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आबकारी विभाग के मुखिया का पद मद्य-निषेध आयुक्त और लक्ष्य हर रोज शराब ठेकों से 25 करोड़ का रेवेन्यू जुटाना

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 06:30 AM IST

Udaipur News - प्रदेश में हर रोज 55 करोड़ रुपए से ज्यादा की शराब पिलाने वाला आबकारी विभाग वास्तव में बना तो था शराबखोरी रोकने के लिए,...

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प्रदेश में हर रोज 55 करोड़ रुपए से ज्यादा की शराब पिलाने वाला आबकारी विभाग वास्तव में बना तो था शराबखोरी रोकने के लिए, लेकिन सरकारों ने इसे लगा दिया ठेके खोलकर रेवेन्यू बटोरने में। आबकारी आबकारी आयुक्त पदेन मद्य-निषेध आयुक्त भी हैं। प्रमाण ये है कि इसका साइन बोर्ड तक आयुक्तालय के बाहर लगा है। महकमे के अधिकारी बताते हैं, अब विभाग मद्यसंयम कार्यक्रम के रूप में महज पांच दिन गांधी जयंती, महावीर जयंती, शहीद दिवस, स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस सूखा दिवस के रूप में ठेके बंद रखवाता है। मद्यसंयम पर कुल राजस्व का 0.1 प्रतिशत या अधिकतम 10 करोड़ रुपए खर्च कर सकते हैं, लेकिन यह पैसा कभी पूरा खर्च नहीं होता। पिछले तीन साल में 3 से 7 करोड़ रु ही खर्च हुए। सालाना रेवेन्यू 7000 करोड़ से ज्यादा है। इस साल का लक्ष्य 9300 करोड़ है, जबकि पिछले साल 7275.83 करोड़ रुपए रेवेन्यू था।

पहली बार पढ़िए दिलचस्प जानकारी ...और आबकारी ने कैसे अपना मूल काम ही बदल दिया

उदयपुर. आबकारी आयुक्त कार्यालय के बाहर लगा पदेन मद्य निषेध आयुक्त का बोर्ड।

आजादी के समय से आबकारी अस्तित्व में है। 1956 में मदिरा व्यवसाय को प्रोत्साहन देने वाले विज्ञापनों, प्रकाशनों पर राजस्थान आबकारी नियम 77-(B), 77-C और 77-CC में आवश्यक प्रावधान किए गए। फिर राजस्थान में चरणबद्ध तरीके से मद्य निषेध लागू किया गया। लेकिन शराब के अवैध व्यापार को बढ़ावा और हथकढ़ शराब से लोगों की मौत सहित दूसरे कारणों से 11 अगस्त 1981 को इसे समाप्त कर दिया गया और इसे मद्य संयम कार्यक्रम का नाम दिया गया।

सच ये... जानिए साल दर साल लक्ष्य और प्राप्ति

साल लक्ष्य (करोड़ रुपए में) प्राप्ति

2015-2016 6350 6712.94

2016-2017 7600 7053.68

2017- 2018 7800 7275.83

शराब से हर साल 23000 मौतें

पब्लिक हैल्थ फाउंडेशन संस्था की रिसर्च के मुताबिक खुदकशी करने वालों में 28 फीसदी शराबी हाेते हैं। राजस्थान में 10 लाख से ज्यादा लोग शराब पीते हैं। हर साल 23 हजार लोग शराब पीकर होने वाली दुर्घटनाओं या बीमारियों से मरते हैं।

हे सरकार ये कैसा संयम है : शराब दुकानें बढ़ाई, बंदिशें हटा दी

नई आबकारी नीति में देशी शराब की 25 दुकानें बढ़ी हैं। अर्नेस्ट मनी हटाकर आवेदन शुल्क किया है। मकसद शराब व्यापार के प्रति लोगों को आकर्षित करना है। अंग्रेजी शराब के 90 और 180 एमएल के टैट्रा पैक भी इस बार से दुकानों पर मिलंेगे।

इन राज्यों में शराबबंदी

केरल, गुजरात, बिहार, मिजोरम, नागालैंड में शराबबंदी है। राजस्थान इनसे सबक सीख सकता है।

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