आरयू की प्रो. विभा ने कहा, गांधी-गोडसे-सावरकर में काैन महानायक, इतिहास के पुनरावलोकन की जरूरत
यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान जयपुर के इतिहास विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विभा उपाध्याय ने कहा है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नाथूराम गोडसे अाैर सावरकर में से काैन महानायक है, इतिहास के पुनरावलाेकन की जरूरत है। हम कभी किसे महानायक बना देते हैं ताे कभी किसी काे खलनायक। प्रो. विभा ने कहा- कि भारत के महानायक महात्मा गांधी, नाथूराम गोडसे, वीर सावकर, शिवाजी को भारतीय इतिहास में उचित स्थान नहीं दिया गया है। प्रो. विभा शुक्रवार को सुविवि के इतिहास विभाग की प्रताप स्मृति व्याख्यानमाला में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं।
उन्हाेंने कहा कि हिटलर और वीर सावरकर को प्रेरणास्पद मानें या नहीं इसके लिए भी पुनरावलोकन की जरूरत है। कहीं ऐसा नहीं हो कि जेएनयू के छात्रनेता कन्हैया कुमार ही 100 वर्षों बाद महानायक की तरह किताबों में आ जाएं। उन्हाेंने कहा कि जब इच्छा होती तब इनमें से किसी को भी हासिये पर खड़ा कर देते हैं। जब इच्छा होती तब नायक मानते हैं। इस दृष्टि से राणा प्रताप एक नायक थे, जिनसे महानायकों को पढ़ने की जरूरत है। इन महानायकों को पढ़ना कोई राष्ट्रवादी इतिहास लेखन नहीं है। उनको पढ़ना इतिहास की आवश्यकता है।
उस जमाने में पंडित भांग पीकर हाथों से वर्षों तक 100-100 पोथियां लिखते रहते रहते थे : प्रो. द्विवेदी
मानविकी संकाय अध्यक्ष प्रो. हेमंत द्विवेदी ने कहा कि यूरोपियन सिस्टम ने प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार भारत से पहले कर लिया था। इसलिए यूरोपियन अपनी बात बेहतर ढंग से पेश कर सके। जबकि उस जमाने में पंडित भांग पीकर हाथों से पोथियां लिखते रहते थे। एक-एक आदमी 100 प्रतियां वर्षों तक लिखता रहता था। इसलिए हम यूरोपियन की तुलना में प्रमुखता और अधिकाधिक रूप से अपनी बात जनता तक नहीं पहुंचा पाए। प्रो. अंजु कोहली ने कहा कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के सुचारू संचालन में इतिहासकारों का योगदान अहम होता है। आर्ट्स कॉलेज डीन प्रो. साधना कोठारी, प्रो. केएस गुप्ता, प्रो. मीना गौड़, प्रो. जीएन माथुर, विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय भटनागर, डॉ. पीयूष भादविया, डॉ. भानु कपिल मौजूद थे।
प्रो. राणावत बोले : प्रताप की लंबाई 6 फीट थी, उनके भाला-कवच 80-80 किग्रा वजनी नहीं थे
इतिहासविद प्रो. पुष्पेंद्र सिंह राणावत बताते हैं कि महाराणा प्रताप की लंबाई करीब 6 फीट थी। ना भाला 80 किग्रा का था, ना ही 80 किग्रा का कवच था। सुनील गावस्कर का बल्ला कोई 80 किग्रा और मेजर ध्यानचंद की हॉकी कोई 80 किग्रा की नहीं थी। फिर भी वे क्रिकेट और हॉकी में अपना जादू दिखा देते थे। ऐसे महाराणा प्रताप लंबाई सामान्य 6 फीट के करीब थी। उनके शस्त्र सिटी पैलेस म्यूजियम में हैं, जिनके वचन तक दर्शाए हुए हैं।
सुविवि के इतिहास विभाग की प्रताप स्मृति व्याख्यानमाला में शामिल अतिथि।
सुविवि कुलपति प्रो. एनएस राठौड़ ने कहा कि महाराणा प्रताप का भाला 80 किग्रा और कवच भी 80 किग्रा वजनी था। उनकी हाइट 7 फीट 5 इंच थी। उनका कुल वजन 110 किग्रा था। जबकि वे 210 किग्रा वजन भार बॉडी पर रहता था। वे महाराणा प्रताप से शारीरिक रूप से दुरुस्त रहने की सीख लेने का पाठ पढ़ा रहे थे। सुविवि में इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. दिग्विजय भटनागर ने भी कुलपति प्रो. राठौड़ के इस वक्तव्य का समर्थन किया है।
महाराणा प्रताप की लंबाई 7.5 फीट थी, 80-80 किग्रा के भाला-कवच लेकर चलते थे : कुलपति प्रो. राठौड़