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ये हैं रक्तवीर जिन्होंने 50 बार से अधिक रक्तदान किया ताकि खून की कमी से न हो कोई मौत

रक्त बनाया नहीं जा सकता। देश में लाखों लोग खून की कमी से जूझ रहे हैं और कितने लोगों की इसकी कमी से मौत हो जाती है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 14, 2018, 07:20 AM IST

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    रक्त बनाया नहीं जा सकता। देश में लाखों लोग खून की कमी से जूझ रहे हैं और कितने लोगों की इसकी कमी से मौत हो जाती है। शरीर में ही इसे या तो बढ़ा सकते हैं या जरूरत पड़ने पर दान कर किसी की जिंदगी बचा सकते हैं। 14 जून यानी आज रक्तदान दिवस है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस दिन को रक्तदान दिवस मनाने का आह्वान किया है ताकि हम रक्तदाताओं को प्रोत्साहित कर सकें और खून की कमी से जूझ रहे लोगों की जान बचा सकें। दैनिक भास्कर आपको शहर के उन रक्तदाताओं से मिला रहा है जिन्होंने खून के रिश्ते नहीं होते हुए भी अजनबियों से खून के असली रिश्ते बनाए हैं। कई लोग उम्र के आखिरी पड़ाव में भी रक्तदान कर युवाओं की जिंदगी बचा रहे हैं।

    रवीन्द्रपाल सिंह कप्पू : 18 साल से अब तक 81 बार कर चुके रक्तदान, लोग कहते हैं ब्लड वाले अंकल

    लेकसिटी में ऐसे कई रक्तवीर जो हर तीसरे माह में करते हैं रक्तदान, कैंप लगाकर लोगों को जागरूक भी करते हैं, ऐसे रक्तदाताओं को भास्कर का सलाम, आप भी जुड़ें अभियान से

    81 बार रक्तदान कर चुके शहर के रवीन्द्र पाल सिंह कप्पू शहर के बच्चे ब्लड वाले अंकल या चलता फिरता ब्लड बैंक कहते हैं। रक्तदाताओं के प्रेरणास्रोत कप्पू बताते हैं कि वे 18 साल के थे तब उनकी मौसी को खून की कमी होने पर एमबी में भर्ती कराया गया था। परिजन काफी परेशान थे। वार्ड में काफी लोग खून नहीं मिलने से परेशान हो रहे थे। यह देख उन्होंने नियमित रक्तदान करना और लोगों को जागरूक करना शुरू किया। कप्पू ने अपनी प|ी को भी प्रेरित किया जो अब तक 14 बार रक्तदान कर चुकी हैं। उनके बेटे आयुष 22 साल की उम्र में 13 बार, शिवांश 20 बार रक्तदान कर चुके हैं। कप्पू विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से 150 से ज्यादा कैंप लगाकर 5000 यूनिट से ज्यादा रक्तदान करवा चुके हैं। रक्तदान जागरूकता को लेकर 10000 से ज्यादा पुस्तकें और 25000 स्टीकर बांट चुके हैं। शहर की 30 संस्थाएं मिलकर 25 जुलाई को कप्पू के जन्मदिन पर उदयपुर रक्तदान दिवस के रूप मे मनाती हैं। कप्पू को अब तक 130 से ज्यादा सम्मान मिल चुका है।

    दिनेश चौरड़िया : 63 बार किया, आज 64वीं बार करेंगे रक्तदान

    दिनेश अब तक 63 बार रक्तदान कर चुके हैं। इसके अलावा वे कैंप लगाकर 2000 यूनिट से ज्यादा खून दान करवा चुके हैं। हेल्पिंग इंडिया संस्थान के माध्यम से पूरे देश में जरूरतमंदों को रक्त पहुंचाते हैं। गुरुवार को विश्व रक्तदाता दिवस पर वे 64वीं बार करेंगे। हर साल 24 दिसंबर को मादड़ी में कैम्प लगाते हैं।

    शहर के ये लोग भी 50 बार से ज्यादा रक्तदान कर चुके

    दीपक खंडेलवाल 2005 से हर तीन महीने में अपने पिता के साथ रक्तदान करते। अब तक 53 यूनिट कर चुके हैं। पवन ठाकुर 52 बार, फतहनगर के राजेश चपलोत 52 बार रक्तदान कर चुके हैं। राजेश ने बताया कि दादी के लिए मुश्किल से रक्त मिला था। तब से नियमित रक्तदान करते हैं।

    खून की कमी से प|ी का निधन, बनाया ब्लड बैंक, निशुल्क भेजते रथ

    सरल ब्लड बैंक की स्थापना 2008 में हुई तब से अब तक 100000 यूनिट रक्त और प्लेटेज जरूरतमंद लोगों तक पहुंचा चुके हैं। सरल ब्लड बैंक के मानद सचिव श्याम एस सिंघवी ने बताया कि उनकी प|ी सरला सिंघवी गंभीर बीमार थी जिसे रक्त की आवश्यकता थी। 2005 में उनका देहांत हो गया। उनकी स्मृति में 2008 में ब्लड बैंक स्थापित किया। रक्तदान शिविर कराने के लिए रक्तदान रथ यहां निशुल्क मिलता है। 5 यूनिट से ज्यादा रक्तदान होने पर स्टाफ भेजा जाता है। सिंघवी खुद 30 बार और उनके बेटे संयम सिंघवी 20 बार रक्तदान कर चुके हैं।

    निगेटिव ग्रुप वालों के लिए वरदान- रक्तदाता युवा वाहिनी ग्रुप

    शहर के ही कपिल दया, दिलीप साहू, कमलेश आचार्य, दिनेश सोनी ने तीन साल पहले रक्तदाता युवा वाहिनी ग्रुप बनाया है। यह ग्रुप विशेष रूप से निगेटिव रक्तदाताओं का डेटा इकट्ठा कर रक्तदान करवाता है। दिलीप साहू ने बताया कि बाकी सारे ब्लड ग्रुप तो आसानी से मिल जाते हैं लेकिन निगेटिव ब्लड ग्रुप बड़ी मुश्किल से मिल पाता है। इसलिए उन्होंने निगेटिव ब्लड ग्रुप के रक्तदाताओं का समूह बनाकर पिछले तीन सालों में 600 से ज्यादा यूनिट शहर के विभिन्न हॉस्पिटल में लाइव करा चुके हैं।

    आप भी कर सकते हैं रक्तदान, कमजोरी या नुकसान नहीं है...

    आयु 18 से 60 वर्ष के बीच हो। वजन 45 किग्रा से अधिक हो। एक माह में टेटू या शरीर का अंग छेदन नहीं कराया हो। रक्तदान करने वाला पिछले तीन माह में कहीं रक्तदान नहीं किया हो। हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम से ज्यादा हो, वरना समस्या हो सकती है। दो घंटे पहले कुछ खाया जरूर हो। एड्स, क्षय, रति, पीलिया, मलेरिया, मधुमेह आदि बीमारी से ग्रस्त न हो।

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