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उदियापोल से कोर्ट चौराहा तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक

जोधपुर हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शहर में उदियापोल से कोर्ट चौराहा तक प्रस्तावित 129 करोड़ के 1.6...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 03, 2018, 06:50 AM IST

उदियापोल से कोर्ट चौराहा तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक
जोधपुर हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शहर में उदियापोल से कोर्ट चौराहा तक प्रस्तावित 129 करोड़ के 1.6 किमी के एलिवेटेड रोड के निर्माण पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी। शहर के ओम खत्री व अन्य ने याचिका दायर कर प्रोजेक्ट को चुनौती दी थी। पक्ष रखा गया कि एलिवेटेड रोड की डिजाइन इंडियन रोड कांग्रेस की गाइड लाइन अनुसार नहीं है। इसको बनाने से कोई फायदा नहीं होगा। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार व नेशनल हाइवे ऑथोरिटी को नाेटिस जारी किया है। इस रोड के लिए टेंंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मगर अब अगले आदेश तक वर्क ऑर्डर जारी नहीं हो सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी की पिछले साल 29 अगस्त को खेल गांव में हुई सभा में इसकी अधिकृत घोषणा की गई थी। हालांकि गहलोत सरकार के समय से इस प्रोजेक्ट की कवायद शुरू हो चुकी थी। शहर विधायक एवं गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने इस प्रोजेक्ट को अपनी प्राथमिकता में शामिल कर रखा है। दूसरी तरफ क्षेत्र के कई व्यापारी इस तर्क के साथ प्रोजेक्ट को अव्यवहारिक बता रहे हैं। शहर की खूबसूरती बिगड़ने के साथ उदियापोल से कोर्ट चाैराहा तक का व्यापार और चौपट हो जाएगा। इसी उलझन में प्रभावित लोगों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।

129 करोड़ का 1.6 किमी का है एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट : जनहित याचिका पर दिया स्टे ,अगली सुनवाई 30 जुलाई काे, नेशनल हाइवे, केंद्र सरकार व राज्य सरकार को जारी किया नोटिस

भास्कर ने एक्सपर्ट के जरिए उठाए थे प्रोजेक्ट के औचित्य पर सवाल

दैनिक भास्कर ने भी इस प्रोजेक्ट को लेकर एक्सपर्ट की रिपोर्ट के आधार पर इस पर सवाल उठाए थे। यह भी बताया था कई एजेंसियां इसे गैर जरूरी मान चुकी हैं।

आपत्तियों पर सुनवाई का काम अभी प्रक्रिया में

इस प्रोजेक्ट को लेकर पिछले दिनों ही एडीएम प्रशासन के समक्ष 38 प्रभावितों ने आपत्तियां दर्ज करवाई थीं। इन पर सुनवाई का काम अभी प्रक्रियाधीन है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार इस प्रोजेक्ट के लिए 61 हजार 891.52 वर्ग फीट (0.5752 हैक्टेयर) जमीन अवाप्त होनी है। इसमें 21 हजार 993.44 वर्गफीट आबादी की निजी जमीन और 39 हजार 898.08 वर्ग फीट जमीन एमबी अस्पताल की है।

दूसरी बार दायर हुई है जनहित याचिका, 2014 में हो गई थी खारिज

एलिवेटेड रोड को लेकर इससे पहले 2010 में भाजपा पार्षद पारस सिंघवी सहित 16 लोगों ने जोधपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। तब यूआईटी ने कोर्ट में यह पक्ष रखा था कि यह प्रोजेक्ट जनहित में तैयार किया जा रहा है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अप्रैल 2014 को इस याचिका को खारिज कर दिया था।

2014 में एलएनटी कंपनी ने सर्वे कर प्रोजेक्ट को बताया था अनुपयोगी

यूआईटी की कंसल्टेंट कंपनी लार्सन एंड टर्बो (एलएनटी) ने एलिवेटेड रोड के लिए विस्तृत सर्वे कर मार्च 2014 में यूआईटी को सौंपी प्री फिजिबिलिटी रिपोर्ट (पीपीआर) सौंपी थी। उसमें कंपनी ने ट्रेफिक सर्वे के आधार पर यह तर्क भी दिया था कि प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के रूट पर ट्रैफिक तो रहता है, मगर उसमें से सीधा जाने वाले व्हीकल एक तिहाई ही होते हैं। बाकी ट्रैफिक रास्तों के चौराहों से डाइवर्ट हो जाता है। कंपनी का यह तर्क भी था कि वर्ष 2036 में एलिवेटेड रोड की क्षमता के मुकाबले 50 प्रतिशत उपयोग ही होगा। यानी एलिवेटेड रोड पर खर्च लगभग दोगुना और फायदा भी पूरा नहीं मिलेगा। मोटे खर्च की बजाय प्रस्तावित एलिवेटेड रोड पर यातायात दबाव कम करने रूट के वैकल्पिक मार्ग और चौराहों को विकसित करना ज्यादा किफायती और उपयोगी रहेगा। उस रिपोर्ट में चार जगह 90 डिग्री मोड के कारण आने वाली तकनीकी समस्याओं का भी कंपनी ने जिक्र किया था। एलएनटी कंपनी ने एलिवेटेड रोड की बजाय उस समय इस क्षेत्र के रोड नेटवर्क को प्रभावी बनाने के कई विकल्प भी सुझाए थे। उन पर अब तक काफी काम भी हो चुका है।

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