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खतरा : जयसमंद पाल के नीचे 7 फीट नींव खोद भाग गया ठेकेदार

जयसमंद झील की पाल के जीर्णोद्धार के लिए सरकार ने तीन करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। जिसका निर्माण कार्य भी शुरू कर...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 07:35 AM IST

खतरा : जयसमंद पाल के नीचे 7 फीट नींव खोद भाग गया ठेकेदार
जयसमंद झील की पाल के जीर्णोद्धार के लिए सरकार ने तीन करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। जिसका निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया, लेकिन करीब दो माह से जल संसाधन विभाग की अनदेखी के चलते ठेकेदार कार्य को अधूरा छोड़कर चला गया। ठेकेदार ने दीवार निर्माण के लिए पुरानी दीवार के नीचे करीब सात फीट गहरी नींव खोद डाली और कार्य को बंद कर दिया, जिससे नींव में से पानी निकलने से जयसमंद कस्बे सहित आस-पास क्षेत्र के ग्रामीण भयभीत हैं। 42 मीटर ऊंचाई पर 16000 हजार हेक्टेयर कमांड एरिया की देश की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील में करीब 14650 एमसीएफटी भराव क्षमता है। सरकार व विभाग द्वारा सुरक्षा के इंतजाम की बात तो दूर इतने बड़े बांध के नीचे नींव खोदकर अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं। नवयुवक मंडल अध्यक्ष ललित चौबीसा ने बताया कि नींव से निकलते पानी से पुरानी पाल की दीवार जर्जर होकर उसका प्लास्टर भी गिरता नजर आ रहा है। डेढ़ माह बाद बारिश का मौसम शुरू होगा, ऐसे में हादसे की आशंका और बढ़ जाती है।

36 घंटे के बाद शुरू हुई जयसमंद जल परियोजना

जयसमंद| बकाया वेतन व वेतन में बढ़ोतरी को लेकर जयसमंद जल परियोजना के यूनियन कर्मचारियों का समझौता गुरुवार देर शाम करीब साढ़े सात बजे हुआ। विभिन्न मांगों की सहमति पर रात करीब आठ बजे जयसमंद जल परियोजना के पंप हाउस शुरू किए गए। जानकारी के अनुसार चार महीने के बकाया वेतन को लेकर यूनियन के 35 श्रमिकों ने बुधवार सुबह करीब आठ बजे पंप हाउस बंद कर हड़ताल पर बैठ गए। जिसको लेकर गुरुवार शाम सलूंबर जलदाय विभाग के एक्सईएन प्रमोद कुमार वर्मा, सराड़ा एईएन रितेश मीणा, यूनियन के अध्यक्ष कालूराम मीणा व ठेकेदार लोकेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे।

झील के बीच बसे हैं कई गांव, उदयपुर के कई गांवों में होती है पेयजल सप्लाई

इस झील का निर्माण 1685 में महाराणा जयसिंह ने गोमती नदी पर बांध बनाकर करवाया था। मुख्य बांध का निर्माण कार्य वर्ष 1711 से 1730 तक किया गया। झील में नौ नदियां, निन्यानवे नालों का पानी समावेश होता है। झील के पानी से पूरे क्षेत्र में 16650 हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है। पाल की लंबाई 399 मीटर है। जयसमंद झील से उदयपुर शहर सहित कई ग्रामीण इलाकों में पेयजल की सप्लाई होती है। झील के बीच में भी कई गांव बसे हुए हैं।

ठेकेदार कार्य को छोड़कर चला गया है। कार्य को जल्द ही शुरू करवा देंगे। नींव में पानी के निकलने व रिसाव की स्थिति का पता नहीं है। मौके पर जाकर स्थिति देखता हूं। ऋषभ जैन, एक्सईएन जल संसाधन विभाग सलूंबर

ऐसा मामला है, तो गलत है। अभी पता करवाता हूं। सीआर देवासी, अतिरिक्त कलेक्टर उदयपुर

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