आखिरी सहारा भी चला गया...घर में कोई कमाने वाला नहीं था, हालात ऐसे कि गुजारा चलाने मनरेगा में मजदूरी करती है शहीद की पत्नी / आखिरी सहारा भी चला गया...घर में कोई कमाने वाला नहीं था, हालात ऐसे कि गुजारा चलाने मनरेगा में मजदूरी करती है शहीद की पत्नी

पत्नी और दो बच्चों के सिर से अब इकलौते कमाऊ का उठ चुका है हाथ

Bhaskar News

Feb 16, 2019, 07:34 PM IST
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उदयपुर/राजसमंद। राजसमंद जिले ने उड़ी हमले में अपने सपूत पुलवामा में नारायणलाल को न्यौछावर कर दिया। 700 घरों की बस्ती वाले बिनोल गांव में शहीद नारायणलाल गुर्जर को अंतिम विदाई दी गई। गुरुवार देर रात करीब 1 बजे दैनिक भास्कर के फोन से ही परिवार वालों को पता चला कि घर का एकमात्र कमाऊ नारायण शहीद हो गया है। तब से ही घर-परिवार के साथ गांव में मातम पसरा है। शनिवार को शहीद का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।

सबसे हैरानी की बात तो ये है कि 4 विधानसभा क्षेत्रों वाले इस जिले से शुक्रवार शाम 7 बजे तक भी परिवार को ढाढ़स बंधाने के लिए ही सही न तो कोई सांसद-विधायक पहुंचा और न ही कोई बड़ा अफसर। कलेक्टर और एसपी भी शाम तक नहीं पहुंचे। जबकि राजसमंद जिला मुख्यालय से यह गांव सिर्फ 15 किमी दूर है। इससे लोगों में भारी रोष भी है। कुछ लोग चर्चा कर रहे हैं- टीवी में तो गुरुवार शाम से ही नेता मंत्री आतंकवाद को मिटा देने, शहीदों के लिए फलां-फलां कर देने की हौवा-हवाई बातें कर रहे हैं, लेकिन सरकार का कोई भी नुमाइंदा शहीद के घर सांत्वना देने तक नहीं पहुंचता।


नारायण का परिवार...

नारायण के परिवार में उसकी पत्नी मोहनी 35, बेटी 14 साल की हेमलता और बेटा 12 साल का मुकेश है। हेमलता बिनोल राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय में 8वीं में और बेटा भावा में नोबल स्कूल में पढ़ता है।

पापा का सपना था कि मैं टीचर बनूं


शहीद नारायणलाल की बेटी रोते हुई बोली- पापा का सपना था कि मैं टीचर बनूं। वे रोज फोन कर होमवर्क के बारे में पूछते थे। देश के इन दुश्मनों को मार देना चाहिए...।

-हेमलता, शहीद की बेटी


मनरेगा में मजदूरी करती है शहीद की पत्नी


पत्नी मोहनी देवी परिवार चलाने के लिए अभी भी कभी-कभार मनरेगा में मजदूरी करने जाती है। पत्नी तथा दो बच्चों के सिर से अब इकलौते कमाऊ नारायणलाल गुर्जर का हाथ उठ चुका है।


बेटे को भी बनाना चाहते थे सैनिक


पापा मुझे स्कूल ले जाते थे, योग सिखाते। दौड़ लगवाते और व्यायाम करवाते थे। पापा का सपना था कि बड़ा होकर मैं सेना में जाऊं। -बेटा मुकेश

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