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मेवाड़ के शौर्य, सौंदर्य और वीरता की कहानी को सहेज रहे झीलों की नगरी के संग्रहालय

उदयपुर झीलों की नगरी के साथ रियासत कालीन समय से ही संग्रहालयों की नगरी भी है। यहां महाराणाओं ने ऐतिहासिक धरोहरों...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 07:35 AM IST

  • मेवाड़ के शौर्य, सौंदर्य और वीरता की कहानी को सहेज रहे झीलों की नगरी के संग्रहालय
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    उदयपुर झीलों की नगरी के साथ रियासत कालीन समय से ही संग्रहालयों की नगरी भी है। यहां महाराणाओं ने ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के लिए कई संग्रहालयों का निर्माण करवाया। आज उदयपुर में प्रमुख संग्रहालयों के अलाव गैलेरी के रूप में 100 से अधिक संग्रहालय हैं जिनमें विभिन्न शैलियों की पेंटिग, एंटीक ज्वेलरी, दुर्लभ फाेटो, पुराने बर्तन, हथियार, स्कल्चपर, पांडुलिपियां मौजूद हैं। आज विश्व संग्रहालय दिवस है और भास्कर आपको रूबरू करा रहा है शहर के उन संग्रहालयों से जो हमेशा से पर्यटकों के लिए आकर्षण के साथ ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।

    राजकीय संग्रहालय उदयपुर : राजस्थान का सबसे पुराना

    राजकीय संग्रहालय राजस्थान का सबसे प्राचीन संग्रहालय है। महाराणा शंभूसिंह के समय 1873 में स्थापित किया गया। महाराणा सज्जन सिंह के काल में प्राचीन सामग्रियां संग्रहित की गईं। महाराणा फतहसिंह ने 1887 में महारानी विक्टोरिया की स्वर्ण जयंती पर सज्जन निवास बाग में नया भवन बनाया जिसका नाम विक्टोरिया हॉल संग्रहालय रखा। 1 नवंबर 1890 को इस संग्रहालय को दर्शकों के लिए खोला गया। 1968 में सज्जन निवास बाग से राजमहल परिसर में हिसाब दफ्तर कर्ण विलास में स्थानांतरित कर दिया। वर्तमान में राजकीय संग्रहालय उदयपुर के नाम से जाना जाता है। इसमें पांच दीर्घाएं प्रमुख हैं जिनमें मेवाड़ क्षेत्र के प्राचीन शिलालेख, प्रतिमाएं लघुचित्र, प्राचीन सिक्के, अस्त्र शस्त्र और टेक्स टाइल संग्रहित हैं।

    महाराणाओं ने झीलों के साथ हमें दिए कई संग्रहालय भी जो विश्व को बताते हंै मेवाड़ की गाथा, पर्यटकों के आकर्षण हैं ये संग्रहालय

    100 साल पुरानी विंटेज-क्लासिक कार, एेतिहासिक पेंटिंग्स, हथियार, स्कल्पचर और बहुत कुछ यहां

    सिटी पैलेस संग्रहालय : इंग्लैंड के प्रसिद्ध क्रिस्टल निर्माताओं का संग्रह मंगाया

    सिटी पैलेस म्यूजियम की स्थापना 1969 में महाराणा भागवत सिंह ने मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए की थी। म्यूजियम का संचालन महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउंडेशन की ओर से किया जाता है। सिटी पैलेस कैम्पस में क्रिस्टल गैलरी फतेह प्रकाश पैलेस का एक हिस्सा है जिसे 1994 में आम जनता के लिए खोला गया। 129 साल पुरानी गैलरी में आस्लर क्रिस्टल के अद्भुत संग्रह को प्रदर्शनी पर रखा गया है। महाराणा सज्जन सिंह ने विशेष रूप से इंग्लैंड के प्रसिद्ध क्रिस्टल निर्माताओं एफ और सी आस्लर कंपनी से 1877 ई. में इन्हें मंगाया था। गैलरी में पर्यटक सुंदर क्रिस्टल के कपड़े, फव्वारे, क्रॉकरी, सोफा सेट, बेड और कुर्सियों की तरह के सिंहासन देख सकते हैं।

