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समाज के हर वर्ग को रंगती है बहुरंगी होली की उमंग

एक वर्ष पहले
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आपकी खबरें :- धर्म, समाज, क्लब, एसोसिएशन और संस्थाओं के आयोजन

उदयपुर | समुत्कर्ष समिति की रंग और उमंग का पर्व होली विषय पर 72वीं समुत्कर्ष विचार गोष्ठी शनिवार को हुई। इसमें वैद्य रामेश्वर प्रसाद शर्मा ने कहा कि होली के रंगीले पर्व में सभी प्रकार के भेद समाप्त होकर रंगों की छटा समाज व्यापी हो जाती है। बाल साहित्यकार तरुण कुमार दाधीच ने कहा कि भारतीय संस्कृति के जो भी त्योहार हैं उनका वैज्ञानिक आधार है। संदीप आमेटा ने कहा कि होली प्रेम, भाईचारे एवं एकता का प्रतीक है। विद्यासागर ने कहा कि आध्यात्मिक, धार्मिक होने के साथ ही यह सामाजिक एवं सांस्कृतिक त्योहार भी है। गोपाल लाल माली, विनय दवे, श्याम मट्टपाल, हरिदत्त शर्मा अादि ने भी विचार रखे।
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