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जिले में ‘चुप्पी तोड़ो-खुल कर बात करो’ अभियान आज से, बालिकाओं को माहवारी को लेकर जागरूक करेंगे

2 वर्ष पहले
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जिला कलेक्टर आनन्दी की पहल पर जिलेभर के स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा-6 से 10वीं तक की बालिकाओं में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन को लेकर ‘चुप्पी तोड़ो- खुल कर बात करो’ अभियान का आगाज सोमवार को कोटड़ा, झाड़ोल, फलासिया और सायरा ब्लॉक से होगा। जिला रसद अधिकारी ज्योति ककवानी ने बताया कि इन चारों ब्लॉक में मेडिकल इंटर्न बच्चियों और उनकी माताओं को माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के प्रति जागरूक करेंगे। अभियान की नोडल आफिसर और टीएडी एडिशनल कमिश्नर अंजली राजोरिया ने बताया कि इन ब्लॉक के लिए चिकित्सकों की टीमें गठित कर दी गई हैं जो एनीमिया व अन्य जरूरी जांचें कर इलाज करेंगी। अभियान के तहत जिलेभर में कक्षा-6 से 12वीं तक की 1,17,443 बच्चियों के हीमोग्लोबिन की जांच की जाएगी। जिन बच्चियों के हीमोग्लोबिन का स्तर 6 से 11 तक पाया जाएगा, उन्हें चिन्हित कर जब तक इलाज किया जाएगा तब हीमोग्लोबिन का स्तर 12 तक नहीं पहुंच जाता।

जागरूकता के लिए छात्राओं और उनकी माताओं को दिखाएंगे माहवारी स्वच्छता पर बनी शॉर्ट फिल्म

एडिशन कमिश्नर अंजलि राजोरिया ने बताया कि अभियान के तहत जिले के 1400 उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को कवर किया जाएगा। अभियान 6 चरणों में चलेगा। पहला चरण कोटड़ा, झाड़ोल, फलासिया और सायरा में चलेगा। छात्राओं और उनकी माताओं को यूनिसेफ द्वारा माहवारी स्वच्छता स्वच्छता पर बनी शॉर्ट फिल्म दिखाई जाएगी। उनकी समस्याएं सुनकर समाधान किए जाएंगे। छात्राओं को माहवारी स्वच्छता का प्रशिक्षण देने के लिए आरएनटी मेडिकल कॉलेज, गीतांजलि मेडिकल कॉलेज, पेसिफिक मेडिकल कॉलेज, अनंता मेडिकल कॉलेज आदि के इंटर्न की भी मदद ली जाएगी।

ताकि पीरियड्स को बीमारी या शर्म नहीं समझें बेटियां

कलेक्टर आनन्दी का कहना है कि आदिवासी बहुल क्षेत्र की अमूमन बच्चियों में माहवारी संबंधी सामान्य जानकारी के अभाव की समस्या सामने आई है। ग्रामीण क्षेत्रों की कई बच्चियां माहवारी को एक बीमारी समझती हैं। कई परिवारों में इसे शर्म का विषय समझा जाता है। इससे बच्चियों को संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इस परेशानी से निपटने के लिए ‘चुप्पी तोड़ो खुल कर बात करो’ अभियान शुरू किया जाएगा।

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