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भास्कर : भर्ती घोटालों के आरोप भी आप पर कैसे बेअसर रहे? प्रो. शर्मा : कई आरोप निराधार हैं, बाकी सच भी सामने आएगा

Udaipur News - सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी शर्मा बुधवार को इस पद पर तीन साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। इससे पहले...

Dec 04, 2019, 12:51 PM IST
Udaipur News - rajasthan news bhaskar how have the allegations of recruitment scams been neutralized on you pro sharma many of the allegations are baseless the rest will also come true
सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी शर्मा बुधवार को इस पद पर तीन साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। इससे पहले मंगलवार को राज्यपाल और कुलाधिपति कलराज मिश्र ने यह कार्यभार एमपीयूएटी के कुलपति प्रो. एनएस राठौड़ को सौंपने के आदेश जारी कर दिए हैं। क्योंकि गत 11 सितंबर को गठित प्रो. बीएन शर्मा की अगुवाई वाली कमेटी अब तक नया कुलपति सर्च नहीं कर पाई है। कुलपति प्रो. शर्मा मां की तबीयत का हवाला देकर 23 अगस्त से 30 नवंबर तक अवकाश पर चले गए थे, लेकिन 26 सितंबर को एकाएक लौट भी आए थे। यह सुविवि में नया मोड़ रहा। तब भी कार्यवाहक कुलपति का दायित्व प्रो. राठौड़ के पास था। कुलपति प्रो. राठौड़ का कहना है कि वे सुविवि के इस पद पर विवादों की वजह से रुचि नहीं रखते, लेकिन राजभवन के आदेश की पालना में सेवाएं देंगे।

आरोपों, चल रही जांचों और विश्वविद्यालय के हालात पर खुलकर बोले निवृत्तमान वीसी

Q. आपके पास ऐसी कौन-सी शक्ति है कि नवीन मिश्रा, प्रो. राजेश दुबे, सिंगल एक्सपर्ट, नीरज रावत जैसे भर्ती घोटाले के आरोपों के बाद भी वापस आ गए थे?

A. कई आरोप निराधार पाए जा चुके हैं। एक-दो मामलों का सच जल्द सामने आएगा। पूर्व रजिस्ट्रार हिम्मत सिंह भाटी का सहयोग मिला होता तो विवि नए आयाम गढ़ता। भाटी को नियमों की पूरी जानकारी नहीं होने से विवि की छवि का हनन हुआ।

Q. प्रो. राजेश दुबे की भर्ती मामले में लोकायुक्त जांच में आप पर पद के दुरुपयोग के आरोप हैं?

A. प्रो. दुबे जोधपुर विवि में अखिल भारतीय स्तर के पद पर थे। उन्हें तत्कालीन कुलपति के वैमनस्य के कारण पद छोड़ना पड़ा था। दुबे को यहां बायोटेक्नोलॉजी में प्रोफेसर के ही पद पर लगाया था। संबंधित दस्तावेज राजभवन में पेश कर दिए हैं। जल्द ही इसका निस्तारण होगा। यूजीसी अधिनियम 2010 के तहत प्रो. दुबे का एपीआई स्कोर 3912 और यूजीसी अधिनियम 2018 में करीब 3500 है।

Q. क्या सुविवि की छवि हनन के प्रयास चल रहे हैं?

A. सुविवि की छवि हनन के प्रयास लगातार हो रहे हैं। सब जानते हैं कि कौन-कौन लोग विवि की छवि को धूमिल करने में लगे हैं। कई शिक्षकों की एक-दूसरे की टांग खींचने की प्रवृत्ति है।

Q. सुविवि में विवादों से छवि हनन की बात आपको खराब लगती है, जेएनयू के बारे में क्या सोचते हैं?

A. जेएनयू ए-क्लास एजुकेशन का मामला है। भारत सरकार ने जेएनयू को विशेष विवि के रूप में विकसित किया था, लेकिन उसके आंतरिक वातावरण में राजनीतिक विचारधाराओं के आधार पर युवा छात्र-छात्राओं को विशेष प्रकार के प्रलोभन देकर, उन्हें गुमराह कर हमारे राष्ट्र-संस्कृति के विपरीत आचरण के लिए अभिप्रेरित किया जाता है। यह उचित नहीं है। राजनीतिक विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन राष्ट्रीय अस्मिता पर सबको एक होना चाहिए।

Q. आपके कार्यकाल की 5 उपलब्धियां क्या रहीं?

A. सुविवि एक मात्र विवि है, जिसे बायोटेक्नोलॉजी विभाग मिला। यह केंद्र छात्रों के लिए ऑनलाइन कोर्सेज कर रहा है। यह प्रदेश का पहला विवि है, जो कचरा स्वच्छता प्रबंधन में डिग्री कराता है। शिक्षा विभाग स्थापित किया, रूसा-1 में 20 करोड़ रुपए मिले, शैक्षणिक शोध के लिए 102 भर्तियां की ।

Q. आपको मलाल जो 5 काम नहीं कर पाए?

A. नेक की ए ग्रेड लेने की प्रक्रिया का विचाराधीन होना, गैर शैक्षणिक पदों पर भर्ती नहीं करना, रूसा-2 से 50 लाख मिलने की प्रक्रिया का भी जारी होना।

इन विवादों से घिरे रहे हैं वीसी





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