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खुद पढ़े हार्वर्ड जैसे संस्थानों में, बच्चों को नहीं भेजा स्कूल, फिर भी कोई फिल्ममेकर तो कोई है डिजाइनर

इन परिवारों ने अपने बच्चों की रुचि को पहचाना और उसी में आगे बढ़ाया

Bhaskar News | Last Modified - Apr 15, 2018, 08:26 AM IST

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    विश्व बैंक में नौकरी की, बेटी को स्कूल नहीं भेजते

    उदयपुर.ये देश के ऐसे शिक्षित परिवार हैं, किसी ने हार्वर्ड से पढ़ाई कर यूनेस्को-यूनिसेफ और विश्व बैंक तक में सेवाएं दीं तो कोई अपने शहर का मशहूर डॉक्टर-इंजीनियर है लेकिन इनके बच्चों ने कभी क्लासरूम-ब्लैकबोर्ड नहीं देखे। कुछ परिवारों ने बच्चों की प्राथमिक स्तर तक की पढ़ाई के बाद स्कूल छुड़वा दिया। बच्चों पर इन्होंने परीक्षा व पढ़ने-लिखने को लेकर कभी दबाव नहीं बनाया और बच्चों की रुचि को पहचानते हुए उसी क्षेत्र में बढ़ने के लिए प्रेरित किया। खास बात यह है कि आज ये 10 साल से 16-17 साल के बच्चे-बच्चियां कोई डॉक्यूमेंट्री बनाने में माहिर है तो कोई आर्ट कला फेम और कोई टेबल-कुर्सी का शानदार डिजायनर। फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं बच्चे...

    ये स्कूली बच्चों से भी किसी मामले में कम नहीं हैं। फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं। गणित के सूत्र भी मुंहजुबानी याद है इन्हें। पिछले दिनों उदयपुर के नयाखेड़ा स्थित तपोवन आश्रम में हुए ‘विमुक्त शिक्षा’ पर सम्मेलन में दिल्ली, मुम्बई, पुणे, चेन्नई, अहमदाबाद, राजस्थान के ऐसे 21 परिवार शामिल हुए जिन्होंने शिक्षा की वर्तमान प्रणाली को बच्चों के लिए बोझ बताया। उन्होंने अभिभावकों को बताया- बच्चों को सक्सेस के पीछे मत भगाओ। उन्हें काबिल बनाओ। कामयाबी मिलेगी। उन्होंने कहा आज की शिक्षा प्रणाली से बच्चे आत्महत्या तक कर रहे हैं। कहा कि वे शिक्षा विरोधी नहीं हैं, पर बच्चों के सामने भविष्य के लिए कई रास्ते खुले हैं।

    बच्ची खेती, फर्नीचर डिजायनिंग में माहिर

    उदयपुर के मनीष जैन ने 1994 में हार्वर्ड विवि से एमएड की डिग्री ली। पेरिस में यूनेस्को और अफ्रीका में यूनिसेफ में नौकरी की। यहां कई शिक्षा मंत्रियों को एजुकेशन सिस्टम पर ट्रेनिंग दिया। फिर विश्व बैंक में भी सेवाएं दी। काम में मन नहीं लगता तो इस्तीफा देकर वापस देश लौट आए। आमेट निवासी मनीष ने अपनी बेटी को कभी स्कूल नहीं भेजा। वे विमुक्त शिक्षा पर परिवारों और उनके बच्चों को प्रशिक्षित करते हैं। बच्चों को खेती करना, लकड़ी से कुर्सी-टेबल बनाना, चिकनी मिट्टी के पोट्रेट और वेस्ट चीजों से उपयोगी सामान बनाना सिखाते हैं। इनकी बेटी आज एक फर्नीचर डिजायनर होने के साथ मल्टी टैलेंटेड भी है।

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    अहमदाबाद के दोनों भाई स्कूल समय को स्किल्स बढ़ाने में लगाते हैं, मल्टी टेलेंटेड हैं

    बिजनेसमैन पिता ने बच्चों को फिल्म मेकिंग में बढ़ाया

    अहमदाबाद निवासी सुमि चंद्रेश के दोनों बेटे कुदरत(18)और अजन्म्य(15) कभी स्कूल नहीं गए। कुदरत का कहना है कि स्कूल के समय को वे दूसरी स्किल्स डेवलप करने में लगाते हैं। कुदरत आज हैरिटेज और सामाजिक मुद्दों पर डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाते हैं। तो अजन्म्य फोटोग्राफी में मास्टर है। विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर ये कमाई भी करते हैं। ऑनलाइन और अखबार पढ़कर अंग्रेजी सीख ली। पिता बिजनैसमैन हैं। दुकानदारी करते-करते से हिसाब-किताब भी करना आ गया।

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    परीक्षा में अच्छे परिणाम का भी खास फायदा नहीं, डिजिटल मार्केटिंग की कर रही तैयारी

    नताशा ने इसी साल दोनों बेटियों की छुड़वा दी पढ़ाई

    दिल्ली निवासी नताशा की बेटी सहर ने 9वीं और अलीजा ने 8वीं के बाद स्कूल छोड़ दिया। बेटी सहर कहती है स्कूल के लिए सुबह जल्दी उठना, फिर दिनभर स्कूल में रहना। मन नहीं होने पर भी मजबूरन स्कूल जाना। सभी दोस्त पूरे दिन कहते रहते हैं कि उन्हें परीक्षा की तैयारी करनी है। परीक्षा का इतना दबाव बना दिया गया कि बता नहीं सकती। अच्छा परिणाम होने का भी कोई फायदा नहीं मिलता। महसूस हुआ कि मेरे लिए कई विकल्प भी हैं। वह ऑनलाइन बाजार को लेकर बेवसाइट चलाने की तैयारी कर रही है। जल्द लॉन्च करेगी। कहती है- डिग्री तो कभी भी ले लूंगी। परिजन दिल्ली में व्यवसायी हैं।

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    मेडिसिन में पीजी भावना, पेंटिंग की शौकीन बेटियों को इसी में आगे बढ़ा रही

    उदयपुर की भावना त्रिवेदी ने 11 साल की बेटी कश्वी को तीसरी के बाद और सात साल की बेटी यवी को स्कूल नहीं भेजा। मेडिसिन में पीजी भावना बताती हैं कि जो चीजें बच्चों को पसंद नहीं, वे उन्हें तनाव देती हैं। स्किल्स के साथ जीने से बच्चा मल्टी टेलेंटेड बनता है। बच्चों के लिए स्कूल पूरी दुनिया नहीं, पूरी दुनिया को स्कूल बनाएं। हम बच्चे की कभी सुनते ही नहीं, खुद निर्णय करते हैं कि उसे क्या करना है। बेटी कश्वी को ईयरिंग बनाने और पेंटिंग करने का बहुत शौक है। वह दोनों को इसका प्रशिक्षण दिलाती हैं। दोनों स्टॉल्स लगाकर पैसे भी कमाती हैं।

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Web Title: Identify The Interest Of Children And Carry On In The Same
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