मिस वर्ल्ड 2019 कॉन्टेस्ट / राजस्थान की सुमन राव तीसरे नंबर पर रहीं, कहा था- घूंघट प्रथा को खत्म करना चाहिए

इसी साल जून में फेमिना मिस इंडिया बनने के बाद सुमन राजसमंद स्थित अपने पैतृक गांव आईडाणा आईं थीं। इसी साल जून में फेमिना मिस इंडिया बनने के बाद सुमन राजसमंद स्थित अपने पैतृक गांव आईडाणा आईं थीं।
राजसमंद से गांव तक रास्ते में सुमन का जोरदार स्वागत किया गया था। राजसमंद से गांव तक रास्ते में सुमन का जोरदार स्वागत किया गया था।
मिस वर्ल्ड 2019 ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भारत की सुमन राव तीसरे नंबर पर रहीं। मिस वर्ल्ड 2019 ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भारत की सुमन राव तीसरे नंबर पर रहीं।
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इसी साल जून में फेमिना मिस इंडिया बनने के बाद सुमन राजसमंद स्थित अपने पैतृक गांव आईडाणा आईं थीं।इसी साल जून में फेमिना मिस इंडिया बनने के बाद सुमन राजसमंद स्थित अपने पैतृक गांव आईडाणा आईं थीं।
राजसमंद से गांव तक रास्ते में सुमन का जोरदार स्वागत किया गया था।राजसमंद से गांव तक रास्ते में सुमन का जोरदार स्वागत किया गया था।
मिस वर्ल्ड 2019 ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भारत की सुमन राव तीसरे नंबर पर रहीं।मिस वर्ल्ड 2019 ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भारत की सुमन राव तीसरे नंबर पर रहीं।

  • मिस वर्ल्ड 2019 ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं सुमन राव तीसरे नंबर पर रहीं हैं
  • जून में फेमिना मिस इंडिया बनने के बाद सुमन राजसमंद में अपने पैतृक गांव आईडाणा आईं थीं
  • जून में दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में सुमन ने कहा था- लैंगिक भेदभाव को खत्म करना चाहती है

दैनिक भास्कर

Dec 15, 2019, 05:45 PM IST

राजसमंद. इंग्लैंड में आयोजित हुई मिस वर्ल्ड- 2019 ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भारत का प्रतिनिधित्व राजस्थान की सुमन राव ने किया। सुमन इस कांटेस्ट में तीसरे नंबर पर रहीं। वे राजसमंद जिले के आईडाणा गांव की रहने वाली हैं। फिलहाल, मुंबई में रह रही हैं। इस कॉन्टेस्ट में जमैका की टोनी एन सिंह ने मिस वर्ल्ड 2019 ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीता।

इसी साल जून में फेमिना मिस इंडिया बनने के बाद सुमन राजसमंद स्थित अपने पैतृक गांव आईडाणा आईं थीं। इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर के साथ बातचीत की थी। तब उन्होंने कहा था वह लड़का-लड़की में भेद के अंतर को खत्म करना चाहती हैं। दैनिक भास्कर के साथ जून में हुई बातचीत के अंश-

सब मेरे पिता को बधाई दे रहे हैं, मां का नाम तक किसी ने नहीं लिया: सुमन

  • "आज भी हमारे समाज में लैंगिक मतभेद है। अभी भी महिला की तुलना में पुरुषों को ही क्रेडिट दिया जाता है। मिस इंडिया का ताज दिलाने में मेरे माता-पिता का भरपूर सहयोग मिला। जबकि आज मेरे गांव में स्वागत में सभी मुझे और पिता रतन सिंह को ही बधाई धन्यवाद दे रहे हैं। किसी ने भी मेरी मां सुशीला का नाम तक नहीं लिया।"
  • "कोई सिर्फ खूबसूरती के आधार पर ही मिस इंडिया नहीं बनता है। इसके लिए पूरी थीम काम करती है। मेरा पहले कोई सपना नहीं था कि मिस इंडिया बनूं। मेरा विजन सिर्फ पढ़ाई पूरी कर सीए बनना था। मैंने मिस इंडिया ऑर्गेनाइजेशन को इंटरव्यू में लैंगिक असमानता (लड़का और लड़कियों में भेद) की थीम पर पूरा काम करके दिया। इसी की बदौलत मुझे मिस इंडिया का खिताब मिला।" 
  • "आगे भी इस थीम को कायम रखते हुए लड़का-लड़की में भेद मिटाने की दिशा में काम करूंगी। इस थीम को मिस वर्ल्ड कॉन्टेस्ट तक लेकर जाऊंगी। ग्रामीण महिलाओं का घूंघट हटाने की दिशा में काम किए जाने की जरूरत है।"

बेटों से कम नहीं होती है बेटियां, फिर गांवों में अब तक यह भेद क्यों?
सुमन ने बताया था कि मिस इंडिया ऑर्गेनाइजेशन को लड़का-लड़की में भेद पर मेरी थीम बहुत अच्छी लगी। इस मुद्दे पर काम करने के लिए मेरा गांव आईडाणा प्रयोगशाला के तौर पर सहायक बना। डेढ़ महीने पहले आईडाणा आई थी। यहां महसूस किया कि अभी हमारे गांव में लैंगिक समानता नहीं है। बालिकाओं को खुलकर जीने की आजादी नहीं मिली है। कोई मां भ्रूण हत्या या बालिकाओं को गटर में फेंकने जैसा पाप नहीं करे, यही समझाना है कि बेटियां भी बेटों से कम नहीं होती है।

कंटेंट व फोटो : नरपत सिंह चौहान

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