जगदीश के दर भजन में मगन हुए श्रद्धालु, सुबह से आधी रात तक दर्शन को रही भीड़

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 11:10 AM IST

Udaipur News - उदयपुर | शहर में ज्येष्ठ शुक्ल निर्जला एकादशी पर्व पर गुरुवार को प्रभु की विशेष सेवा-पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और...

Udaipur News - rajasthan news blessed devotees in the hymns of jagdish crowds from darshan to midnight
उदयपुर | शहर में ज्येष्ठ शुक्ल निर्जला एकादशी पर्व पर गुरुवार को प्रभु की विशेष सेवा-पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और पतंगबाजी का दौर तड़के 5.30 से मध्यरात्रि 12 बजे तक चला। जगदीश मंदिर, श्रीनाथजी, अस्थल सहित अन्य मंदिरों में भारी भीड़ रही। भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तड़के 5.30 बजे से ही मंदिरों में पहुंचना शुरू हो गया। दिनभर निर्जल-निराहार रहे भक्तों ने प्रभु श्रीहरि की उपासना की। वैष्णवों ने एकादशी व्रत कर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। जगदीश मंदिर में तड़के 5.30 बजे ठाकुरजी की मंगला आरती हुई। जगदीश मंदिर के हुकमराज-रामगोपाल पुजारी ने बताया कि ठाकुरजी को पंचामृत स्नान करा कर विशेष केसरिया पोशाक धारण कराई। तड़के 5.15 बजे से दर्शनार्थियों का तांता लगना शुरू हो गया जो देर रात तक जारी रहा। दिनभर भजन-कीर्तनों की धूम रही। पतंगबाजों ने शाम को सुहाने मौसम में पतंगें उड़ाकर जल-पर्यावरण संरक्षण और क्रिकेट वर्ल्ड कप ट्रॉफी में भारत की जीत के संदेश दिए।

जानिए ये भी... इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं

मंदिरों में ग्यारस (एकादशी) कथावाचन हुआ। कथा में बताया गया कि माता कुंती और चार पांडव निर्जला एकादशी का व्रत करते थे, लेकिन भीम नहीं करता था। सभी ने एकादशी के लिए भीम पर दबाव बनाया। सभी के दबाव और व्यासजी की समझाइश पर भीम ने भी निर्जला एकादशी की तो इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाने लगा।

गुलाबबाग में परंपरागत मेला

एकादशी पर शहर के गुलाबबाग में परंपरागत मेला लगा। इसमें आदिवासी बहुल क्षेत्र डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सिरोही, आबू रोड सहित संभाग के अन्य क्षेत्रों के हजारों आदिवासी परिवार आए। बच्चों ने खेल-कूद के साथ मौज-मस्ती की।

गुलाबबाग से जगदीश मंदिर तक लगी कतारें, विदेशी मेहमान भी हुए शामिल

गुलाबबाग से जगदीश मंदिर तक श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं के स्वागत में जगह-जगह को शीतल जल, शर्बत, केसर युक्त दूध आदि के काउंटर लगाए गए। दानदाताओं ने जगदीश मंदिर सहित शहर के विभिन्न मंदिरों पर सात प्रकार के अनाज, वस्त्र, फल, जल से भरे पात्र इत्यादि का दान कर पुण्य कमाया। शहर के अन्य मंदिरों और स्थलों पर भी दान-पुण्य का दौर चला। जगदीश मंदिर पर देवस्थान विभाग और पुजारी परिषद ने दर्शनार्थियों के लिए जगदीश चौक से मंदिर परिसर तक टेंट, लाइट, माइक, कूलर, पंखे आदि की व्यवस्था की। जिला-पुलिस प्रशासन, पुजारी परिषद आदि के कार्यकर्ता दिनेश मकवाना, कैलाश जीनगर आदि के नेतृत्व में दिनभर दर्शनार्थियों की व्यवस्था में जुटे रहे।

प्रभु को फव्वारों से शीतला दी, जगह-जगह तुलसी के पौधे बांटे

शहर स्थित श्रीनाथ मंदिर में ठाकुरजी को विशेष शृंगार धराया कर ऋतु फल आमों का भोग धराया गया। अस्थल मंदिर में फूल बंगला के दर्शन करने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की गई। प्रभु को फव्वारों से शीतला प्रदान की गई।

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