मन-मस्तिष्क से संगत है संगीत, ताल के साथ थिरकते कदम हैं बेहतरीन व्यायाम
मानसिक शांति देता है शास्त्रीय संगीत कारगर है डांस थैरेपी : डॉ. खेराड़ा
मनोचिकित्सक डॉ. सुशील खेराड़ा बताते हैं कि शास्त्रीय संगीत वास्तव में फायदेमंद है। कारण यह है कि हम दिनभर सोचते रहते हैं। ज्यादा सोचने से मानसिक शांति नहीं मिल पाती है। संगीत और नृत्य दूसरे विचारों से ध्यान बंटाता है और बाॅडी रिलेक्स हो जाती है। फायदा सबमें होता है, यह करने वाले पर निर्भर करता है कि वह कौनसा नृत्य कर रहा है। अगर उत्तेजनात्मक नृत्य होगा तो वह शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। नृत्य और संगीत इलाज करने का हिस्सा है, जिसे डांस थैरेपी कहा जाता है। सुविवि में मनोविज्ञान विभाग प्रमुख प्रो. कल्पना जैन बताती हैं कि संगीत और नृत्य से मन की स्थिति में परिवर्तन आता है। सकारात्मक भाव आते हैं। डांस से फिजिकल एक्टिविटी होती है। आज के समय हमारे लाइफ स्टाइल के कारण फिजिकल एक्सरसाइज नहीं हो पाती है। इससे मेंटल डवलपमेंट हाेता है। ब्रेन न्यूरोन्स के लिए फिजिकल ऐक्टिविटी होनी जरूरी है।
शरीर के सात चक्र से जुड़े हैं राग, गायन से दूर होते हैं कई रोग : डॉ. मोनिका
अहमदाबाद की शास्त्रीय संगीतज्ञ डॉ. मोनिका शाह बताती हैं कि शास्त्रीय संगीत का वैज्ञानिक आधार भी है। इसमें राग हर प्रहर के अनुसार से गाए जाते हैं। ये राग हमारे शरीर के सात चक्र से जुड़े हैं। गायन से प्राणायाम भी होता है। तानें गाने से स्पीच थैरेपी भी होती है। सबसे बड़ी बात यह कि इससे मन-मस्तिष्क की एकाग्रता आती है। गायन में पांचों इंद्रियों का उपयोग होता है। सभी इंद्रियों का तालमेल स्मरण शक्ति भी बढ़ाता है। यह अलग-अलग रोगों के उपचार में सहायक है। मूलाधार चक्र से शुरू होकर सहस्र चक्र तक रागों के साथ चक्र जुड़े हैं। यमन राग से रिलेक्स, पेट के रोगों का ठीक होते है। बने का राग दोपहर में गाया जाता है, जिससे थायराइड, श्वास और हकलाने की समस्या ठीक होती है। सुबह भैरवी के का गायन अस्थमा और मानसिक रोग का निदान करता है। मध्य रात्रि के दूसरे प्रहर के राग शांति-आनंद देते हैं।