    लोककला मंडल म्यूजियम : लोककलाओं का संग्रह है

    यहां लोककलाओं और लोकनृत्य के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। दिन मे दो बार स्पेशल कठपुतली शो भी होता है जिसमें रामायण, मुगल दरबार, संगठन मेंं बल, काबुलीवाला, स्वामी विवेकानंद, सांप-सपेरा, बहुरूपिया, तलवारों की लड़ाई, गेंदवाली, कच्छी-घोडी आदि की प्रस्तुति होती है।

    आहड़ संग्रहालय : 3.3 करोड़ से हो रहा है जीर्णोद्धार

    धूलकोट चौराह स्थित आहड़ संग्रहालय में चार हजार वर्ष पूर्व की सभ्यता के पुरावशेष हैं। यहां रखे लाल-काले मृदा भांड, चमकीले लाल रंग के पात्र, कृषाण कालीन टूटी दार लोटे, मण मूर्तियां, धूपदान, जानवरों के सींग, दीपक आकर्षित करते हैं। 3.3 करोड़ की लागत से जीर्णोद्घार का कार्य चल रहा है।

    गुलाब बाग के नजदीक बने इस म्यूजियम की स्थापन 15 फरवरी 2000 को हुई थी। इसमें मेवाड़ राजघराने की कारें मौजूद हैं जो आज भी रनिंग कंडीशन में हैं। रोल्स रॉयस, 1939 कैडिलेक ओपन कन्वर्टिबल, मर्सिडीज के कई रेयर मॉडल, 1936 की वॉक्स हॉल और 1937 की कारों के ओपन मॉडल इस कलेक्शन को दूसरों से अलग करते हैं। इस म्यूजियम में कई बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हुई है।

    हल्दीघाटी म्यूजियम : एेतिहासिक झरोखों को डिजिटल माध्यमों में भी देख सकते हैं

    खमनोर स्थित चेतक स्मारक के पास हल्दीघाटी म्यूजियम का निर्माण अध्यापक मोहनलाल श्रीमाली ने करवाया, जिसका उद्घाटन 19 जनवरी 2003 को राज्य के राज्यपाल अंशुमान सिंह ने किया। मेवाड़ का राज्य चिन्ह, पन्नाधाय का बलिदान, गुफा में महाराणा प्रताप की अपने मंत्रियों से गुप्त मंत्रणा, शेर से युद्ध करते हुए प्रताप, भारतीय संसद में स्थापित महाराणा प्रताप की झांकी की प्रतिमूर्ति, मानसिंह से युद्ध करते महाराणा प्रताप, महाराणा प्रताप एवं घायल चेतक घोड़े का मिलन, महाराणा प्रताप का वनवासी जीवन के साथ-साथ उनसे जुड़े अन्य प्रसंगों को यहां आकर्षक मॉडल के साथ झांकियों को प्रदर्शित किया गया है। इसके साथ ही लाइट एवं साउण्ड आधारित झांकियां और प्रताप के जीवन से संबंधित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया जाता है। संग्रहालय को देखने के लिए कई प्रदेश के राज्यपाल, सांसद, केन्द्र एवं राज्य सरकार के मंत्रीगण और बडी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक आते हैं।

    बागोर की हवेली संग्रहालय : पीछोला झील के किनारे बागोर की हवेली में राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल बलिराम भगत ने 1 दिसम्बर 1997 को संग्रहालय का उद्घाटन किया। शस्त्रागार, रॉयल वेडिंग, कठपुतली, पगड़ी, महारानियों के एंटीक जेवर, वस्त्र का संग्रहालय है।

    शिल्पग्राम म्यूजियम : 70 एकड़ में फैला ग्रामीण कला और शिल्प परिसर एक जीवित संग्रहालय है। शिल्पग्राम के अंदर गोल संग्रहालय, माटी के रंग, टीआरई का संग्रहालय है। माटी के रंग में टेराकोटा से निर्मित कलाकृति प्रदर्शित की गई है। टीआरई म्यूजियम में पुराने तांबे और मिटटी के बर्तन, जनजातियों से जुड़ीं पुरानी वस्तुएं संग्रहित हैं।

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Web Title: मेवाड़ के शौर्य, सौंदर्य और वीरता की कहानी को सहेज रहे झीलों की नगरी के संग्रहालय
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