पुलवामा हमले के एक साल / शहीद नारायणलाल गुर्जर के गांव में नमन यात्रा निकाली गई, रक्तदान शिविर भी लगाया

गांव में निकाली गई नमन यात्रा। गांव में निकाली गई नमन यात्रा।
सरपंच, उप सरपंच समेत कई नेता पहुंचे। सरपंच, उप सरपंच समेत कई नेता पहुंचे।
रक्तादान शिविर का आयोजन। रक्तादान शिविर का आयोजन।
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गांव में निकाली गई नमन यात्रा।गांव में निकाली गई नमन यात्रा।
सरपंच, उप सरपंच समेत कई नेता पहुंचे।सरपंच, उप सरपंच समेत कई नेता पहुंचे।
रक्तादान शिविर का आयोजन।रक्तादान शिविर का आयोजन।

  • बुजुर्ग, जवान, महिलाओं सहित बच्चों ने भी शुक्रवार को अपने गांव के बेटे शहीद नारायणलाल को श्रद्धांजलि दी।
  • 14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमले में राजसमंद के बिनोल गांव के निवासी थे नारायण गुर्जर शहीद हो गए थे

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2020, 06:24 PM IST

राजसमंद. पुलवामा हमले के एक साल पूरे होने पर शहीद नारायणलाल गुर्जर का गांव बिनोल रोशनी से सजाया गया है। जगह-जगह स्वागत द्वार लगे हैं। पुलवामा हमले में शहीद हुए गांव के लाडले नारायणलाल को पहली बरसी पर नमन किया गया। गांव के बुजुर्ग, जवान, महिलाओं सहित बच्चों ने भी शुक्रवार को अपने गांव के बेटे शहीद नारायणलाल को श्रद्धांजलि दी। 

जिसके बाद दोपहर को रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इससे पहले सुबह शहीद की नमन यात्रा निकाली गई। पूरे गांव में उत्सव-सी तैयारियां की गई है। शाम को एक शाम शहीदों कर नाम भजन संध्या का आयोजन किया गया है। वहीं मुम्बई से दो बसों में प्रवासी भी कार्यक्रमों में शरीक होने के लिए पहुंचे। रक्तदान शिविर का आयोजन नवनिर्वाचित सरपंच रामलाल गुर्जर सहित कई समाजसेवी द्वारा किया गया। इस इस रक्तदान शिविर में आरके चिकित्सालय की टीम पहुंची।

एक साल पहले 14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमले में राजसमंद के बिनोल गांव के निवासी थे नारायण गुर्जर शहीद हो गए थे। वे दो दिन पहले 12 फरवरी को ही ड्यूटी पर लौटे थे। पुलवामा आतंकी हमले में उनकी शहादत की खबर से पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया था।

बेटा सीकर, बेटी उदयपुर में पढ़ रही 
शहीद नारायण के बेटे तथा बेटी को पढ़ाने के लिए तब कई स्वयं सेवी संस्थाओं, अधिकारियों, जज, सरकार, अम्बानी परिवार तक ने प्रस्ताव रखे थे। नारायण का 12 वर्षीय बेटा मुकेश सीकर के प्राइवेट स्कूल में आठवीं पढ़ रहा है। अम्बानी परिवार ने पुलवामा हमले में सभी शहीदों के बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा लिया था। मुकेश की पढ़ाई का खर्च अम्बानी परिवार ही उठा रहा है। अम्बानी परिवार की तरफ से उसकी एक साल की फीस जमा हो चुकी है। उनकी 15 वर्षीय बेटी हेमलता भी पढ़ने सीकर गई थी, परिवार से दूर नहीं रह पाई और लौटकर आ गई। अब उसकी सेकंडरी तक की पढ़ाई उदयपुर के गुरुनानक स्कूल ने अपने जिम्मे ली है। हेमलता उदयपुर में पढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रतापगढ़ जिला जज ने शहीद नारायणलाल के बेटा-बेटी को गोद ले रखा है।

न्यूज व फोटो : नरपत सिंह चौहान

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