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250 साल में पहली बार भक्तों के लिए बंद हैं रघुनाथ मंदिर के पाट न सलामी तोप की गूंज होगी और न सामूहिक महाआरती और उत्सव

Udaipur News - रामनवमी गुरुवार काे है, लेकिन लाॅकडाउन के कारणा इस बार हनुमान घाट स्थित रघुनाथ मंदिर के दरवाजे भक्तों के लिए बंद...

Apr 02, 2020, 09:50 AM IST

रामनवमी गुरुवार काे है, लेकिन लाॅकडाउन के कारणा इस बार हनुमान घाट स्थित रघुनाथ मंदिर के दरवाजे भक्तों के लिए बंद रहेंगे। एेसा पहली बार हाेगा, जब यहां करीब 250 साल से चली आ रही 9 तोपों की सलामी भी नहीं होगी। मंदिर के पुजारी मनमोहन दास ने बताया कि इस बार तोपची के नहीं आने से सांकेतिक तौर पर परंपरा निभाई जाएगी।

लॉकडाउन में भीड़ नहीं जुटने के आदेशों के चलते पहली बार मंदिर में भक्तों का प्रवेश बंद रहेगा। पुजारी का कहना है कि भगवान का उत्सव तन और मन में उत्साह-उमंग के लिए मनाया जाता है। इस बार काेराेना संक्रमण से बचाव की गाइड लाइन के तहत जन स्वास्थ्य काे देखते हुए मंदिर बंद रहेगा। पारंपरिक रूप से दोपहर 12:30 बजे आरती होगी। पंजेरी और पंचामृत का नैवेद्य चढ़ाया जाएगा। इतिहासकार राजेंद्रनाथ पुरोहित बताते हैं कि मेवाड़ के शासकों ने रामनवमी को सदैव विशेष महत्व दिया। हनुमान घाट का रघुनाथ मंदिर महाराणा भीम सिंह के कार्यकाल (1778-1828) में बनाया गया था। रामनवमी पर यहां ठाकुरजी के जन्माेत्सव पर 7 तोपों की सलामी की परंपरा रही है।

अाज जरूरतमंदाें को खिलाएं खाना, घर में ही पात्र में करें ज्वारों का विसर्जन

इस बार नवमी पर कन्या पूजन भी हाेता है। इस बार लाॅकडाउन के कारण अपने आसपास ही जरूरतमंद को यह खाना खिलाएं, ताकि मुसीबत के वक्त मोहल्ले, शहर में कोई भूखा न रहे। ज्वारों का विसर्जन भी घर में ही किसी पात्र में करे। जवाराें की मिट्टी को गमलाें में डालें। यह पवित्र मिट्टी वर्षभर घर में रहेगी।

इतिहासकार बोले- राजा और प्रजा की उपस्थिति में रघुनाथद्वारा मंदिर में भी होता था विशेष आयोजन


रघुनाथ मंदिर, जहां हर साल रामनवमी पर महाआरती होती आई है।

इसके अलावा चांद पोल स्थित ‘रघुनाथद्वारा’ में पूजा का आयोजन होता रहा है। मंदिरों में मेवाड़ में महाराणा की प्रजा और राजा की उपस्थिति में विशेष उत्सव का आयोजन होता था। यह स्थान राज्य के प्रतिष्ठित देवालयों में से एक था, जिसकी सेवा-पूजा खास संप्रदाय के साधु करते है। इतिहासकार प्रो. गिरीश नाथ माथुर ने बताया कि इस दिन उपवास रखते हुए केवल फलाहार ग्रहण करते थे। साथ ही राजमहल स्थित पागड़ा की हथनी और नगीना बाड़ी में भी महाराणा हाथी-घोड़ों का पूजन कर दरबार लगाते थे। नवमी के मौके पर नीमज माता, करणी माता, हरि सिद्धि मंदिर आदि मेवाड़ के कई शक्तिस्थलों में आराधना होती थी।

हनुमान घाट स्थित रघुनाथ मंदिर के मुख्य द्वार पर बुधवार को भी ताला था।

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