राजसमंद से ग्राउंड रिपोर्ट / देवकीनंदन के लिए दीया-मोदी-राष्ट्रवाद के ट्रिपल अटैक से निपटना है कड़ी चुनौती

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 04:24 AM IST



चुनावी सभा में मोदी की बुकलेट देखती दीया कुमारी और गुलाबचंद। चुनावी सभा में मोदी की बुकलेट देखती दीया कुमारी और गुलाबचंद।
देवकीनंदन की सभाओं में स्थानीय की अपील। देवकीनंदन की सभाओं में स्थानीय की अपील।
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चुनावी सभा में मोदी की बुकलेट देखती दीया कुमारी और गुलाबचंद।चुनावी सभा में मोदी की बुकलेट देखती दीया कुमारी और गुलाबचंद।
देवकीनंदन की सभाओं में स्थानीय की अपील।देवकीनंदन की सभाओं में स्थानीय की अपील।
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  • एकतरफ भाजपा प्रत्याशी दीया कुमारी और दूसरी तरफ कांग्रेस के देवकीनंदन गुर्जर
  • मोदी के नाम और राष्ट्रवाद की गूंज यहां भी भाजपा का सबसे बड़ा हथियार

(त्रिभुवन संपादक, उदयपुर). राजसमंद...एकतरफ भाजपा प्रत्याशी दीया कुमारी और दूसरी तरफ कांग्रेस के देवकीनंदन गुर्जर। मोदी के नाम और राष्ट्रवाद की गूंज यहां भी भाजपा का सबसे बड़ा हथियार है। पीने के पानी और रोजगार जैसे स्थानीय मुद्दे कहीं दब गए हैं। लेकिन कांग्रेस भी अपने परंपरागत वोटों के कारण और उम्मीदवार के स्थानीय होने से मजबूती के साथ मैदान में खड़ी है। दीयाकुमारी के सुनियोजित चुनाव संचालन को देखते हुए नहीं लगता कि वे इस क्षेत्र में नई हैं। देवकीनंदन गुर्जर भी पूरे दमखम से चुनाव में जुटे हैं।

 

ब्यावर : जवाजा पंचायत समिति में बराखन गांव के बाबूसिंह की पत्नी डाॅली देवी सरपंच हैं। मुद्दों की बात पर वो कहते हैं : हमें पाकिस्तान को सबक सिखाना है और इसलिए मोदी को लाना है। हमने विधानसभा चुनाव में वसुंधरा सरकार के खिलाफ वोट दिया था। भीतरी बस्तियों में शंभुसिंह जैसे लोग भी हैं, जिनके लिए आज भी कांग्रेस की नेता इंदिरा गांधी हैं और वे किसी और की नहीं सोच सकते। 

 

राजसमंद : लांबोड़ी के दिलीप जैन कहते हैं, कांग्रेस के देवकीनंदन काका की पकड़ बहुत मजबूत है। हमारे बहुत काम आते हैं। आधी रात को कहो तो तैयार रहते हैं। आमेट क्षेत्र में बिल्डिंग निर्माण का काम करने वाले बशीर कहते हैं, ‘मेरे दामाद ने मेरी बेटी को तलाक दे दिया। वह घर बैठी है। उसे देखता हूं तो लगता है, कांग्रेस को तलाक वाला बिल अटकाना तो नहीं चाहिए था।’

 

नाथद्वारा : श्रीनाथजी की इस नगरी में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सीपी जोशी जीते थे। वे विधानसभा अध्यक्ष बने। शहर के सभी लोगों में उनका रसूख अच्छा था और देवकीनंदन गुर्जर उनके सिपहसालार के तौर पर ही जाने जाते हैं। शहर के लोग बताते हैं कि यहां देवकी काका को श्रीनाथ जी का आशीर्वाद रहेगा। वे श्रीनाथ जी के पुजारी परिवार से हैं।

 

कुंभलगढ़ : चारभुजा जी के कृष्णलाल गुर्जर बताते हैं, विधानसभा में हमने पायलट के कारण कांग्रेस को वोट दिया था। अब तो मोदी ही कैंडीडेट है। लेकिन सड़कों पर गिट्‌टी कूटने और खानों में काम करने वाले कनावदा के रामूराम रेबारी पत्नी और रिश्तेदारों के साथ बैठे हैं। वे कहते हैं, ‘हवा है सा। फर-फर चाल री है। पण हवा बोट नाखण रै दो दिन पैलां किदर घूम ज्यै, कांई ठा।’

 

भीम : राजस्थान रावत राजपूत महासभा के पूर्व अध्यक्ष नंदकिशोर चौहान कहते हैं, विस चुनाव में झुकाव कांग्रेस की तरफ था, लेकिन अब हवा मोदी के पक्ष में बह रही है। वहीं, भागीरथ सिंह का तर्क था कि राहुल कभी खराब नहीं बोलते। चेहरा तो जीतने के बाद भी बन जाता है। मोदी को भी पहले कहां इतने लोग जानते थे।

 

जेतारण : बुजुर्ग चंपालाल पिछले कई दशक से पंजाब से बकरे की खाल मंगवाकर बहुत ही शानदार जूतियां तैयार करते हैं। वे परंपरागत कांग्रेसी हैं। मैं पूछता हूं, आप इस बार वोट किसे देंगे? वे सिलड़ी पर खुरपे से चमड़ा साफ करते हुए बोले : मोदी। मैंने कहा, क्यों‌? बोले : जच्योड़ी है सा। मोदी जैसा प्रधानमंत्री नहीं बना। कित्तै देसां घूम्यो। कोई प्रधानमंत्री इत्तै देसां नहीं घूम्यो। मनमोहनसिंह से तो दसखत करवाए जाते थे। 

 

मेड़ता सिटी : खाद-बीज-कीटनाशक की दुकान पर आए क्षेत्र के किसान जस्साराम मूंड को लगता है कि पाकिस्तान पर हुई कार्रवाई पर प्रश्न उठाने वालों को हारना पड़ेगा। 
डेगाना : ईडवा के शिवप्रताप सिंह कहते हैं, पानी की समस्या है, लेकिन हवा मोदी की है। कांग्रेस के चित्तौड़गढ़ उम्मीदवार गोपालसिंह इस क्षेत्र में ईडवा गांव से हैं और ज्यादातर कार्यकर्ता उनके प्रचार में चले गए हैं।

 

यह सीट अहम क्यों? :
दीयाकुमारी के कारण यह सीट प्रदेश की सबसे चर्चित और वीवीआईपी सीटों में आ गई है। इस लोकसभा सीट की हवाएं नागौर, अजमेर, पाली, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीटों को प्रभावित करती हैं और वहां से प्रभािवत भी होती हैं। परिसीमन के बाद ये तीसरा चुनाव, पिछले 2 में एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस जीती।

 

भिड़ंत इसलिए राेचक :

दीया के चुनाव में मेवाड़ के भाजपा नेता गुलाबचंद कटारिया पूरी तरह सक्रिय हैं। अलबत्ता, इस इलाके की बड़ी नेता किरण माहेश्वरी चुनाव में नहीं दिखी हैं। देवकीनंदन गुर्जर की टिकट का कारण कांग्रेस नेता सीपी जोशी काे माना जाता है। वे नाथद्वारा पहुंच गए हैं और खबरें हैं कि वे हफ्ताभर यहीं डेरा डालेंगे। देवकीनंदन छोटी-छोटी सभाओं पर जोर दे रहे हैं।

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