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शिलान्यास और लोकार्पण जनप्रतिनिधि से नहीं करवाए तो अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

उदयपुर सहित पूरे प्रदेश में अब सरकारी भवनों के शिलान्यास या लोकार्पण किसी विभाग ने जनप्रतिनिधि से नहीं करवाया तो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 06:25 AM IST

उदयपुर सहित पूरे प्रदेश में अब सरकारी भवनों के शिलान्यास या लोकार्पण किसी विभाग ने जनप्रतिनिधि से नहीं करवाया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासन की कार्रवाई होगी। ऐसे मामले में संबंधित अधिकारी को विधानसभा के विशेषाधिकार हनन का दोषी भी माना जा सकता है। राज्य सरकार ने यह कदम विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न प्रकार के विकास के कामों का क्रेडिट सत्तारूढ़ दल को दिलाने के लिए उठाया है। इससे जनप्रतिनिधियों को यह साबित करने का मौका मिलेगा कि सरकार ने विकास के काम किए हैं।सरकारी सूत्रों के अनुसार राजस्थान सरकार के चीफ सेक्रेट्री एनसी गोयल ने प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के माध्यम से सभी विभागों को लिखित में आदेश जारी किया है। इस आदेश में साफ कहा गया है कि सार्वजनिक राशि के उपयोग से बनने वाले सरकारी भवनों के शिलान्यास या लोकार्पण समारोह में जनप्रतिनिधि जैसे सांसद, विधायक, जिला प्रमुख,प्रधान, मेयर, सभापति, सरपंच या अन्य जनप्रतिनिधियों को आवश्यक रूप से आमंत्रित किया जाए। किसी राजकीय उपक्रम बोर्ड निगम या स्वायत्तशासी संस्थान के ऐसे कार्यक्रम हो उसमें भी जनप्रतिनिधियों को आवश्यक रूप से आमंत्रित किया जाए। विभागों को ये निर्देश भी दिए हैं कि राजकीय भवनों के शिलान्यास उद्घाटन आदि कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों से ही संपन्न कराया जाए।

सत्तारूढ़ दल ने शुरू की क्रेडिट बटाेरने की कोशिशें, सरकार ने जारी किए आदेश

तो माना जाएगा विशेषाधिकार हनन का दोषी

आदेश में राजस्थान सिविल सेवाएं आचरण नियम (1971) के प्रावधानों का जिक्र करते हुए यह भी चेताया गया है कि निर्देशों की अवहेलना करने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने का प्रावधान है। साथ ही 6 मार्च 2018 को दी गई अध्यक्षीय व्यवस्था के अनुसार निर्देशों की अवहेलना करने पर संबंधित अधिकारी को विधानसभा के विशेषाधिकार हनन का दोषी भी माना जा सकता है। पिछले दिनों ही कलेक्टर बिष्णु चरण मल्लिक की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में जिले के विधायकों ने भी ये बात प्रमुखता से उठाई कि उनके क्षेत्र में शिलान्यास हो या लोकार्पण जनप्रतिनिधियों को जरूर बुलाया जाए।

सरकार के कार्यकाल के आखिरी महीनों में मचती है शिलान्यासों और उद्घाटनों की अफरातफरी

किसी भी सरकार के कार्यकाल के आखिरी महीनों में अफरातफरी मचती है और शिलान्यास तथा उद्घाटन ही होते हैं। पिछली गहलोत सरकार में भी ऐसा ही हुआ था और अब भी ऐसा ही होने जा रहा है।

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