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भू कारोबारियों ने 27 हैक्टेयर पहाड़ी क्षेत्र भी अवाप्ति में शामिल करा लिया

नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी की अध्यक्षता में बुधवार काे जयपुर में हुई बैठक में उदयपुर की दक्षिण विस्तार...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 17, 2018, 07:40 AM IST

नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी की अध्यक्षता में बुधवार काे जयपुर में हुई बैठक में उदयपुर की दक्षिण विस्तार योजना में साजिश के तहत पहाड़ी भाग को अवाप्ति में शामिल करवाने का मामला प्रमुखता से उठा।

यूआईटी चेयरमैन रवींद्र श्रीमाली और सचिव राम निवास मेहता ने बताया कि दक्षिण विस्तार योजना में कुछ भू व्यवसायियों ने कारोबारी फायदे के लिए 27 हैक्टेयर पहाड़ी भाग को भी अवाप्ति में शामिल करवा लिया। जोगी तालाब की 6 हैक्टेयर जमीन भी अवाप्ति में शामिल हो गई। ये लोग अवाप्ति शुदा पहाड़ी जमीन के बदले 25 प्रतिशत विकसित जमीन मांग रहे हैं, जो कि संभव नहीं है। इसे अवाप्ति से मुक्त किया जाए। इससे यूआईटी की इस योजना में कीमती विकसित जमीन बचेगी। कृपलानी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में श्रीमाली ने मुख्यमंत्री आवास योजना की प्रगति की जानकारी भी दी।

यूआईटी क्षेत्र की वाटिकाओं के लिए भी बनेंगे नियम

बैठक में कोटा यूआईटी चेयरमैन ने यूआईटी क्षेत्र में संचालित वाटिका-विवाह स्थल के लिए नियम-उप नियम बनाने का सुझाव दिया। इस पर कृपलानी ने कहा कि अधिकारियों से चर्चा करेंगे। इस निर्णय से उदयपुर को भी बड़ा फायदा होगा। अभी शहरी क्षेत्र की वाटिकाओं के लिए निगम ने नियम-उप नियम बना रखे हैं, मगर यूआईटी क्षेत्र के लिए कोई नियम नहीं हैं। इससे वाटिकाओं पर यूआईटी का नियंत्रण नहीं है। समारोह के बाद वाटिका संचालक वेस्टेज को जहां-तहां डाल देते हैं, जिससे आसपास के लोग परेशान होते हैं। लोग शिकायत करते हैं, लेकिन निगम अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताकर कार्रवाई नहीं करता।

व्यावसायिक फायदे के लिए भू कारोबारियों ने ऐसे रची साजिश

दक्षिण विस्तार योजना बनते समय कई भू व्यवसायियों ने यूआईटी अधिकारियों से मिलीभगत कर बड़ा खेल खेला। मकसद यह था कि उनकी बेकार जमीन यूआईटी के खाते में चली जाए और उसके बदले जब योजना विकसित हो, तब उसमें अवाप्त शुदा जमीन के बदले कुल जमीन का 20 प्रतिशत आवासीय आैर 5 प्रतिशत व्यवसायिक भूखंड मिल जाए।

यूआईटी चेयरमैने बोले- जमीन यूआईटी के काम की नहीं

यूआईटी चेयरमैन ने नगरीय विकास मंत्री को बताया कि अवाप्ति में शामिल पहाड़ियां ऊंची हैं। ऐसी जमीन यूआईटी के किसी काम की नहीं है। पहाड़ी भाग को यूआईटी काट नहीं सकती। लाखों रुपए खर्च कर भी दें तो भी इस पर आवासीय या व्यवसायिक प्लानिंग नहीं की जा सकती।

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