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बिलों में हेरफेर पर एमबी की दवा सप्लायर फर्म ब्लैकलिस्ट

एक वर्ष पहले
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एमबी हॉस्पिटल में अनुबंध के तहत करीब 25 साल से दवा व अन्य सामग्री पहुंचाने वाली फर्म सीडी डिस्ट्रीब्यूटर्स को दवाओं के बिलों में हेराफेरी के मामले में शनिवार को हॉस्पिटल प्रशासन ने ब्लैक लिस्ट कर दिया। फर्म से अनुबंध निरस्त कर दिए गए हैं। अब भविष्य में उससे किसी भी तरह की खरीद नहीं की जाएगी। अधीक्षक डॉ. लाखन पोसवाल ने बताया कि उक्त फर्म ने ज्यादा पैसा वसूलने के फेर में दवाइयों की खरीद के बिल में कई बार गड़बड़ी की। हमने निविदा के जरिए नवजात बच्चों में खून का बहाव रोकने वाले एंटी थाइमोसाइट ग्लोब्यूलिन इंजेक्शन खरीद की डिमांड की थी। इस पर तीन किस्त में 57 इंजेक्शन दिए गए, लेकिन बिल इम्यूनो ग्लोब्यूलिन (एटीजी) का दे दिया। एंटी थाइमोसाइट ग्लोब्यूलिन की खरीद के हिसाब से बिल करीब तीन लाख का बनना था, लेकिन इम्यूनो ग्लोबिन से करीब पांच लाख का बनाया गया।

पहले भी कई गड़बड़ियां कीं : डॉ जोशी

अस्पताल उप अधीक्षक डॉ. रमेश जोशी ने बताया कि एंजियोप्लास्टी और एंजियोग्राफी के काम आने वाले पीटीसीए बलून अौर पेंटाप्राजोल लिवोसल्प्राइड दवा के बिलों में भी उक्त फर्म हेराफेरी कर चुकी है। छह माह पहले भी दवाई खरीद की निविदा को लेकर डिस्ट्रीब्यूटर के साझेदार ने हॉस्पिटल की आवक-जावक शाखा में जाकर लिफाफे फाड़ दिए थे। तब आरोपी पार्टनर सुरेन्द्र गोदावत के खिलाफ हमने एफआईआर दर्ज कराई थी। किडनी रोगियों के लिए घटिया कैथेटर की सप्लाई का मामला भी सामने आया था।

हेराफेरी नहीं, टाइपो मिस्टेक थी : गोदावत

अस्पताल प्रशासन ने जुलाई 2018 से भामाशाह और दवा योजना का करीब 70 लाख रुपए पेमेंट रोक रखा है। दवा बेचने में मैंने कोई हेराफेरी नहीं की। एक बिल में मांगी गई दवा की जगह दूसरी दवा का नाम टाइपो मिस्टेक थी। इसे सुधार कर माफी मांग ली थी। कैथेटर भी घटिया नहीं थे, लेकिन हॉस्पिटल ने अपने स्वार्थ से उन्हें घटिया बता दिया। सभी आरोप झूठे हैं। सुरेन्द्र गोदावत, पार्टनर, सीडी डिस्ट्रीब्यूटर्स

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