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सुख-सुविधाएं नहीं, बल्कि वह पाने की लालसा रखें, जो महावीर ने पाया था : मुनि शास्त्र तिलक

उदयपुर. तेलीवाड़ा के हुमड़ भवन में श्रावकों ने तपस्वी का पारणा कराया। उदयपुर| मुनि शास्त्र तिलक विजय ने भगवान...

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 06:46 AM IST
Udaipur - सुख-सुविधाएं नहीं, बल्कि वह पाने की लालसा रखें, जो महावीर ने पाया था : मुनि शास्त्र तिलक
उदयपुर. तेलीवाड़ा के हुमड़ भवन में श्रावकों ने तपस्वी का पारणा कराया।

उदयपुर| मुनि शास्त्र तिलक विजय ने भगवान महावीर के वैराग्य से सीख लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उन चीजों को पाने की इच्छा न रखें, जिनका महावीर ने त्याग किया था। बल्कि वह पाने की लालसा रखते हुए साधना करें, जिसे भगवान ने अपनाया था।

मुनि शास्त्र तिलक सेक्टर-4 के जिनालय में मंगलवार को धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संन्यस्त होने से पहले भगवान महावीर के पास हर भौतिक सुख-सुविधा थी। हर तरह का ऐश्वर्य भी उनके पास था, लेकिन इन सबका त्याग कर वे सम्यक ज्ञान की तलाश में निकले और साधना से उसे पाया भी। इधर, अणुव्रत चौक स्थित तेरापंथ भवन में साध्वी गुणमाला ने अणुव्रत चेतना दिवस पर कहा कि अणुव्रत का उद्‌घोष ही संयम है। बौद्धिक विकास हो, लेकिन भावनात्मक न हो तो समस्या का समाधान नहीं हो सकता। सभा के उपाध्यक्ष अर्जुन खोखावत ने बताया कि शाम को स्पर्धाओं में भी समाजजनों का विशेष उत्साह दिखा। आयड़ के ऋषभ भवन में मुनि प्रेमचंद, आयड़ तीर्थ में आचार्य यशोभद्र सुरीश्वर और आराधना भवन में प्रन्यास प्रवर श्रुत तिलक विजय ने भी भगवान महावीर और उनके संदेशों की महिमा बताई।

श्रावकों ने कराया तपस्वी का पारणा

उदयपुर. सोलह करण उपवास साधना पूरी होने पर तेलीवाड़ा स्थित हुमड़ भवन में सकल दिगंबर जैन समाज के श्रावकों ने तपस्वी विशाल का पारणा करवाया। महिला मंडल अध्यक्ष मंजू गदावत ने बताया कि उत्सव में महिलाओं ने मंगल गीत गाए और सबने बारी-बारी से लौंग, गोंद, मूंग के पानी से पारणा कराया। इधर, धर्मसभा में मुनि धर्मभूषण ने कहा कि इच्छा शक्ति दृढ़ और आचार्य भगवन का आशीर्वाद हो तो कोई भी कठिन साधना पूरी करने में परेशानी नहीं होती है।

अरिहंत परमात्मा के प्रति रखें कृतज्ञता के भाव : शिव मुनि

महाप्रज्ञ विहार में आचार्य डॉ. शिवमुनि ने कहा कि हम एक ही परंपरा को मानने वाले हैं। गुरु कोई भी हों, आचार्य कोई भी हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। सबसे पहले भगवान महावीर हैं। हम सभी उन्हीं की शिक्षा-दीक्षाओं, परंपराओं का निर्वहन करने वाले हैं। महावीर हैं तो हम सभी हैं। अरिहंत परमात्मा ही सब कुछ है। उनके प्रति हमेशा कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए।

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