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क्रूज संचालकों ने किया दावा- गंदगी तो दूर, ऑयल-धुआं तक पानी को नहीं छुएगा

एक वर्ष पहले
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मेयर गोविंद सिंह टांक ने गुरुवार को गैराज समिति अध्यक्ष मनोहर चौधरी अाैर गैराज अधीक्षक बाबूलाल के साथ पीछाेला झील में निर्माणाधीन क्रूज का जायजा लिया। संचालकों ने स्पष्ट किया कि क्रूज 2062 ग्रेड एमएस स्टील से बना है, जिसका इंजन पूरी तरह से ड्राय इनजस्ट सिस्टम से निर्मित है। इंजन मारपोल ग्रेडिंग सिस्टम से सर्टिफाइड है, इसलिए ऑयल अाैर धुअां कभी भी पानी के संपर्क में नहीं आएगा।

निगम की ओर से यह निरीक्षण झील में क्रूज काे लेकर झील प्रेमियाें अाैर विपक्ष के कुछ पार्षदाें के सवाल-आपत्तियों को देखते हुए था। पर्यावरण अाैर झील संरक्षण काे लेकर कई अहम बातें की गई थीं। संचालकों के हवाले से गैराज समिति अध्यक्ष मनाेहर चाैधरी ने बताया कि क्रूज में टॉयलेट बायो-डाइजेस्टर प्रणाली पर आधारित होंगे। इसके लिए विशेष मशीन डीआरडीओ से मंगवाई है। इस तकनीक से मल स्वचलित ही मिथेन गैस अाैर पानी में बदलता है। पानी को सेप्टिक वाल्व से जुड़े पंप के जरिए सीवरेज वाहन में भरकर निर्धारित डंपिंग यार्ड पर खाली कर दिया जाएगा। क्रूज का संचालन दूध तलाई जेटी से करेंगे। यहां से सवारियों को बैठाकर गणगौर घाट के मोहन मंदिर के पास होते हुए लेक पैलेस के पीछे की ओर से घुमाते हुए फिर से दूध तलाई पर लाया जाएगा। करीब 1.5 किलोमीटर का यह राउंड पूरा करने में लगभग 90 मिनट लगेंगे। क्रूज का वजन 325 टन है, जिसे लगभग एक साल में तैयार किया गया है। कुछ ही दिनों में फिनिशिंग कर इसे झील में उतार दिया जाएगा।

38 मीटर लंबा अाैर 12 मीटर चौड़ा है क्रूज, दिया मेवाड़ी टच

क्रूज 38 मीटर लंबा, 12 मीटर चौड़ा और 10.5 मीटर ऊंचा है। इसे मेवाड़ी टच दिया गया है। यह लगभग 5 फीट पानी में भी आसानी से तैर सकेगा। यह राेज तीन राउंड लगाएगा। एक बार में 150 लोग सैर कर सकेंगे। दाे मंजिला क्रूज के एसी हॉल अाैर ओपन स्पेस में 75-75 लोगों के बैठने की व्यवस्था हाेगी। देश के 10 जिलाें में फिलहाल इस तरह का क्रूज चल रहा है।

निगम को हर साल होगी 2.25 करोड़ की कमाई

चाैधरी ने बताया कि इस क्रूज के जरिए निगम को सालाना 2.25 कराेड़ रुपए की आय होगी। इस राशि में हर साल 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। किसी भी प्रकार की लापरवाही पर निगम को अनुबंध रद्द करने का अधिकार होगा, जिसका पूरा नुकसान संचालकों को ही उठाना होगा। क्रूज में परोसा जाने वाला खाना बाहर से तैयार होकर आएगा। फायर लेस कुकिंग सिस्टम से क्रूज में खाने को केवल सर्व किया जाएगा। बड़े जहाजों की तर्ज पर आईआरएस नियमों के तहत इसका निर्माण करवाया जा रहा है।

क्रूज का निरीक्षण करते मेयर अाैर समिति अध्यक्ष।
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