जीवंत किए रास-रंगोत्सव, मुद्राओं से बताई भास्कर से प्रकाशमान है सृष्टि
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र में शिल्पग्राम में तीन दिवसीय ऋतु वसंत का शुक्रवार को शुरू हुआ। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की कुंज लता और दल ने ओडिसी शैली में बसंत ऋतु को एक अनूठे अंदाज में रूपायित किया। अपनी धीर गम्भीर और सौम्य प्रस्तुति से कभी सूर्य रथ तो कभी श्री कृष्ण की मोहक छवि को मंच पर जीवंत किया। प्रभारी निदेशक सुधांशु सिंह ने बताया कि नृत्यांगना कुंज लता मिश्रा ने अपने नर्तन की शुरूआत सूर्य वंदना से की। अपनी इस रचना में आकर्षक नृत्य मुद्राओं और भाव सम्प्रेषण के माध्यम से कलाकारों ने बताया कि सूर्य से समस्त सृष्टि प्रकाशमान है और विकास के समस्त पथ सूर्य से प्रस्फुटित होते हैं। सूर्य स्तुति के सुरीले गायन के साथ अपनी भाव प्रवणता और मोहक संरचनाओं से सूर्य रथ का दृश्य जहां मनोरम बन गया। वहीं सूर्योदय के साथ जिस प्रसन्नता का संचार होता है उसका प्रकटीकरण प्रभावी और मोहक बन सका। बसंत ऋतु के आगमन पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा की रास और अन्य लीलाओं का प्रदर्शन अद्भुत लावण्य और रस के साथ किया। नृत्य के माध्यम से बताया कि समस्त ऋतुओं का आधार स्वयं भगवान श्रीकृष्ण हैं। भगवान के साथ होली के रंगों से सराबोर गोपियों का दृश्य अत्यंत सुंदर और चित्त मोहने वाला बन सका। नृत्य में प्रशांत कुमार बेहेरा, गुरू प्रताप नारायण, मानश कुमार शरंगी, प्रदीप कुमार, रहीम खान, निखिल बेहेरा, वृंदारानी शर्मा, प्रभा गोस्वामी, अनुराधा, नीलू, दीपांजलि मिश्रा, मधुमिता, रोचना, शर्मा, सुस्मिता, दक्ष्यायनी शर्मा आदि कलाकार थे। कार्यक्रम में हीरालाल कुणावत, डॉ. प्रेम भण्डारी आदि मौजूद थे।