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एमबी : दूसरी मंजिल के बाथरूम की खिड़की से गिरा मरीज आत्महत्या, हत्या या चक्कर आने से गिरा...मौत पर संशय

एमबी अस्पताल प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की लापरवाही से शनिवार को एमबी अस्पताल में भर्ती...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 09:35 AM IST
Udaipur - mb dropped by the bathroom window of the second floor dropped by suicide murder or dizziness suspect on death
एमबी अस्पताल प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की लापरवाही से शनिवार को एमबी अस्पताल में भर्ती डायबिटीज मरीज बड़ावली, सेमारी निवासी 62 वर्षीय रतन सिंह पुत्र रूपसिंह दूसरी मंजिल में बाथरूम की खिड़की से नीचे गिर गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। मौत पर अभी संशय है कि वह चक्कर आने से गिरा या आत्महत्या की या फिर उसे किसी ने धक्का दियाω मरीज जिस खिड़की से गिरा उसमें ग्रिल नहीं लगी थी, खिड़की की जाली भी उखड़ी थी। बड़ी बात यह है कि यह आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. डीपी सिंह की यूनिट है जहां खिड़की पर लंबे समय से लोहे की ग्रिल नहीं होने के बाद भी प्रशासन को खबर नहीं थी। मरीज के बेटे ने पुलिस को बताया है कि चक्कर आने से उनके पिता खिड़की से नीचे गिर गए। अगर खिड़की में ग्रिल होती तो वे बच जाते। इधर, मरीज काफी देर तक बेड पर नहीं लौटा फिर भी ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों ने न तो उसकी खोजबीन की और न ही प्रशासन को इसकी सूचना दी। सुबह 7 बजे के करीब मरीज का शव खिड़की के नीचे से मिला। हादसे में प्रशासन की लापरवाही के सवाल पर एमबी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. लाखन पोसवाल ने कहा कि यह गंभीर घटना है। जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रिंसिपल डॉ. सिंह ने कहा है कि मामले को लेकर परिसर में लगे कैमरे खंगाले जाएंगे। खिड़की से मरीज के गिरने की संभावना बहुत कम है, वह ठीक ठाक ही था।

बेटे ने दिया परिवाद- बाथरूम गए थे, चक्कर आने से गिर गए होंगे पिता

रतन सिंह के पुत्र भगवत सिंह ने हाथीपोल थाने की एमबी स्थित पुलिस चौकी में लिखित परिवाद दिया है। इसमें बताया है कि उसके 62 वर्षीय पिता रतन सिंह को शुक्रवार को एमबी में मेडिसिन वार्ड नंबर-5A के बेड नंबर-20 पर भर्ती कराया था। शनिवार को सुबह बाथरूम के लिए निकले थे। फिर चक्कर आ जाने की वजह से खिड़की से नीचे गिर गए और मौके पर ही मौत हो गई। भगवत ने बताया कि वह रात भर नीचे कार में बैठा था। सुबह वार्ड में गया तो बेड पर उसके पिता नहीं मिले। काफी खोजबीन करने पर खिड़की के नीचे उसके पिता गिरे दिखे जिसे देखकर होश उड़ गए। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन मृतक का पोस्टमार्टम कराकर शव ले गए।

उदयपुर. बाथरूम की वह खिड़की जहां से मरीज गिरा और खिड़की से नीचे जहां गिरने से हुई मौत।

31 इंच

27 इंच

हादसे की तीन लापरवाहियां




एक मौत के बाद जागा प्रशासन, आखिर खिड़की में लगवाई ग्रिल

30 फीट

प्रशासन के तीनों जिम्मेदारों से सवाल

एमबी अस्पताल अधीक्षक डॉ. लाखन पोसवाल

पीडब्ल्यूडी एईएन आरके मूदड़ा से ग्रिल-जाली की रिपोर्ट मांगी है। नर्सिंग अधीक्षक-प्रथम लक्ष्मीलाल वीरवाल से भी रिपोर्ट मांगी है कि मरीज बाथरूम से नहीं लौटा तो नर्सिंग स्टाफ ने सूचना क्यों नहीं दीω? वार्ड ब्वॉय कहां थाω? जांच के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।

कुछ अनसुलझे सवाल ?




