चांदी पिघलाने का काम करते 7 किशोरों को छुड़ाया, दो गिरफ्तार

Udaipur News - 3 मानव तस्करी विरोधी यूनिट और चाइल्ड लाइन ने शनिवार को कोलपोल क्षेत्र के दो मकानों पर दबिश देकर 7 किशोरों को छुड़ाया।...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 11:25 AM IST
Udaipur News - rajasthan news 7 youths rescued by silver melting two arrested
3 मानव तस्करी विरोधी यूनिट और चाइल्ड लाइन ने शनिवार को कोलपोल क्षेत्र के दो मकानों पर दबिश देकर 7 किशोरों को छुड़ाया। दो बंगाली कारीगरों को भी गिरफ्तार किया, जो इन बच्चों को कारीगरी के नाम पर पायल की गुगरियां बनाने और इसके लिए चांदी पिघलाने का जोखिम भरा काम करवाया रहे थे। छुड़ाए गए बच्चों में से छह पश्चिम बंगाल के हैं, जबकि सातवां झारखंड का है। इन्हें एनजीओ के शेल्टर में पनाह दी गई है। मानव तस्करी यूनिट के प्रभारी श्याम चारण ने बताया कि पश्चिम बंगाल के जेवर कारीगर शेख सैफुल इस्लाम पुत्र लियाकत अली और अख्तर अली पुत्र नियामत अली को एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी पर असमंजस को लेकर व्यापारियों ने विरोध किया। बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।

कार्रवाई कर बच्चों को ले जाती हुई।

इसलिए व्यापारियों ने विरोध किया : यूनिट जब बच्चों को लेकर जा रही थी तो एक व्यापारी ने कहा कि मेरे बच्चों को कहां ले जा रहे हैं। यूनिट ने व्यापारी को थाने चलने की कहा। थाने पहुंचे तो व्यापारी को थाने लाने पर विवाद हो गया। इसके बाद व्यापारियों ने थाने के आस-पास की कुछ दुकानें बंद की और विरोध जताया। इसके बाद डिप्टी राजीव जोशी और तीन थानों के थानाधिकारी पहुंचे। पुलिस और व्यापारियों के मध्य बातचीत हुई। व्यापारी और पुलिस ने असमंजस पर विवाद होना माना और मामला शांत हुआ।

बच्चों ने कहा : पैसे वालों के पास नौकरी है, हम पढ़ लें तो भी नहीं मिलेगी

चाइल्ड लाइन ने बच्चों से कहा कि इस उम्र में पढ़ाई करनी चाहिए, तुम इस काम में क्यों आए। बच्चों ने कहा पढ़ाई कर कुछ नहीं मिलता है। नौकरी भी अमीरों की ही लगती है। पढ़ने लग जाएंगे तो घर की गरीबी दूर नहीं होगी। छोटी जमीन पर पिता खेती बाड़ी और मजदूरी करते हैं। काम चाहिए था तो यहां पर आ गए। पढ़ाई की बात पर किशोरों ने सवाल किया कि यहां कौन पढ़ाई करवाएगा।

ऐसे हुई कार्रवाई : कॉलर की सूचना मिलने पर मानव तस्करी यूनिट के प्रभारी पुलिस निरीक्षक श्याम चारण, कांस्टेबल भानु प्रताप सिंह, राजेश और चाइल्ड लाइन से नवनीत औदीच्य, मोइन मंसूरी, राधा यादव, शंकर भाेई मौके पर पहुंचे। ज्यादा बच्चों के मिलने की कॉल पर जाप्ता साथ था। कोलपोल में एक किराए के मकान में पहुंचे तो एक कमरे में चार बच्चे मिले। वहां पर जेवर के लिए मोतियों के तराशने का काम कर रहे थे। नियोक्ता को बुलाया और दूसरी जगह छापा मारा, जहां से तीन बच्चों रेस्क्यू कर नियोक्ता को पकड़ा। इसके बाद थाने लेकर पहुंचे।

गलती-दर-गलती : पहला बाल श्रम कराते हैं, दूसरा जोखिम भरा काम, तीसरा 14 घंटे का काम, चौथा सिर्फ 5-5 हजार मेहनताना

सीडब्ल्यूसी ने बच्चों से पूछताछ की तो समाने आया कि सभी किशोर पिछले तीन साल से यहां पर काम कर रहे थे। नियोक्ता 14-14 घंटे काम करवा रहे थे। इसके बदले प्रति माह 5 हजार रुपए दिए जाते थे। सुबह 8-9 बजे किराए के मकान में आते थे और रात को करीब 10-11 बजे तक काम करते थे। बच्चों के भोजन की व्यवस्था दुकान पर ही की जाती थी। यह भी बताया कि गिरफ्तार नियोक्ता ही इनको काम करवाने के लिए लेकर आए थे।

आयोग ने किशोरों से बात की

मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य शैलेन्द्र पंड्या किशोरों से मिलने आसरा विकास संस्थान पहुंचे। किशोरों की जेब से बीड़ियां मिली जिनकी मेन्युफैक्चरिंग पश्चिम बंगाल की है। पंड्या ने कहा, इससे यह लगता है कि नशे की लत में भी हैं। बीड़ियों की जांच करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अन्य राज्य के बच्चे यहां काम करने आए हैं। इसलिए 15 जुलाई को अायाेग की होने वाली बैठक में इस मुद्दे काे रखेंगे। साथ ही अन्य राज्यों के बाला अायोग से भी चर्चा करेंगे।

किशोरों का नहीं था वेरिफिकेशन

थाना पुलिस से पूछताछ के बाद जानकारी मिली कि गिरफ्तार नियोक्ता और किशोरों में से किसी का भी पुलिस वेरिफिकेशन नहीं था। जबकि पुलिस ने पहले भी इस क्षेत्र में अभियान चलाकर वेरिफिकेशन करवाया था। यहां तक कि थाना क्षेत्र में पहले और 7 जुलाई को हुई चोरी में अभियुक्त पूर्व कर्मचारी ही निकले।

रहन-सहन को देखकर आए किशोर पूछताछ में यह भी सामने अाया कि यहां से काम कर गए युवकों का पश्चिम बंगाल और झारखंड में अच्छा रहन-सहन हो जाता है। इसी को देख यह बच्चे यहां काम करने आए।

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