात्रों का ट्रेंड लगभग बराबर ही है।

असफलता : ओवरसीज एडमिशन एक भी नहीं

आईआईएम उदयपुर में ओवरसीज छात्रों को प्रवेश देने की प्रक्रिया भी कामयाब नहीं हुई है। गत वर्ष भी एक भी ओवरसीज छात्र नहीं आया था। इस वर्ष 262 सीटों पर प्रवेश के बावजूद एक भी छात्र नहीं आया है।

निदेशक- छात्राओं के लिहाज से आदर्श अनुपात के आसपास हैं हम

आईआईएम-यू के प्रो. जनत शाह ने बताया कि तीन साल पहले छात्राओं और नॉन-इंजीनियरिंग छात्रों का प्रतिशत काफी कम था। इसे बढ़ाने के लिए हमने प्रयास किया और बढ़ा है। छात्राओं के लिए आदर्श अनुपात 25 से 30 प्रतिशत और नॉन-इंजीनियरिंग के लिए 25 से 33 प्रतिशत है। अभी हम इसके आसपास ही हैं।

इंजीनियरिंग-नॉन इंजीनियरिंग का अनुपात

वर्ष इंजी. प्रतिशत नॉन-इंजी. प्रतिशत
2015-17 133 94 9 6
2016-18 135 74 48 26
2017-19 148 64 84 36
2018-20 181 69 81 31


छात्र/छात्राओं का अनुपात

वर्ष छात्र प्रतिशत फिमेल प्रतिशत
2015-17 124 87 18 13
2016-18 126 69 57 31
2017-19 175 75 57 25
2018-20 199 76 63 24

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