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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : लाइन ऑफिसर ने भी कोर्ट को बताया, सीबीआई ने डरा-धमकाकर दिलवाए थे झूठे बयान

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में मुंबई सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में गुरुवार को तत्कालीन लाइन ऑफिसर हजारी लाल...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 07:35 AM IST

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में मुंबई सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में गुरुवार को तत्कालीन लाइन ऑफिसर हजारी लाल मीणा के बयान हुए। उन्होंने बताया कि सीबीआई एसआई विश्वास मीणा उन्हें डरा-धमकाकर मुंबई कोर्ट ले गए थे और गिरफ्तार करने की धमकी देकर सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट में गलत बयान दिलवाए थे। कोर्ट में तत्कालीन हेडकांस्टेबल गोविंद सिंह और तत्कालीन आरआई सीओ गिर्वा ओम कुमार के बयान भी हुए। हजारी लाल ने कोर्ट को बताया कि वे 2006 में उदयपुर में पुलिस लाइन ऑॅफिसर (एलओ) थे। उन्होंने कभी कोई गार्ड ड्यूटी नहीं लगाई और तत्कालीन एसपी दिनेश एमएन ने उन्हें गार्ड ड्यूटी लगाने के लिए कभी कोई फोन नहीं किया था। गार्ड ड्यूटी पुलिस लाइन में हवलदार मेजर लगाते हैं। कैदियों के साथ गार्ड भेजने के लिए गार्ड फाॅर्म जेल से आते हैं और मेजर हवलदार गार्ड फॉर्म के अनुसार ही ड्यूटी लगाते हैं। नफरी कम होने पर नजदीकी थाने से जाब्ता बुलाया जाता है। रोजमर्रा के कार्यों में शामिल हाेने से इसके लिए अलग से उच्च अधिकारियों से कोई अनुमति नहीं ली जाती है। कोर्ट में 25 दिसंबर 2006 को गोसवारा (जाब्ता उपलब्धता से संबंधित दस्तावेज) पेश हुआ। हजारीलाल ने इस पर अपने साइन पहचाने और बताया कि इस दिन जाब्ते की कमी थी। क्रॉस में पूछने पर हजारीलाल ने बताया कि सीबीआई ने बयान के लिए बुलाया था। सीबीआई के विश्वास मीणा गिरफ्तार करने की धमकी देकर जबरन कोर्ट लेकर गए थे और वहां गलत बयान दिलवाए थे कि उन्हें गार्ड ड्यूटी के लिए दिनेश एमएन ने कहा था, जबकि ऐसा कभी नहीं हुआ। इस पर सीबीआई ने हजारी लाल को होस्टाइल घोषित किया।

रोजनामचा देखकर कहा इस पर मेरी लिखावट और हस्ताक्षर नहीं हैं: पुलिसकर्मी गोपाल सिंह ने कोर्ट को बताया कि वह 2004-08 तक प्रतापनगर थाने में हेडकांस्टेबल रहा। थाने में करीब 30 कांस्टेबल थे। उसने न तो कभी वायरलैस ड्यूटी की और न ही रोजनामचा लिखा। कोर्ट में सीबीआई की ओर से रोजनामचा वाला दस्तावेज गोपाल सिंह को दिखाया गया तो उन्होंने कहा यह राइटिंग मेरी नहीं है और न ही मेरे साइन हैं। मैंने यह रोजनामचा नहीं लिखा था। सीबीआई ने एक बार बुलाया था। नाम-पता पूछा था, लेकिन दस्तावेज नहीं दिखाए और न ही कोई बयान लिए थे। सीबीआई ने इन्हें भी होस्टाइल घोषित किया।

डीएसपी ने सीबीआई की कहानी को सपोर्ट नहीं किया, फिर भी नहीं हुए होस्टाइल: डीएसपी ओम कुमार ने कोर्ट को बताया कि 2006 में पुलिस लाइन में आरआई थे। वे 13 नवंबर से 25 दिसंबर 2006 तक अवकाश पर थे। 26 को ड्यूटी जॉइन की थी और 27 दिसंबर 2006 को उनका एसपी ऑफिस तबादला हो गया था। सीबीआई ने उन्हें बुलाया था। वे छुट्टियों के सभी दस्तावेज साथ लेकर गए थे और सीबीआई को दिखाए थे। इस पर सीबीआई ने कहा था कि आप अवकाश पर थे तो बयानों की जरूरत नहीं है। एेसे में मेरे कभी बयान नहीं हुए। क्रॉस में पूछने पर ओमकुमार ने बताया कि कभी काेई लॉ एंड ऑर्डर की समस्या होती है तो सबसे पहले कानून व्यवस्था के लिए जाब्ता निकाला जाता है, इसके बाद गार्ड ड्यूटी के लिए जाब्ता निकलता है।

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