एंटरटेनमेंट ही नहीं, शरीर-दिमाग कोस्वस्थ भी रखते हैं डांस और म्यूजिक
राजस्थान का घूमर हो, गुजरात का गरबा और पंजाब का गिद्दा-भांगड़ा या शास्त्रीय सहित कोई भी शैली, नृत्य मनोरंजन ही नहीं, शरीर को सेहतमंद रखने की थैरेपी भी है। यही खासियत संगीत की भी है, जो सुकून देने के साथ दिलो-दिमाग को स्वस्थ रखता है। मंच पर सुर छिड़े हों या डांस परफॉर्मेंस हो रही हो, कलाकार हाव-भाव के साथ ताना-बाना बुनकर गीत-संगीत का अनुवाद करते हुए सीधे श्रोता-दर्शकों से जुड़ जाता है। फिर बात शास्त्रीय नृत्य-संगीत की हो तो कहने ही क्या। कला विशेषज्ञ यशवंत कोठारी बताते हैं, यह वैज्ञानिक तौर साबित हो चुका है कि संगीत और नृत्य सेहत पर जबरदस्त असर डालते हैं। रागों में इतनी शक्ति होती है कि कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। संगीत, स्वास्थ्य और रोगोपचार पर शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम शनिवार शाम साढ़े 6 बजे शिल्पग्राम में होगा। आयोजक महाराणा कुम्भा संगीत परिषद, सुखाड़िया विश्वविद्यालय संगीत विभाग और पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र हैं। कार्यक्रम में डॉ. मोनिका शाह गायन से बताएंगी कि रागों से शरीर में मौजूद सातों चक्र, कुंडलिनी को कैसे जाग्रत किया जा सकता है और संगीत के जरिए किस तरह से रोगों के उपचार में सहायता मिलती है। कार्यक्रम में दर्शकों का प्रवेश निशुल्क रहेगा।
संगीत से सेहत... शास्त्रीय संगीत पर आज होगा खास आयोजन, विशेषज्ञ बताएंगे फायदे