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बारिश में बुवाई न करे तो पछताता है किसान, चातुर्मास भी श्रावक के लिए वैसा ही अवसर

उदयपुर | श्रमण संघीय आचार्य डॉ. आचार्य शिवमुनि ने कहा कि वर्षाकाल किसानों के लिए स्वर्णिम होता है। इसमें बुवाई...

Danik Bhaskar

Jul 12, 2018, 07:10 AM IST
उदयपुर | श्रमण संघीय आचार्य डॉ. आचार्य शिवमुनि ने कहा कि वर्षाकाल किसानों के लिए स्वर्णिम होता है। इसमें बुवाई नहीं करने वाला किसान पछताता है। वैसे ही चातुर्मास भी श्रावकों के लिए बड़ा अवसर है, जिसमें धर्म साधना से चूके तो पछताना ही पड़ेगा। आचार्य सेक्टर-11 के महावीर भवन में बुधवार को धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चातुर्मास में भगवान की वाणी की वर्षा होगी। श्रावकों ने इसका लाभ नहीं उठाया तो पश्चाताप के अलावा कुछ नहीं बचेगा। भगवान महावीर का धर्म भेद विज्ञान का धर्म है। भगवान महावीर ने जो ज्ञान दिया है, उससे शरीर और आत्म दोनों शुद्ध होते हैं। इससे पहले युवाचार्य आदि ठाणा ने शोभायात्रा के साथ सेक्टर 11 से विहार कर सेक्टर 14 में प्रवेश किया।

आचार्य डॉ. शिव मुनि की अगवानी करते समाजजन।

क्षण भर का है भौतिक सुख : श्रुत तिलक

प्रन्यास प्रवर श्रुत तिलक विजय ने कहा कि जीवन बेशकीमती है। इसकी कीमत आंक पाना मुश्किल है। बावजूद इसके कई बार लोग अपने जीवन को बिना किसी उद्देश्य के व्यर्थ में गवां देते हैं। किसी पल का कोई भरोसा नहीं फिर भी लोग भविष्य के बारे में हरपल सोचकर परेशान रहते हैं। जैन शास्त्र कहता है कि भौतिक सुखों में क्षण भर का सुख है लेकिन वास्तविक सुख अपने भीतर धर्म के संस्कारों का बीजारोपण करने में है। श्रीसंघ के अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र हिरण ने बताया कि मुनि बुधवार को मोती मगरी स्थित भगवान महावीर स्वामी के मंदिर पहुंचे, जहां पर सामूहिक चैत्य वंदन कर दर्शन किए। मार्ग में जगह-जगह श्रावक और श्राविकाओं ने मुनिश्री की अगवानी की।

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