आखिर खत्म हुई बीएन के नीति नियंता में तनातनी

Udaipur News - मेवाड़ की सिरमोर शिक्षण संस्था और महाराणा परिवार की प्रतिष्ठा से जुड़े बीएन विश्वविद्यालय में आखिर टकराहट का दौर...

Jul 14, 2019, 11:25 AM IST
मेवाड़ की सिरमोर शिक्षण संस्था और महाराणा परिवार की प्रतिष्ठा से जुड़े बीएन विश्वविद्यालय में आखिर टकराहट का दौर खत्म हुआ और 43 दिन से चल रहे टकराव का दौर शनिवार को समाप्त हो गया। संस्था के संचालन के लिए आमादा दोनों गुटों के बीच जिस तरह संघर्ष बढ़ता जा रहा था, उसमें हिंसक झड़पों की आशंका भी कम नहीं थी। हालात ही ऐसे बनते जा रहे थे। लेकिन शनिवार को महेंद्र सिंह मेवाड़ ने ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक की कि दोनों गुटों को अपने अहम को दरकिनार कर संस्थान के हित में अपने टकराव भरे रवैए से मुक्ति पा ली। महेंद्र सिंह मेवाड़ ने दोनों ही गुटों को जमकर खरीखोटी सुनाई और संस्थान के हितों और बेहतर भविष्य के लिए एक बड़े फसाद की आशंका को टालकर एक सुकून भरी राह निकाल ली। दोनों गुटों के नेताओं ने भी इस प्रकरण को सुलझाने में बड़ पन का परिचय दिया। 4 घंटे चली बैठक में सबसे पहले 32 मिनट तक सभा अध्यक्ष महेद्रसिंह मेवाड़ बोले। उन्होंने कहा कि बीएन में जो विवाद चल रहा है उसे आपस में मिलकर जल्द सुलझा लें। कार्यकारी अध्यक्ष गुणवंत सिंह झाला की अध्यक्षता में दूसरे चरण की बैठक हुई जिसमें ये निर्णय हुआ कि महेन्द्रसिंह अागरिया मंत्री पद पर बने रहेंगे। इससे पहले आगरिया और झाला के बीच आपसी संवाद में दोनाें ने अपने-अपने तर्क पेश किए। आगरिया बोले, मैंने इस्तीफा आपके नाम लिखा नहीं था, आपने स्वीकार कैसे किया? इस पर झाला का जवाब था कि मेरे पास ये इस्तीफा आया था इसलिए स्वीकार किया।

अब 6 माह बाद होंगे चुनाव

फरवरी में विद्या प्रचारिणी सभा के चुनाव हैं। इसमें कार्यवाहक अध्यक्ष के अलावा दो उपाध्यक्ष, मंत्री, संयुक्त मंत्री आदि के चुनाव होने हैं जिनका कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। संस्था अध्यक्ष महेन्द्रसिंह मेवाड़ मार्गदर्शक और संरक्षक की भूमिका में होते हैं।

डेढ़ माह पहले यों शुरू हुआ विवाद

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