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गवरी... लोक रंगों का ऐसा मंच, जिसमें कला और भक्ति का अनोखा संगम, सवा महीने तक घर नहीं जाते कलाकार

उदयपुर . जिला प्रशासन और माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान के साझे में मेवाड़ के पारम्परिक...

Danik Bhaskar | Sep 08, 2018, 07:36 AM IST
उदयपुर . जिला प्रशासन और माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान के साझे में मेवाड़ के पारम्परिक जनजाति लोक नृत्य नाट्य ‘‘गवरी’’ शुक्रवार को भारतीय लोक कला मंडल में किया गया। जिसमें बड़व की गवरी कलाकार दल के 150 कलाकारों ने विभिन्न कथानक पर आधारित खेलों का मंचन किया। संस्थान के निदेशक दिनेश चन्द्र जैन, निदेशक (सांख्यिकी) बीएल कटारा अौर भारतीय लोक कला मंडल के निदेशक लाईक हुसैन ने श्रीफल और पुष्पमालाओं से कलाकारों का स्वागत किया। अगली गवरी का मंचन दिनांक 17 एवं 18 सितम्बर, को फतेहसागर पाल और देवाली छोर पर किया जाएगा।

इसलिए खास है यह नाट्य

काेई निर्देशक नहीं, करते हैं मनचाहा मेकअप, दिलचस्प होती है संवादों की अदायगी

मेवाड़ के आदिवासियों का प्रमुख लोकनाट्य गवरी कई मायनों में दिलचस्प है। कलाकार दिन भर में कई प्रसंगों का मंचन करते हैं, लेकिन खास बात ये कि समूह में ऐसा कोई व्यक्ति विशेष नहीं होता, जो सबको निर्देशित करता हो। मेकअप, वस्त्र सज्जा, औजार-उपकरण, संवाद से लेकर हर चीज कलाकार बिना किसी हिदायत और बिना किसी स्क्रिप्ट के करते हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं, शहरी दर्शकों काे भी गवरी बहुत पसंद आती है। बता दें कि सवा महीने के इस लोक नाट्य अनुष्ठान के दौरान कलाकार अपने घर नहीं लौटते। इस दौरान ये उन सभी मर्यादाओं-नियमों का पालन करते हैं, जो किसी भी व्रत-उपवास में होते हैं।