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चौमासे करने आए आचार्य, श्रावकों ने की अगवानी

2 वर्ष पहले
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दिगंबर जैन समाज के आचार्य वैराग्यनंदी और आचार्य सुंदरसागर महाराज आदि ससंघ का चातुर्मास प्रवेश शोभायात्रा के साथ आदिनाथ भवन, सेक्टर 11 में रविवार को हुआ।

आदिनाथ दिगंबर जैन चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक शाह ने बताया कि बैंड बाजों, घोड़े, हाथी, ऊंट, बग्गी के साथ श्रावक और श्राविकाएं जयघोष करते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा माछला मगरा, अग्रवाल धर्मशाला होती हुई आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंची। यहां धर्मसभा में आचार्य वैराग्यनंदी ने कहा कि इस संसार में जहां भी जाओ स्वार्थी और मतलबी लोग मिलेंगे परंतु जब हम जिनेंद्र की शरण में जाते हैं आते हैं तो हम हमें अपनी आत्मा को परम शांति मिलती है और स्वार्थ पीछे छूट जाता है। आचार्य सुंदरसागर ने कहा कि कैंची बड़ी होती है लेकिन वह काटने का काम करती है और सुई छोटी होते हुए भी जोड़ने का काम करती है। बड़े हो जाओगे तो जमीन से छूट जाओगे, काटने का कारण नहीं बनना है जबकि हमें सुई की तरह जोड़ने का कार्य करना है। अपनी आत्मा का कल्याण करें। उन्होंने बताया कि संघ में 25 वर्ष से लेकर 95 वर्ष तक के साधु साध्वियां हैं। चातुर्मास समिति अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत, प्रचार प्रसार मंत्री महेंद्र भाणावत, बंशीलाल महावीर, मदन देवड़ा आदि मौजूद थे।

नगर प्रवेश करते आचार्य वैराग्यनंदी और आचार्य सुंदरसागर।

प्रंन्यास प्रवर का चातुर्मास प्रवेश

प्रंन्यास प्रवर विजय र| आदि ठाणा का रविवार को आराधना भवन, मालदास स्ट्रीट में चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश हुआ। जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के अध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र हिरण ने बताया कि उपनगरीय क्षेत्रों से विहार कर पंन्यास प्रवर विरागर| विजय आदि ठाणा ओसवाल भवन पहंुचे। जहां से चतुर्विध संघ के साथ चातुर्मास प्रवेश के शोभायात्रा के रूप में रवाना हुए। मार्ग में जगह-जगह श्रावक-श्राविकाओं ने चावल के गहुलिये बनाकर पंन्यास प्रवर का स्वागत किया। आराधना भवन स्थित मंदिर में श्रावक-श्राविकाओं के साथ सामूहिक चैत्य वंदन किया। बी.एच. बापना, गजेंद्र भंसाली, महासभा के अध्यक्ष तेज सिंह बोल्या, मनोहर सिंह नलवाया, सुशील बांठिया आदि ने बहुमान किया।

दीक्षित शंकर अब शुभंकर मुनि, महोत्सव में उमड़े श्रावक

जैन समाज की ओर से जैन दीक्षा महोत्सव रविवार को को कड़िया, लोसिंग में हुआ। नव दीक्षित शंकर को शुभंकर मुनि नाम दिया गया। हिम्मत सिंह बड़ाला ने बताया कि दीक्षा महोत्सव सौभाग्य मुनि के सान्निध्य में हुआ। धर्मसभा में राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने कहा कि हिंसा को हिंसा से समाप्त नहीं किया जा सकता है। अहिंसा ही हिंसा को खत्म करने वाली महाशक्ति है, जो विश्व को विनाश से बचा सकती है। हिंसा के मार्ग पर चलकर कोई भी जाति, धर्म और देश विकास नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि रक्षा के नाम पर हथियारों का जखीरा एकत्रित करना समस्या का समाधान नहीं है।

आचार्य विद्यासागर का दीक्षा दिवस मनाया

दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति का आचार्य विद्यासागर महाराज का 52वां दीक्षा दिवस उदासिन आश्रम, अशोक नगर में रविवार को मनाया गया। इस मौके पर विद्यासागर विधान हुआ। समिति के मंत्री शशिकांत शाह ने बताया की विधान में 52 जोड़ो सहित 200 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। अध्यक्ष कुन्थुकुमार गणपतोत, महामंत्री प्रकाश अखावत आदि मौजूद थे।

अपने भीतर है परमात्मा का वास : आचार्य ज्ञानेश

आचार्य ज्ञानेश ने अरिहंत वाटिका, न्यू भूपालपुरा में धर्मसभा में कहा कि मानव जीवन परमात्मा की सर्वोत्तम अनोखी कृति है। जिनके हृदय में छल-कपट, दंभ, माया नहीं होती है उस पर भगवान की विशेष कृपा होती है। हम भगवान को बाहर ढूंढ़ते रहते हैं, जबकि भगवान तो तुम्हारे दिल में है।

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