70 लाख का कलांगन जार-जार, हर्बल गार्डन उजड़ा, हॉल अॉफ एवीज भी होने लगा बदहाल
सहेलियों की बाड़ी में जुलाई 2018 काे लाेकार्पित 70 लाख की लागत से बने कला-संस्कृति केंद्र ‘कलांगन’ की दाे साल से सुध ही नहीं ली जा रही है। टूरिस्ट काे अाकर्षित करने के लिए बनी अार्ट गैलरी में कीमती पेंटिंग्स पर न फायबर ग्लास लग पाए हैं अाैर न ही सांस्कृतिक कार्यक्रम धराेहर शुरू हाे पाया है। रखरखाव के अभाव में जहां हर्बल गार्डन उजड़ रहा है वहीं हाॅल अाॅफ एवीज भी बेहाल है। इस कला केंद्र में पर्यटकों के लिए फोटो गैलेरी, टेराकोटा दीर्घा सहित विभिन्न आकर्षण मौजूद हैं। यहां सहेलियों की बाड़ी थीम पर बनी पेंटिंग्स के अलावा हल्दी घाटी का युद्ध, गणगौर की सवारी, घूमर नृत्य आदि को कलाकृतियों के रूप में उकेरा गया है। कला दीर्घा में मेवाड़ के इतिहास-संस्कृति से जुड़ी करीब 35 पेंटिंग्स भी हैं, जिसे शहर के वरिष्ठ चित्रकारों ने तैयार किया है। एसीईआरटी के कला प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. जगदीश कुमावत के अनुसार लाखाें रुपयाें की कीमत वाली इन केनवास पेंटिंग्स पर 2 साल बीत जाने के बाद से ही फाइबर ग्लास लगवाने का काम अधूरा है।
दाे साल बाद भी सिविल वर्क का ही नहीं हुआ भुगतान, रखरखाव मुश्किल : एससीईआरटी
एससीईआरटी उपनिदेशक तेजपाल उपाध्याय ने बताया कि संस्थान ने साइंस लैब का रिनोवेशन कर कलांगन बनाया था, लेकिन इसके 9.45 लाख का भुगतान नहीं हुआ। पर्यटकों से होने वाली आय का हिस्सा या रखरखाव का बजट देने की भी बात की थी। इसके लिए स्मार्ट सिटी को बात पहुंचा दी है। टिकट बढ़ाया गया, जिसका 80 फीसदी हिस्सा संस्थान की विकास समिति को जाना था। ऐसा भी नहीं हुआ।
नहीं शुरू हाे पाया धरोहर कार्यक्रम, हर्बल गार्डन के लिए माली तक नहीं
बागोर की हवेली में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम की तर्ज पर कला केंद्र में भी ‘धरोहर’ कार्यक्रम प्रस्तावित है, लेकिन इसे शुरू करने के लिए भी एससीईआरटी की ओर से टिकट रखने का प्रस्ताव दिया गया है। इसी तरह बाड़ी में हर्बल गार्डन भी तैयार करवाया गया था, लेकिन इस यह भी रखरखाव के अभाव में उजड़ रहा है। इसके लिए माली तक की व्यवस्था नहीं है।
पक्षी विहार का साउंड सिस्टम खराब : वहीं केंद्र में बने पक्षी विहार ‘हॉल अॉफ एवीज’ में मेवाड़ में पाए जाने वाले पक्षियों के मॉडल्स भी मौजूद हैं। वास्तविकता का अहसास कराने के लिए पक्षी विहार में लगाया गया साउंड सिस्टम भी तकनीकी खराबी के चलते काम नहीं कर रहा है। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी एससीईआरटी पर है, लेकिन एससीईआरटी का कहना है कि न तो हमें टिकट में हिस्सा मिला, न ही रखरखाव के लिए दिया जाने वाला बजट। सहेलियों की बाड़ी में प्रतिदिन औसतन आय 50 हजार तक होती है।
बैठक में यह तय किया गया था कि केंद्र के रखरखाव और देखरेख की जिम्मेदारी एससीईआरटी की रहेगी। हमारी ओर से सिविल का काम पूरा होने के बाद पूरा भुगतान किया जा चुका है। अब हमारी इसमें कोई जिम्मेदारी नहीं है।
-कमर चौधरी, सीईओ, स्मार्ट सिटी