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टीएसपी में जुड़े उदयपुर के 342 गांव, पहले 1612 थे, अब 1954 हुए

उदयपुर जिले में टीएसपी क्षेत्र के गांवों की संख्या में इजाफा हो गया है। पहले 1612 गांव इसके अंतर्गत आते थे, वहीं अब 1954...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 12, 2018, 07:10 AM IST

उदयपुर जिले में टीएसपी क्षेत्र के गांवों की संख्या में इजाफा हो गया है। पहले 1612 गांव इसके अंतर्गत आते थे, वहीं अब 1954 गांव इसमें शामिल हो गए हैं। भारत सरकार ने जनसंख्या के आधार पर प्रदेश का टीएसपी क्षेत्राधिकार बढ़ाते हुए अधिसूचना जारी की है। जिसमें बताया गया है कि पहले उदयपुर के 9 तहसील के 1612 गांव टीएसपी में शामिल थे लेकिन अब 12 तहसील के 1954 गांव हो गए हैं। उदयपुर में टीएसपी का दायरा बढ़ने से विकास योजनाओं का लाभ बढ़ेगा। जानकारी के अनुसार किसी क्षेत्र में टीएसपी की आबादी कुल आबादी की आधी हो जाए तो पेसा एक्ट के तहत जनप्रतिनिधियों में फेरबदल संभव है। पहले गोगुंदा और गिर्वा आंशिक टीएसपी क्षेत्र में था लेकिन अब दोनों को ही पूर्ण टीएसपी कर दिया गया है। गोगुंदा के 52 से बढ़ाकर 238 गांव और गिर्वा के 122 से 218 गांव टीएसपी क्षेत्र में शामिल हुए हैं। वल्लभनगर, मावली और बड़गांव तहसील का पहले एक भी गांव टीएसपी में नहीं था लेकिन अब वल्लभनगर के 22, मावली के 4 और बड़गांव के 35 गांव इसमें शामिल हुए हैं। डूंगरपुर 976 और बांसवाड़ा 1513 गांवों के साथ संपूर्ण टीएसपी जिला पहले से ही है। अब प्रतापगढ़ 1003 गांवों के साथ संपूर्ण टीएसपी जिले की श्रेणी में आ गया है।

50 फीसदी से अधिक टीएसपी आबादी तो जिला प्रमुख एसटी वर्ग का होगा : 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी 30 लाख 68 हजार 420 थी जिसमें 15 लाख 25 हजार 289 लोग अनुसूचित जनजाति यानी टीएसपी से थे। जिले की कुल आबादी में टीएसपी का हिस्सा 49.71 प्रतिशत है। ऐसे में पैसा एक्ट के अनुसार 50 प्रतिशत या इससे ज्यादा एसटी वर्ग की जनसंख्या होने पर जिला प्रमुख सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के पद में फेरबदल हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो जिला प्रमुख के पद पर एसटी वर्ग का जनप्रतिनिधि ही होगा।

वल्लभनगर, मावली और बड़गांव के कई गांव पहली बार शामिल, जनप्रतिनिधि के पदों में बदलाव संभव

क्या कहता है पेसा एक्ट

स्थानीय समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक संसाधनों और विवाद सुलझाने के परंपरागत तरीकों का संरक्षण करने का हक।

सामाजिक व आर्थिक विकास की योजनाओं, कार्यक्रमों व परियोजनाओं का पंचायत द्वारा क्रियान्वयन से पूर्व अनुमोदन का हक।

विकास परियोजनाओं के लिए अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण करने से पहले इससे पूर्व प्रभावितों के पुनर्वास के लिए ग्राम सभा से परामर्श लें।

लघु जल संसाधनों के स्वामित्व, प्रबंधन, गौण वन उपज के स्वामित्व का हक।

गौण खनिजों के लिए खनन मजदूरी अथवा गौण खनिजों की नीलामी दर में रियायत के लिए पूर्व अनुमोदन का हक।

शराबबंदी लागू करने और मादक द्रव्यों की बिक्री व उपयोग को नियमित करने का अधिकार।

साहुकारी प्रथा पर नियंत्रण का अधिकार।

स्थानीय एवं जनजाति उपयोजना क्षेत्र की योजनाओं से प्राप्त राशि के तहत अपने विकास नियोजन का हक।

टीएसपी क्षेत्र में कई नए गांव जुड़े हैं लेकिन इन क्षेत्रों में जनप्रतिनिधि के पदों के लिए साफ नहीं कहा जा सकता है। उच्च स्तरीय आदेश के बाद ही पता चल पाएगा। -सीआर देवासी, प्रशासन, एडीएम

टीएसपी से जुड़ी कुछ अहम बातें...

प्रदेश के कुल बजट का 13.48 प्रतिशत बजट टीएसपी क्षेत्र के लिए होता है। यह जनसंख्या के आधार पर निकाला जाता है। पंचायत एक्सटेंशन टू द शिड्यूल एरियाज एक्ट 1996 को पेसा एक्ट कहा जाता है जो राज्य में 2 नवम्बर 2011 से गजट अधिसूचना के बाद लागू हुआ। आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, राजस्थान, तेलंगाना के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र इसमें आते हैं।

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