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अब साइकोलॉजी में चयन पर विवाद, अभ्यर्थी का आरोप- टॉप करने के बावजूद उसका चयन नहीं

सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में भर्तियों को लेकर एक और नया विवाद शुरू हो गया है। हाल ही में साइकोलॉजी विषय में हुई...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 14, 2018, 07:20 AM IST

सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में भर्तियों को लेकर एक और नया विवाद शुरू हो गया है। हाल ही में साइकोलॉजी विषय में हुई भर्तियों को लेकर अनियमितता के आरोप लगे हैं। साइकोलॉजी के लिए शॉर्टलिस्ट होकर इंटरव्यू में बैठे एक अभ्यर्थी ने विवि पर अपने चहेतों के चयन का आरोप लगाया है। साइकोलॉजी के लिए इंटरव्यू में बैठे अभ्यर्थी डॉ. राजेंद्र कुमार मीणा ने राज्यपाल को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि स्क्रीनिंग टेस्ट में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने के बावजूद उसका चयन नहीं किया गया, जबकि जिस अभ्यर्थी का चयन किया गया उसके अंक राजेंद्र से काफी कम थे। अभ्यर्थी ने राज्यपाल को शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की है।

यह है पूरा मामला : अभ्यर्थी राजेंद्र मीणा ने शिकायत दी है कि उसने स्क्रीनिंग टेस्ट में ऑल कैटेगरी में टॉप किया था। राजेंद्र ने बताया कि उसके स्क्रीनिंग टेस्ट में 84.21 प्रतिशत अंक थे जो सभी अभ्यर्थियों में सबसे ज्यादा थे। राजेंद्र ने एसटी कैटेगरी में आवेदन किया था जबकि एसटी कैटेगरी में हेमा कुमारी मेहर को चुना गया जिसके स्क्रीनिंग टेस्ट में लगभग 45 प्रतिशत अंक थे। राजेंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि साइकोलॉजी के लिए इंटरव्यू में भी ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो जिसका चयन करना हो उसे पहले से ग्रुप डिस्कशन का टॉपिक बता रखा हो। राजेंद्र ने यह भी अारोप लगाया कि इंटरव्यू के पैनल में अगर एससी/एसटी अभ्यर्थी हो तो उसका एक सदस्य होना आवश्यक है। मगर पैनल में एक भी एससी/एसटी सदस्य को नहीं रखा गया।

चयनित हेमा बोली- कम्यूनिकेशन स्किल अच्छी थी, वह खुद कई लोगों की अप्रोच लेकर आया था

एसटी वर्ग में चयनित होने वाली हेमा मेहर ने अभ्यर्थी राजेंद्र के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। हेमा ने कहा कि राजेंद्र खुद कई लोगों की अप्रोच के साथ आया था। भर्ती के दौरान यही कहा जा रहा था कि उसी का होगा क्योंकि वो सुखाड़िया का छात्र है। स्क्रीनिंग टेस्ट सिर्फ क्वालिफाई करने के लिए होता है। अगर मेरे अंक कम भी थे तो ग्रुप डिस्कशन और कम्यूनिकेशनल स्किल्स सबसे अच्छी थी। वर्तमान समय में हिंदी-अंग्रेजी दोनों भाषाओं की जानकारी जरूरी है मगर राजेंद्र सिर्फ शुद्ध हिंदी में बात कर रहा था।

इधर, फिजिकल एजुकेशन में भी भर्ती पर आरोप, चयनितों के लिए बदल दिए नियम ही

उदयपुर | सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के फिजिकल एजुकेशन में असिस्टेंट डायरेक्टर के पद पर चयन को लेकर भी विवाद है। चयनित नहीं हुए अभ्यर्थियों का कहना है कि जिन दो अभ्यर्थियों को चुना गया उनके लिए नियम बदल दिए गए। नियमानुसार दोनों ही अभ्यर्थी गुड एकेडमिक रिकॉर्ड की योग्यता पूरी नहीं करते हैं फिर भी दोनों का चयन किया गया है। बता दें कि हाल ही में यूनिवर्सिटी ने असिस्टेंट डायरेक्टर के लिए भीमराज पटेल और हेमराज चौधरी का चयन किया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि यूजीसी और सुखाड़िया के पुराने नियमानुसार 55 प्रतिशत गुड एकेडमिक रिकॉर्ड होना आवश्यक था मगर दोनों अभ्यर्थियों के चयन के लिए सुखाड़िया ने सैकंड डिविजन में बदल दिया। मामले को लेकर असिस्टेंट डायरेक्टर के लिए आवेदन करने वाले डॉ. कुलदीप सिंह झाला और सुरेंद्र कुमार दोनों ने सितम्बर 2017 से कोर्ट में याचिका भी दायर कर रखी है। जिसमें दोनों ने भर्तियों में एकेडमिक रिकॉर्ड संबंधित नियमों में बदलाव की बात की गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि चयनित दोनों सदस्य थर्ड डिविजन और ग्रेस से पास हैं, जबकि अन्य योग्य अभ्यर्थी थे इसके बावजूद उनका चयन नहीं किया गया है।

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