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मल्हार : सावनी ने बुना सुरों का ताना-बाना, कविता ने दल के साथ बखूबी दर्शाया कथक का शास्त्रीय पक्ष

शास्त्रीय संगीत और नृत्य समारोह ‘मल्हार’ के दूसरे दिन पुणे की गायिका सावनी शेंडे साठ्ये ने गायन से सुरों की वर्षा...

Danik Bhaskar | Sep 10, 2018, 06:50 AM IST
शास्त्रीय संगीत और नृत्य समारोह ‘मल्हार’ के दूसरे दिन पुणे की गायिका सावनी शेंडे साठ्ये ने गायन से सुरों की वर्षा की। दिल्ली की डाॅ. कविता ठाकुर के नेतृत्व में प्रस्तुत कथक के तत्वों के साथ मल्हार का वैविध्य निखर उठा। शिल्पग्राम के दर्पण सभागार में इस दो दिन के सांस्कृतिक समारोह का समापन रविवार को हुआ। शहर के कला रसिकों ने शाम संगीत और नृत्य विधा का आनंद उठाया। दिल्ली की जानी मानी कथक नृत्यांगना डाॅ. कविता ठाकुर और उनके दल ने कथक के शास्त्रीय पक्ष को दर्शाते हुए कुछ रचनाएं सुंदर अंदाज में प्रस्तुत की। शुरुआत सांई भजन से हुई इसके बाद मल्हार पर आधारित दो बंदिशों में मानो मल्हार फुहार बन कर बसर पड़ा हो। इस प्रस्तुति में पहले सुर मल्हार और बाद में मेघ मल्हार में मेघों के साथ वर्षा ऋतु का वर्णन कलात्मक बन सका। नृत्य में लयकारी तथा पदों का संचालन उत्कृष्ट बन सका वहीं भाव प्रस्तुति भी प्रभावी रही। कविता के साथ साक्षी तंवर, मयूख भरतरिया, गीता भट्ट ने प्रस्तुति दी। तबले पर सूरज निरवड़, गायन पर सुहावे हुसैन, सितार पर यार मोहम्मद और पखावज पर सलमान खान ने संगत की।

Cultural Program

शिल्पग्राम में दो दिवसीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य समारोह सम्पन्न

सुनो सुनो दयाले म्हारी अरजी... से किया मीरा को नमन

इससे पहले पुणे की मधुर कंठी गायिका सावनी शेंडे साठ्ये ने अपने कंठ के माधुर्य से दर्पण सभागार में सुरों का मिठास सा बिखेर दिया। सावनी ने अपने गायन की शुरूआत राग मियां मल्हार पर आधारित तीन बंदशों में अपने सुरों का जादू बिखेरा। उन्होंने पहले ‘सावन की रूत आई सजनिया’ सुनाया इसके बाद विलंबित एक ताल में निबद्ध ख्याल ‘सहेली सांझ भई सावन की’ में अपने गायन से दाद बटोरी। मध्य लय और तीन ताल में निबद्ध रचना ‘घनन घनन घन गरजत आये...’ बंदिश में सावनी ने सुरों के उतार चढ़ाव व लयकारी के साथ गायन का अनूठा सामंजस्य स्थापित किया। इसके बाद किराना घराने की सावनी ने द्रुत ताल में तराना पेश किया। संगीत नाटक अकादमी के उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से नामित सावनी ने मीरा के भजन ‘सुनो सुनो दयाले म्हारी अरजी...’ सुना कर मीरा काे भी नमन किया। हारमोनियम पर राहुल गोले, तबले पर अरुण गवई, तानपूरे पर डिम्पी सुरालका व निधि शर्मा ने संगत की। केन्द्र निदेशक फुरकान खान, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक इन्द्रजीत ग्रोवर, उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र पटियाला निदेशक सौभाग्य वर्धन मौजूद थे।