हादसे के बाद भास्कर ने प्रशासन से खिड़की में ग्रिल नहीं होने को लेकर सवाल किए तो देखते ही देखते लंबे समय से खुली खिड़की में ग्रिल लगवा दी गई।

पीडब्ल्यूडी विभाग के एईएन आरके मूंदड़ा

बाथरूम में खिड़की की जाली (वायरगेज) को किसी ने फाड़कर ग्रिल को भी तोड़ दिया था। अब पूरे अस्पताल की खिड़कियों पर ग्रिल लगाने का काम किया जाएगा।

नर्सिंग अधीक्षक लक्ष्मीलाल वीरवाल

मरीज का बेटा नींद पूरी करने कहीं चला गया था। वह सुबह आया तो बेड पर उसके पिता नहीं मिले। मरीज कितने समय तक बेड पर नहीं था, इसकी जांच की जा रही है। स्टाफ की गलती मिली तो कार्रवाई की जाएगी।

स्टाफ : गंभीर बीमार नहीं था वो

ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ दीपक गोठवाल, जितेन्द्र डामोर और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मृतक मरीज हादसे से पहले यानी शुक्रवार की रात चल-फिर रहा था। नर्सिंग स्टाफ दीपक ने बताया कि अगर मरीज गंभीर हालत में होता तो उसे जरूर उसे बाथरूम तक लेकर जाते, लेकिन वह खुद चहलकदमी कर रहा था।

उफ़, ये मौतें और थोड़ा सा मानवीय होने की जरूरत

  त्रिभुवन

एमबी हॉस्पीटल में शनिवार को सेमारी के 62 वर्षीय रतनसिंह की सेकंड फ्लोर की विंडो से गिरने के कारण मौत हो गई। अभी यह सही-सही पता नहीं कि यह आत्महत्या है, दुर्घटना है या हत्या। लेकिन प्रश्न ये है कि संभागीय मुख्यालय के इतने बड़े अस्पताल के बाथरूम वाले हिस्से में विंडो क्याें नहीं थीω? आखिर एक आदमी की जिंदगी छीन लेने के बाद ही इसे ठीक करने का होश आया! प्रश्न है, वह रोगी अचानक अपने बिस्तर से उठकर जब आयाω, उस समय नर्सिंग कर्मचारी या वार्ड बॉय क्या कर रहे थे? अब तक के रुख को देखते हुए यह मान लेना हैरानी नहीं कि एक और मौत हो गई। और अब इस पर भी लीपापोती हो जाएगी। पिछले दिनों 30 अक्टूबर को जनाना अस्पताल में सेमारी की ही एक महिला ने शिशु को जन्म दिया तो वह प्रसव के दौरान ही हाथों से फिसला और नीचे गार्बेज बकेट में औंधे मुंह जा गिरा। शिशु की मौत हो गई। एक आदिवासी घर का आंगन सूना हो गया। व्यवस्था वैसे की वैसे चलती रही। एमबी में 10 जुलाई को तीन घंटे अस्पताल की बिजली बंद रही और इस दौरान सर्जिकल आईसीयू में वेंटीलेटर का बैकअप खत्म हो गया। एक रोगी की मृत्यु हो गई। गत 26 अगस्त को एक सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म होने से कॉर्डियोलॉजी में एक महिला की मौत हो गई। इन सभी घटनाओं में भले कोई डॉक्टर, नर्स या कर्मचारी सीधे तौर पर जिम्मेदार न हो, लेकिन कुछ सबक तो लिये ही जा सकते हैं। आखिर हमारे इतने सुशिक्षित चिकित्सा अधिकारी यथास्थितिवाद के इतने बंदी क्यों हैंω? वे अगर थोड़ी संवेदनशीलता और मामूली सी जागरूकता से काम लें तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। अगर इन मामलों में थोड़ी सी पूछ पड़ताल संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, आईजी और एसपी भी कर लें तो शायद व्यवस्था मेज पर सिर टिकाए किसी अकर्मण्य परिस्थिति का चित्रण न करे। आखिर चिकित्सा व्यवस्था के साथ एक शब्द रेडक्रॉस भी जुड़ा है, जिसका मतलब है कि ये लोग इतने असाधारण मनुष्य हैं कि ये युद्ध से लेकर शत्रु तक की जीवन रक्षा का दैवीय काम करते हैं। लेकिन दैवीय न सही, अगर थोड़ा सा मानवीय प्रेम या करुणा और थोड़ी सी जिम्मेदारी से भर जाएं तो ये छोटी-छोटी दुर्घटनाएं न हों।

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